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फसल बीमा योजना को किसानों तक पहुंचाने में मदद करेगी प्रोफेशनल की टीम, जारी होगी नई गाइडलाइंस

फसल बीमा योजना का फायदा किसानों तक न पहुंचने से चिंतित मोदी सरकार ने एक नई पहल की है।

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नई दिल्‍ली। फसल बीमा योजना का फायदा किसानों तक न पहुंचने से चिंतित मोदी सरकार ने एक नई पहल की है। केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि प्रोफेशनल की एक टीम अगले माह तक तैयार की जाएगी और यह टीम प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद करेगी। इसके अलावा 2018-19 तक कुल फसल एरिया के 50 फीसदी एरिया को स्‍कीम के तहत कवर किया जाएगा। 

 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की कमियां होंगी दूर 

 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कमियों को दूर करने के लिए कृषि मंत्रालय ने गाइडलाइंस में बदलाव किया है और इसे अगले 15 दिन में जारी किया जाएगा। फसल बीमा योजना के पोर्टल को अपग्रेड किया गया है और इसमें नए फीचर्स जोड़े गए हैं। प्रधानंत्री फसल बीमा योजना को 2016 में लांच किया गया था। यह स्‍कीम 25 राज्‍य में लागू है।

 

30 फीसदी एरिया स्‍क्‍ीम के तहत कवर  

 

कृषि राज्‍य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने फिक्‍की के आयोजन में कहा कि इस स्‍क्‍ीम को अच्‍छा रिस्‍पांस मिला है। इस स्‍क्‍ीम के तहत कवरेज बढ़ा है। स्‍क्‍ीम को और ज्‍यादा प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं जिससे ज्‍यादा से ज्‍यादा किसान इस स्‍क्‍ीम का फायदा उठा सकें। उन्‍होंने कहा कि अब तक इस स्‍क्‍ीम के तहत कुल फसल एरिया का 30 फीसदी कवर है। अगले वर्ष तक इसे बढ़ा कर 50 फीसदी करने का लक्ष्‍य है। 

 

अभी क्‍या है कमियां 

फसल बीमा योजना में अभी सबसे बड़ी कमी यह है कि किसानों को फसल के नुकसान पर फौरी मदद नहीं मिल पाती है। इसके लिए जो मकैनिज्‍म जिम्‍मेदार है वह समय पर काम नहीं करता है। फसल बीमा योजना के लिए बनाया गया पोर्टल में भी कमियां हैं। बैंक इस स्‍क्‍ीम के तहत कवर किसानों का डाटा पोर्टल पर अपलोड नहीं कर पा रहे हैं। इससे बीमा कंपनियों को डाटा नहीं मिल रहा है। इससे क्‍लेम मिलने में दिक्‍कत होगी। इसके अलावा राज्‍य सरकारें समय पर प्रीमियम नहीं जमा कराती हैं। नियम के तहत जब तक राज्‍य सरकारें अपने हिस्‍से का प्रीमियम नहीं जमा कराती हैं किसानों को क्‍लेम नहीं मिलता है। इसके अलावा इस स्‍क्‍ीम में ज्‍यादातर किसान लोन लेने वाले हैं। खुद अपनी इच्‍छा से फसल बीमा खरीदने वाले किसानों की संख्‍या 10 फीसदी ही है। नियमों के तहत बैंक लोन लेने वाले किसान को फसल बीमा लेना होगा। 

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