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IRDAI के पोर्टल पर 16,000 से ज्‍यादा हॉस्पिटल्‍स ने कराया रजिस्‍ट्रेशन, बताना होगा इलाज का रेट

बीमा नियामक भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण IRDAI के पोर्टल पर अब तक 16,000 से अधिक हॉस्पिटल्‍स ने रजिस्‍ट्रेशन

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नई दिल्‍ली। बीमा नियामक भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण IRDAI के पोर्टल पर अब तक 16,000 से अधिक हॉस्पिटल्‍स ने रजिस्‍ट्रेशन कराया है। इन हॉस्पिल्‍स ने पोर्टल पर यह डिटेल अपलोड की है कि उनके यहां कितने बेड हैं और क्‍या सुविधाएं हैं। आने वाले समय मे रोहिणी पोर्टल यानी रजिस्‍ट्री ऑफ हॉस्पिटल्‍स इन नेटवर्क ऑफ इन्‍श्‍योरेंस पर खुद को रजिस्‍टर कराने वाले हॉस्प्टिल्‍स की संख्‍या बढ़ने की उम्‍मीद है। बीमा नियामक का मानना है कि इससे इन्‍श्‍योरेंस कंपनियों के नेटवर्क में शामिल हॉस्पिटल्‍स के काम काज के तौर तरीको में पारदर्शिता आएगी। 

 

बताना होगा इलाज का रेट 

 

जनरल इन्‍श्‍योरेंस काउंसिल के सेक्रेटरी जनरल एम चंद्रशेखरन ने बताया कि रीइम्‍बर्समेंट क्‍लेम में डील करने वाले हॉस्पिटल्‍स की संख्‍या 40-4 2 हजार होगी। ऐसे में 16000 से अधिक हॉस्पिटल्‍स का रजिस्‍ट्रैशन कराना एक बेहतर संकेत है। आने वाले समय में और अस्‍पताल रोहिणी पोर्टल पर खुद को रजिस्‍टर कराएंगे। हम बारे में हॉस्पिटल्‍स से लगातार बातचीत कर रहे हैं। अगले स्‍टेप के तौर रजिस्‍ट्रेशन कराने वाले अस्‍पतालों को यह डिटेल देनी होगी कि उनके यहां किसी खास बीमारी के इलाज का क्‍या रेट है। यह डिटेल बाद में बीमा नियामक सार्वजनिक करेगा जिससे आम लोग जान सकेंगे कि किस अस्‍पताल में किसी खास इलाज का क्‍या रेट है। 

 

साझा होगा इलेक्‍ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड 


आने वाले समय में रोहिणी पोर्टल पर रजिस्‍टर हॉस्पिटल्‍स के मरीजों का इलेक्‍ट्रॉनिक मेडिक्‍ल रिकॉर्ड हॉस्पिटल्‍स और बीमा कंपनियां साझा कर सकेंगे। इससे हॉस्पिटल्‍स और बीमा कंपनियों दोनों को फायदा होगा। 


बीमा नियामक ने पोर्टल पर रजिस्‍टर कराने का दिया था निर्देश 


बीमा नियामक ने अपने निर्देश में कहा था कि रीइम्‍बर्समेंट क्‍लेम में डील करने वाले सभी हॉस्पिटल और नेटवर्क ऑफ हॉस्पिटल को मार्च 2017 तक खुद को रोहिणी पोर्टल पर रजिस्‍टर कराना होगा। हालांकिे अब तक सभी अस्‍पतालों ने खुद को पोर्टल पर रजिस्‍टर नहीं कराया है। चंद्रशेखरन का कहना है कि IRDAI बीमा कंपनियों का रेगुलेटर है न कि हॉस्पिटल्‍स का। ऐसे में बीमा नियामक हॉस्पिटल्‍स के लिए पोर्टल पर रजिस्‍ट्रेशन अनिवार्य नहीं कर सकता है। 

 

आगे पढें-बीमा कंपनियों के नेटवर्क से बाहर हो सकते हैं रजिस्‍टर न कराने वाले हॉस्पिटल्‍स

 

 


बीमा कंपनियों के नेटवर्क से बाहर हो सकते हैं रजिस्‍टर न कराने वाले हॉस्पिटल्‍स


अगर आने वाले समय में हॉस्पिटल्‍स रोहिणी पोर्टल पर खुद को रजिस्‍टर नहीं कराते हैं तो बीमा नियामक इन्‍श्‍योरेंस कंपनियों से कह सकता है कि वे ऐसे अस्‍पतालों का रीइम्‍बर्समेंट क्‍लेम रोक दे। लेकिन कैशलेस क्‍लेम रोका नहीं जा सकता क्‍योंकि इससे पॉलिसी होल्‍डर्स के हितों को नुकसान होगा। 

 

अस्‍पताल को होगा फायदा

रोहिणी पोर्टल पर खुद को रजिस्‍टर कराने वाले हॉस्पिटल्‍स की विश्‍वसनीयता बढ़गी और उनकी ब्रांडिंग होगी। इससे उनको कारोबार के लिहाज से भी फायदा होगा। इसके अलावा इन हॉस्पिटल्‍स में इलाज कराने वाले मरीजों का हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस क्‍लेम सेटलमेंट भी तेजी से होगा। 

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