पर्सनल फाइनेंस /कहीं आप भी तो नहीं हैं मनी डिसॉर्डर के शिकार, जानिए इसके 8 लक्षणों के बारे में

  • पैसे को मैनेज न कर पाने के चलते लोगों के फाइनेंशियल गोल कभी पूरे नहीं हो पाते।

Money Bhaskar

May 22,2019 12:43:35 PM IST

नई दिल्ली.

पैसा तो हर कोई कमाता है, लेकिन कोई उसे अच्छे से मैनेज कर लेता है और कोई नहीं कर पाता। पैसे को मैनेज न कर पाने के चलते लोगों के फाइनेंशियल गोल कभी पूरे नहीं हो पाते। हाथ में पैसा आता है, लेकिन यूं ही खर्च हो जाता है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो आप 'मनी डिसॉर्डर' (Money Disorder) के शिकार हो सकते हैं। यानी आपके अंदर पैसे को ठीक से संभाल न पाने की कमी है। फाइनेंशियल साइकोलॉजिस्ट Brad Klontz ने अपनी किताब Mind over Money में मनी डिसॉर्डर के लक्षणों और उनके इलाज के बारे में बताया है। आप भी जानिए इसके बारे में-

1. Financial Denial (आर्थिक विराग)

लक्षण: आप बहुत जरूरी चीजों में या क्रेडिट कार्ड का बिल भरने में पैसा खर्च नहीं करते। कहीं इन्वेस्ट नहीं करते और अपने बैंक में पैसे को बेकार पड़ा रहने देते हैं। टैक्स रिटर्न भरने तारीख आगे बढ़ाते रहते हैं और अपना पोर्टफोलियो मैनेज नहीं करते। अपने पैसे का सही इस्तेमाल न करना आर्थिक चिंता की निशानी हो सकता है।

इलाज: अपनी सभी आर्थिक गतिविधियों के लिए तारीख तय करें और अपने फोन में रिमाइंडर सेट करें। अगर आप निवेश को लेकर चिंतित महसूस करें तो किसी साइकोलॉजिस्ट की मदद भी ले सकते हैं।

2. Financial Rejection (आर्थिक अस्वीकृति)

लक्षण: आप जानबूझकर अपना सारा पैसा कहीं भी किसी को भी दे देते हैं। आप भले ही अच्छी कमाई करते हों, लेकिन महीने के अंत तक आपके पास ज्यादा पैसा नहीं बचता है, जिससे आपके आर्थिक लक्ष्य पूरे नहीं हो पा रहे हैं। आपमें आत्मसम्मान बहुत कम है और पैसा इकठ्‌ठा करने से आप ग्लानि महसूस करते हैं।

इलाज: अपनी सैलरी अपने पति या पत्नी के हाथ में दें, जो उसे ठीक से इन्वेस्ट कर सके। या फिर अपने सारे पेमेंट्स को ऑटोमैटिक मोड पर रखें, जिससे अकाउंट में सैलरी आते ही वह सही जगह इन्वेस्ट हो जाए।

3. Underspending (कम खर्च करना)

लक्षण : आप पैसा खर्च करना इतना फिजूल समझते हैं, कि पैसा होते हुए भी बेहद खराब तरीके से जिंदगी जी रहे हैं। आपकी जीने की परिस्थितियां इतनी खराब हैं कि आप अपने और अपने परिवार की बेसिक जरूरतों पर भी खर्च नहीं करते हैं।

इलाज: अपने पति या पत्नी को अपने फाइनेंस हैंडल करने दें। किसी फाइनेंशियल एडवाइजर या साइकोलॉजिस्ट से सलाह लें।

4. Compulsive Hoarding (पैसे की जमाखोरी)

लक्षण: आप चीजों, यहां तक कि पैसों को भी जमा करने से खुद को रोक नहीं पाते हैं और अपने कब्जे की चीजों से छुटकारा पाने से इनकार कर देते हैं। सामान जुटाने की यह सनक ऐसे लेवल पर पहुंच जाती है जहां जमाखोरी के चलते घर में समान्य तरीके से जीना भी मुहाल हो जाता है।

इलाज: अपने इन्वेस्टमेंट्स को ऑटोमैटिक मोड पर रखें, जिससे आपके अकाउंट में सैलरी आते ही वह अपने आप इन्वेस्ट हाे जाए। अपने क्रेडिट कार्ड्स को फेंक दें।

5. Workaholism (काम की लत)

लक्षण: आप बिना ब्रेक लिए बहुत मेहनत से काम करते हैं क्योंकि आप ज्यादा से ज्यादा दौलत जुटाना चाहते हैं। आपके मन में आर्थिक असुरक्षा का भाव है, इसलिए जितना ज्यादा पैसा आप कमाते हैं, आपको उतना ज्यादा अच्छा लगता है।

इलाज: अपने लिए छोटे- छोटे लक्ष्य बनाएं और तय करें कि उन्हें पूरा करने के लिए आपको कितना पैसा जुटाना होगा। जब आप एक लक्ष्य के बराबर पैसा जुटा लें, तो उसके बाद रिलैक्स करें।

6. Overspending or Compulsive Buying (जरूरत से ज्यादा खर्च करना या जबरदस्ती चीजें खरीदना)

लक्षण: आप जल्दी-जल्दी चीजें खरीदना और पैसा खर्च करना चाहते हैं क्याेंकि इससे आपको खुशी मिलती है। आप बहुत ज्यादा बेचैन रहते हैं और खरीदारी करने से आपको उस पल में आराम मिलता है। हालांकि जैसे ही आप शॉपिंग करके लौटते हैं, आप फिर से दुखी हो जाते हैं और यह प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती।

इलाज: किसी मनोवैज्ञानिक से बात करके अपनी चिंता और बेचैनी का हल निकालिए। जैसे ही चिंता की वजह खत्म हो जाएगी, आपकी आदत भी बदल जाएगी।

7. Financial Infidelity (आर्थिक विश्वासघात)

लक्षण: आप पैसों के बारे में या अपने खर्चों के बारे में अपने पति-पत्नी से डिस्कस नहीं कर रहे हैं। चाहे यह बचत के बारे में हो, खर्च के बारे में या निवेश के बारे में। आप अपने फाइनेंस को अपने साथी से छुपाकर रखने की कोशिश करते हैं।

इलाज: टीम की तरह काम करें और एक-दूसरे से बातचीत करें। जरूरत पड़े तो किसी काउंसलर से सलाह लें।

8. Financial Incest (आर्थिक दोषारोपण)

लक्षण: आप पैसों से जुड़ी अपनी परेशानियां अपने बच्चों पर डाल रहे हैं, जिससे आपका स्ट्रेस कम हो सके। आप पैसों से जुड़ी समस्याओं के लिए अपने पति-पत्नी को दोष देते हैं। बच्चों को पैसा खर्च करने पर अपराध बोध महसूस कराते हैं या फिर अपने ऑफिस का स्ट्रेस अपने बच्चे से बांटते हैं।

इलाज: काउंसिलिंग के जरिए अपने परिवार से अपने संबंध बेहतर बनाएं।

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