आर्थिक सुरक्षा /सुस्ती के दौर में वित्तीय गणित ठीक रखना बेहद जरूरी

  • देश में आर्थिक सुस्ती का माहौल है, ऐसे में आने वाला समय आम आदमी के लिए कठिन हो सकता है

Moneybhaskar.com

Sep 02,2019 06:28:30 PM IST

नई दिल्ली. अर्थव्यवस्था इन दिनों बेहद सुस्ती के दौर से गुजर रही है। विकास दर छह साल के निचले स्तर पर आ गई है। विभिन्न सेक्टरों में बिक्री काफी घट गई है। लाखों लोगों की नौकरी छूट चुकी है और आगे भी नौकरी का संकट बना हुआ है। आने वाला समय हमारी जेब पर भारी पड़ सकता है। ऐसे समय में कुछ बातों का ध्यान रखकर हम अपनी वित्तीय किलेबंदी को कमजोर होने से रोक सकते हैं :

एसआईपी को न करें बंद

निवेशक अक्सर कठिन समय में एसआईपी यानी, सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान को बंद कर देते हैं। पर इस समय किया गया एसआईपी निवेश लंबे समय में बहुत ऊंचा रिटर्न देता है। इस समय शेयरों या शेयर आधारित म्यूचुअल फंड की यूनिट का भाव कम होता है। इसलिए छोटी राशि पर निवेशक अधिक मूल्य हासिल करते हैं। कुछ साल बाद जब बाजार में मजबूती आती है, तो कठिन समय में किए गए निवेश का मूल्य काफी अधिक हो जाता है।

बाजार से कम प्रभावित होने वाली संपत्ति का करें चुनाव

सुस्ती के माहौल में ऐसी संपत्ति का चुनाव करना चाहिए, जो बाजार से कम प्रभावित होते हैं। शेयर की जगह बांड को तरजीह दें। ऐसे फंड में निवेशक करें, जो हालत के हिसाब से शेयर या बांड में संपत्ति का आवंटन करते हैं। इन लिहाज से हाइब्रिड फंड्स काफी महत्वपूर्ण हैं।

गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड सॉवरेन बांड में कुछ पैसे लगाएं

अनिश्चित आर्थिक माहौल में सोने-चांदी जैसी महंगी धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी होती है।इन्हें सुरक्षित निवेश संपत्ति माना जाता है, जिन पर बाजार की उतार-चढ़ाव का बहुत अधिक विपरीत असर नहीं पड़ता है। जानकारों का मानना है कि निवेशक को अपनी पूंजी का 10-15 फीसदी हिस्सा सोने में रखना चाहिए। लेकिन फिजिकल गोल्ड या आभूषण खरीदने के अपने खतरे हैं। गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड सॉवरेन बांड बेहतर विकल्प हैं।

आपात कोष बनाना है जरूरी

नौकरी पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए हर किसी के लिए एक आपात कोष बनाना जरूरी है। जानकार बताते हैं कि यह यह कोष इतना बड़ा हो कि आपका कम से कम छह महीने का खर्च इससे निकल जाए। चिकित्सा या वित्तीय आपात स्थिति आपकी सुविधा का ध्यान रखकर नहीं आते। यह कभी भी आ सकते हैं। इसलिए इस समय के लिए आपात कोष जरूरी है।

गैर जरूरी खर्चें घटाएं या आगे के लिए टालें

आर्थिक सुस्ती के समय में अपने खर्चे पर पुनर्विचार करना जरूरी है। यह देखना चाहिए कि जो खर्च हम करने जा रहे हैं, क्या उसे भविष्य के लिए टाला जा सकता है। बड़े खर्च को भी बाद के लिए छोड़ा जा सकता है। मकान खरीदना, कार खरीदना या विदेशी यात्रा करना ऐसे ही बड़े खर्चों में से हैं। इस तरह के खर्च हम पर बड़ी ईएमआई का बोझ डालते हैं, जो अनिश्चित आर्थिक माहौल में हमारे लिए एक भार बन सकता है। यदि हम ज्यादातर होटलों में खाते हैं, तो इस आदत को थोड़ा कम कर बड़ी पूंजी बचा सकते हैं।

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