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इन्वेस्टमेंट /बॉन्ड ईटीएफ हो सकता है बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट का अच्छा विकल्प  

  • बॉन्ड ईटीएफ में अधिक लिक्विडिटी, पारदर्शिता और कम कॉस्ट रहती है

Moneybhaskar.com

Nov 15,2019 06:42:00 PM IST

नई दिल्ली. जल्द ही रिटेल इन्वेस्टर्स सरकारी कंपनियों के बॉन्ड से जुड़े इन्वेस्टमेंट के नए जरिए में निवेश कर सकेंगे। हाल ही में सरकार ने डलवाइज को देश का पहला बॉन्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) लॉन्च करने की अनुमति दी है। यह केंद्र सरकार की कंपनियों के बॉन्ड में निवेश करेगा। बॉन्ड ईटीएफ अधिक लिक्विडिटी, ट्रांसपेरेंसी और कम कॉस्ट के कारण अन्य बॉन्ड फंड्स से अलग होने का दावा करते हैं। बॉन्ड ईटीएफ की फीस काफी कम होती है। ऐसे में यह निवेश के लिए बैंक एफडी से बेहतर विकल्प हो सकते हैं।

आमतौर पर दो तरह के होते हैं बॉन्ड ईटीएफ

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, इक्विटी ईटीएफ की तरह बॉन्ड ईटीएफ को मार्केट के विशेष सेगमेंट को ट्रैक करने वाले इंडेक्स जैसे सरकारी, कॉरपोरेट और पीएसयू बॉन्ड के अनुसार मैनेज किया जाता है। यह उसी तरह है, जैसे इक्विटी ईटीएफ का इन्वेस्टमेंट निफ्टी 50, निफ्टी नेक्स्ट 50 और निफ्टी क्वॉलिटी 50 जैसे विशेष बास्केट को कवर करने वाले इंडेक्स के अनुसार किया जाता है। बॉन्ड ईटीएफ आमतौर पर दो तरह के होते हैं। वे शॉर्ट, मीडियम या लॉन्ग टर्म की मैच्योरिटी को ट्रैक करते हैं या वे एक टार्गेट मैच्योरिटी को ट्रैक करते हैं, जिसमें वे प्रॉडक्ट के समान मैच्योरिटी के साथ बॉन्ड्स में निवेश करते हैं।

बॉन्ड फंड में होती है कॉस्ट महत्वपूर्ण

इक्विरस वेल्थ मैनेजमेंट के सीईओ अंकुर माहेश्वरी का कहना है, 'बॉन्ड फंड्स में कॉस्ट महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसमें रिटर्न में तेजी इक्विटी फंड्स की तुलना में कम होती है।' 0.2 फीसदी का अंतर भी इन्वेस्टर के फाइनल रिटर्न में अच्छा फायदा जोड़ सकता है। आनंद राठी प्राइवेट वेल्थ के डिप्टी सीईओ फिरोज अजीज ने बताया, 'डेट सेगमेंट में फंड मैनेजर रिटर्न बढ़ाने के लिए कुछ खास नहीं कर सकता। कॉस्ट को कम करने की किसी भी कोशिश से फायदा होता है।'

होती है अधिक पारदर्शिता

बॉन्ड ईटीएफ में ट्रांसपेरेंसी भी अधिक होती है। इनका पूरा पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स को प्रतिदिन बताया जाता है। अन्य बॉन्ड फंड्स अपने पोर्टफोलियो की जानकारी प्रत्येक महीने के अंत में ही देते हैं। बॉन्ड ईटीएफ एक्सचेंजों पर लिस्टेड होने के कारण लाइव प्राइस अपडेट देते हैं। हालांकि, बॉन्ड ईटीएफ में लिक्विडिटी इस पर निर्भर करेगी कि मार्केट से जुड़े लोग कितनी तेजी से एक्सचेंज पर बल्क में यूनिट्स खरीदते और बेचते हैं। इससे इन्वेस्टर को नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) के तौर पर दिखने वाली ईटीएफ की फेयर वैल्यू के करीब परचेज या सेल प्राइस हासिल करने में मदद मिलेगा।

कम रह सकती है लिक्विडिटी

शुरुआत में इस इन्वेस्टमेंट प्रॉडक्ट में लिक्विडिटी कम रहने की उम्मीद है। इससे इन्वेस्टर्स को अपनी पसंद के प्राइस पर यूनिट खरीदने या बेचने में मुश्किल होगी। अगर ईटीएफ एक अच्छा कॉर्पस साइज जुटाने में नाकाम रहता है तो कम लिक्विडिटी बनी रहेगी। बॉन्ड ईटीएफ उन इनवेस्टर्स के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है, जो अपने फिक्स्ड इनकम पोर्ट‌फोलियो में बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट को बाहर करना चाहते हैं। हालांकि, इन्वेस्टर्स को नए फंड ऑफर (एनएफओ) की अवधि के दौरान निवेश करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसका असेट बेस तभी पता चलेगा, जब फंड रेग्युलर फ्लो के लिए खुलेगा। कम कॉस्ट से ईटीएफ की रिटर्न की क्षमता बढ़ती है, लेकिन लिक्विडिटी कम होने से ऐसे कम कॉस्ट का फायदा भी मिलना मुश्किल हो जाएगा।

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