मां, बहन और पत्नी का जरूर कराएं बीमा, नजरंदाज करना पड़ेगा भारी

Life and Health Insurance for women: बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) की रिपोर्ट कहती है कि 2017-18 में 2.82 करोड़ जीवन बीमा पॉलिसी बेची गईं और पहले साल इनसे 92,135 करोड़ रुपए प्रीमियम इकठ्‌ठा किया गया। इस रिपोर्ट का एक चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि पॉलिसियों की संख्या और प्रीमियम संग्रह में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 32 फीसदी रही। आंकड़ों के मुताबिक हर दो पुरुषों के जीवन बीमा खरीदने के बाद 1 महिला बीमा पॉलिसी खरीदती है। ऐसे में जरूरत है कि घर की महिलाओं का बीमा कराया जाए।

Money Bhaskar

Feb 05,2019 12:56:00 PM IST

नई दिल्ली.

बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) की रिपोर्ट कहती है कि 2017-18 में 2.82 करोड़ जीवन बीमा पॉलिसी बेची गईं और पहले साल इनसे 92,135 करोड़ रुपए प्रीमियम इकठ्‌ठा किया गया। इस रिपोर्ट का एक चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि पॉलिसियों की संख्या और प्रीमियम संग्रह में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 32 फीसदी रही। इतना ही नहीं वित्त वर्ष 2016-17 की आर्थिक समीक्षा में बताया गया कि देश में महज 3.49 फीसदी लोगों ने जीवन बीमा कराया है। इसमें भी अहम बात यह है कि जीवन बीमा पॉलिसी खरीदने में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले बहुत पीछे हैं। आंकड़ों के मुताबिक हर दो पुरुषों के जीवन बीमा खरीदने के बाद 1 महिला बीमा पॉलिसी खरीदती है। ऐसे में जरूरत है कि घर की महिलाओं का बीमा कराया जाए।

जाे आपका खयाल रखती हैं उनका रखें खयाल

अक्सर परिवारों को लगता है कि घर संभालने वाली महिलाओं को पॉलिसी की जरूरत नहीं होती है। यही वजह है कि पॉलिसी की खरीदारी में महिलाओं की हिस्सेदारी कम होती है। दरअसल लोगों को लगता है कि अगर कोई आय नहीं है तो कर बचाने की जरूरत भी महसूस नहीं होती, इसलिए गृहणियों के लिए बीमा पॉलिसी नहीं खरीदी जाती है। लेकिन अगर एक्सपर्ट्स की बात मानी जाए तो गृहणियों के लिए भी जीवन बीमा पॉलिसी जरूरी है, क्योंकि किसी भी हादसे की स्थिति में या अचानक गृहणी की मृत्यु हो जाने पर पति को घर के कामकाज में ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ सकती है।

सोच-समझकर लें बीमा कवर

एक्सपर्ट्स की मानें तो किसी गृहिणी के लिए इतनी बीमा कवर की रकम इतनी होनी चाहिए, जो उसके आर्थिक योगदानों के मूल्यांकन के लिहाज से पर्याप्त हो। उचित तो यह होना चाहिए कि परिवार की शुद्ध हैसियत और जीवन बीमा की कवर राशि इतनी होनी चाहिए, जो वित्तीय लक्ष्य पूरा करने के लिए, देनदारी निपटाने और खर्चों की भरपाई के लिए पर्याप्त हो।

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