उद्योग /क्राउडफंडिंग: एसएमबी के लिए स्मार्ट फंडिंग की दिशा में एक कदम  

  • क्राउडफंडिंग लोगों को अपने बिज़नेस के पारंपरिक मॉडल को सुव्यवस्थित करने के अवसर भी देता है।

Moneybhaskar.com

Jun 24,2019 03:21:20 PM IST

नई दिल्ली.

भारत में लघु और मध्यम व्यापार क्षेत्र तेज़ी से बढ़ रहा है और बड़े पैमाने पर अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में योगदान दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन का सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 37% का योगदान है और साथ ही इंडस्ट्री व सर्विस सेक्टर में सबसे ज़्यादा रोजगार भी दिया है। भारत में 633 लाख MSME हैं जो लगभग 11.10 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं। यह जरूरी है कि सरकार छोटे और मध्यम व्यवसायों को सशक्त बनाने की ओर ध्यान दे। साथ ही वित्तीय संस्थानों को उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार करने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराना होगा।

ऐसी कई योजनाएं हैं जिनका मकसद SMB's की फाइनेंशियल मदद करना है, उन्हीं में से एक है क्राउड-फंडिंग जो छोटे बिजनेसेज द्वारा स्केलेबिलिटी बढ़ाने के लिए अपनाया जा रहा है। क्राउडफंडिंग में बिजनेस के लिए कई इन्वेस्टर्स से छोटी-छोटी धन-राशि ई-प्लेटफॉर्म्स या सोशल प्लेटफॉर्म्स के जरिये जुटाई जाती है। आज कल MSME की फ़ाइनेंसिंग को बढ़ाने के लिए ये एक ट्रेंड बन गया है। क्राउडफंडिंग मुख्य रूप से 4 प्रकार की होती हैं: डोनेशन, रिवार्ड, पीयर-टू-पीयर लेंडिंग और इक्विटी। आइए इन सभी क्राउडफंडिंग के तरीकों पर नज़र डालें और जानें कि वे किस तरह छोटे व मझोले व्यवसायों को सही तरह से बढ़ने में मदद कर सकते हैं:

1. डोनेशन क्राउडफंडिंग:
इस प्रकार की क्राउडफंडिंग का इस्तेमाल अक्सर सामाजिक उद्देश्य या किसी की सहायता के लिए किया जाता है। इसमें कोई भी व्यक्ति या संस्थान पैसे डोनेट कर सकता है। हालांकि डोनेट करने वालों को रिटर्न के रूप में कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिलता है।

2. रिवॉर्ड क्राउडफंडिंग:
इस तरह की क्राउडफंडिंग में पैसा देने वाले निवेशकों को प्रत्यक्ष रूप से फ़ायदा मिलता है। ये लाभ तत्काल या भविष्य के हो सकते हैं, जैसे: ग्राहक, आजीवन सदस्यता या कुछ मुफ्त उपहार के रूप में।

3. पीयर-टू-पीयर लेंडिंग
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करके दो व्यक्तियों के बीच पैसे का लेन-देन सुनिश्चित किया जाता है। इसमें, ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म ऋणदाताओं और निवेशकों का SMBs से मेल कराया जाता है जिसमें कर्ज़ की राशि और ब्याज दरें प्लेटफ़ॉर्म द्वारा ही निर्धारित की जाती हैं। हालांकि, इसमें रेगुलेटर्स के लिए निवेशकों को सुरक्षा देना बड़ी चुनौती है।

4. इक्विटी-आधारित क्राउडफंडिंग:
इस तरह की फंडिंग कंपनी के इक्विटी शेयरों के बदले में की जाती है। इसमें ऑनलाइन किए गए निवेश के एवज में निवेशकों को तय संख्या में कंपनी के इक्विटी शेयर मिलेंगे।
यह क्राउडफंडिंग ऐसे क्षेत्रों में सक्रिय कंपनियों के लिए कारगर हो सकती है, जहां रिटर्न मिलने की खासी संभावना हो। क्राउडफंडिंग न केवल स्टार्ट-अप्स को वित्तीय सहायता देने में मदद करता है, बल्कि लोगों को अपने बिज़नेस के पारंपरिक मॉडल को सुव्यवस्थित करने के अवसर भी देता है। आमतौर पर, उद्यमी को अपनी व्यावसायिक प्रक्रियाओं को ठीक करने में काफी समय लगता है। क्राउडफंडिंग के जरिये वो संभावित निवेशकों से मिलकर अपने बिजनेस को बेहतर ढंग से एक्सप्लोर कर सकते हैं, जो उनके बिजनेस को विकसित करने में काफी सहायक होता है।

क्राउडफंडिंग ही क्यों?
किसी भी नई तकनीक को अपनाने से पहले हर व्यक्ति इसके फायदों के बारे में जानना चाहता है और इसीलिए हम यहां आपको व्यवसाय के लिए क्राउडफंडिंग चुनने के फायदों के बारे में बता रहे हैं:

