फाइनेंशियल प्लानिंग /शादी के बाद भी आसानी से कर सकेंगे माता-पिता की आर्थिक मदद

  • अपनी नई जिंदगी और जरूरतों को जोखिम में डाले बिना भी दे सकते हैं अपने पेरेंट्स को सहारा
     

Moneybhaskar.com

Aug 14,2019 06:02:52 PM IST

नई दिल्ली. अक्सर शादी के बाद लोगाें के लिए अपने माता-पिता की आर्थिक मदद कर पाना आसान नहीं होता है। कई बार पति-पत्नी इस बारे में एक राय नहीं बना पाते हैं, कि दोनों के माता-पिता की कितनी और कैसी मदद करनी है। ऐसे में अगर आप कुछ बातों का खयाल रखेंगे, तो आपके लिए अपने माता-पिता और सास-ससुर की मद कर पाना आसान होगा। इन टिप्स की मदद से आप अपने वैवाहिक जीवन को संकट में लाए बिना और जरूरतों को टाले बिना अपने माता-पिता का खयाल रख पाएंगे।

1. अपने पति/पत्नी से बात करें

आपकी कोशिश होनी चाहिए कि शादी से पहले या शादी के तुरंत बाद ही आप अपने पति या पत्नी से इस बारे में बात कर लें। उन्हें पता होना चाहिए कि आप अपने माता-पिता की आर्थिक सहायता करना चाहते हैं। साथ ही यह भी साफ करें कि यह सहायता नियमित होगी या सिर्फ कुछ खास मौकों और इमरजेंसी के समय होगी। अपने पति या पत्नी से इस बारे में झूठ न बोलें कि आप अपनी सैलरी का कितना हिस्सा अपने पेरेंट्स को देना चाहते हैं। अपने पति या पत्नी को यह यकीन दिलाएं कि इससे आपके वित्तीय लक्ष्य बाधित नहीं होंगे।

2. अपनी नई फैमिली को सबसे आगे रखें

शादी और बच्चे होने के बाद आपका यह परिवार आपकी प्राथमिकता होना चाहिए। आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपके पास एक तय बजट है, आपातकाल के लिए धन और इंश्योरेंस है, आपने अपनी भविष्य की जरूरतों की पहचान कर ली है और उनके लिए निवेश भी कर रहे हैं। इसके बाद जो रकम बचे, उसमें से आप अपने माता-पिता की मदद कर सकते हैं। यानी अपने माता-पिता की हर संभव मदद करें, लेकिन अपने पारिवारिक खर्चों को नजरंदाज करके नहीं।

3. अन्य तरीकों से करें पेरेंट्स की मदद

आप सीधे-सीधे पेरेंट्स को पैसे न देकर अन्य तरीकों से भी उनका खयाल रख सकते हैं। आप उन्हें उनके फाइनेंसिस को संभालने में मदद कर सकते हैं, जैसे उनके लिए हेल्थ और क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस खरीद सकते हैं जो बुढ़ापे में उनके काम आएगी। आप उनके पैसे को सही जगह निवेश करने में भी मदद सकते हैं, जिससे रिटायरमेंट के बाद वे पूरी तरह आप पर निर्भर न हो जाएं।

4. इमरजेंसी को नजरंदाज न करें और अपने भाई-बहनों की भी मदद लें

अगर आपके माता-पिता का नियमित रूप से आर्थिक मदद की जरूरत पड़ती है, तो अकेले ही सारा खर्च उठाने की बजाय अपने भाई-बहनों को भी इसमें शामिल करें। सबसे अच्छा तरीका होगा कि आप पूरे पावार के साथ बैठें और ऐसा प्लान बनाएं जिससे सभी सहमत हों। यह भी सुनश्चित करें कि आप अपने माता-पिता की मेडिकल या किसी अन्य इमरजेंसी को नजरंदाज न करें। जब आपके माता-पिता को आपकी जरूरत हो तो आर्थिक, व्यक्तिगत और जज्बाती रूप से अपने माता-पिता का साथ जरूर दें।

5. अपने पति-पत्नी को प्राइवेसी दें

जब आपके परिवार के फाइनेंसिस ठीक तरीके से चल रहे हैं, तब आपको अपने पति-पत्नी काे आर्थिक रूप से प्राइवेसी देनी चाहिए। इसलिए अच्छा होगा कि आप अपने घरेलू खर्चों के लिए ज्वाइंट अकाउंट बनाएं और निजी खर्चों के लिए व्यक्तिगत अकाउंट बनाएं। अपने पर्सनल अकाउंट के पैसे को आप कैसे खर्च करते हैं, इसके लिए आप और अपने पति/पत्नी स्वतंत्र होने चाहिए।

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