1. वित्तीय सलाह के लिए आसान पहुंच:
क्राउडफंडिंग पोर्टल्स की मदद से आप सर्टिफ़ाइड फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स से भी जुड़ सकते हैं जो बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए ज़रूरी आर्थिक फैसले लेने में आपकी सहायता व मार्गदर्शन करते हैं।


2. पीआर और मार्केटिंग:
आमतौर पर बिजनेस का प्रचार व प्रसार काफी मुश्किल होता है लेकिन क्राउडफंडिंग के जरिये ये मुश्किल भी आसानी से हल हो सकती है। स्टार्ट-अप्स को अक्सर मार्केट में खुद को प्रोमोट करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन क्राउडफंडिंग आपको अपने बिजनेस के बारे में "शोर करने" का अवसर प्रदान करता है जिसे मार्केटिंग की भाषा में "make noise" भी कहते हैं।

3. कॉन्सेप्ट का औचित्य:
अपने व्यवसाय को शुरू करने से पहले लोगों के सामने अपने कारोबार के बारे में बताकर आपको अपनी मार्केटिंग की रणनीतियों के साथ तमाम प्रयोग करने के मौके मिलते हैं। क्राउडफंडिंग कारोबारियों के लिए जांच, आकलन और बदलाव करने का मंच है, जिससे व्यवसाय में बेहतर परिणाम मिलने की संभावनाएं बढ़ती हैं।


4. शून्य निवेश:
अतिरिक्त खर्च के बिना भी आपको कई फ़ायदे देने वाली क्राउडफंडिंग आपके बिजनेस के लिए फाइनेंसेज़ जुटाने का एक शानदार तरीका है। आमतौर पर क्राउडफंडिंग को नॉन-प्रॉफ़िट और सामाजिक हित में काम करने वाले उद्यमियों के लिए एक फ़ाइनेंशियल सोर्स के रूप में देखा जाता है, वहीं इनसे अलग कुछ ऐसे भी स्टार्ट-अप हैं जिन्हें इस तकनीक के माध्यम से काफी फ़ायदा हुआ है। भारत के कुछ शीर्ष क्राउडफंडिंग वेंचर्स हैं जिन्होंने कई उद्यमियों के सपनों का समर्थन किया है जैसे Ketto, Catapoolt, BitGiving, ImpactGuru, आदि।

सरकार के डिजिटल इंडिया पर जोर देने के साथ ही भविष्य में निश्चित रूप से क्राउडफंडिंग व्यावसायिक वित्तपोषण का मुख्य स्रोत बनने जा रहा है, जिसका फायदा सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों को मिलेगा। नवीनतम तकनीक को अपनाने व पूरी तरह से डिजिटल होने के साथ ही MSME को फंड इनफ़्लो से जुड़े गंभीर फैसले लेने की भी ज़रूरत है। छोटे और मध्यम व्यापार की मदद के लिए क्राउडफंडिंग के कई ऑप्शन्स मौजूद हैं लेकिन ज़रूरी है कि उद्यमी इन अवसरों का ज़्यादा से ज़्यादा उपयोग करें और अपने बिजनेस के लिए फ़ाइनेंशियल मदद पा सकें। क्राउडफंडिंग मॉडल में, सभी बिज़नेस से ये उम्मीद की जाती है कि वे नई तकनीक और लगातार बदल रहे मार्केटिंग नॉर्म्स को अपनाएं। इसके साथ ही, शीर्ष पर बने रहने के लिए ज़रूरी है कि MSME अपने डिजिटल व्यवहार को बदलने में भी न हिचकिचाएं।

एक तरफ जहां बिजनेस को शुरू करने के लिए पर्याप्त फाइनेंसेज़ मिलना बेहद ज़रूरी है वहीं अपने फाइनेंसेज़ को सही तरीके से मैनेज करना भी एक बड़ी चुनौती है। MSMEs के लिए स्केलेबिलिटी और तकनीक के मामले में लगातार आगे बढ़ना काफी महत्वपूर्ण है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर Tally ने सभी बिजनेसेज़ को सरल अकाउंटिंग के जरिये कंप्लायंस से जुड़े समाधान प्रदान करने का काम किया है। इसकी मदद से अपने बिज़नेस को automate यानि स्वचालित करने से आपको बेहतर रेवेन्यु और ग्रोथ मिल सकती है।

Tally के भरोसेमंद और सुरक्षित अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर के साथ आपको न सिर्फ अपने बिज़नेस पर ध्यान देने का पर्याप्त समय मिलेगा बल्कि तकनीक से जुड़ी किसी भी मुश्किल का आसानी से हल भी मिलेगा। यदि Tally के बारे में और अधिक जानकारी के लिए आप उत्सुक हैं और जानना चाहते हैं कि ये आपके बिज़नेस में कैसे योगदान दे सकता है तो यहां क्लिक करें: https://tallysolutions.com/

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