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हायर पेंशन मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्‍टे हटाया, कहा- मेरिट पर सुनवाई करें हाईकोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हायर पेंशन के मामलों पर हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई को लेकर अपना अंतरिम स्‍टे हटा लिया है।

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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट ने हायर पेंशन के मामलों पर हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई को लेकर अपना अंतरिम स्‍टे हटा लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है संबंधित हाई कोर्ट इन मामलों को मेरिट के आधार पर डील करें। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (ईपीएफओ) की उस याचिका का भी निस्‍तारण कर दिया है जिसमें मांग की गई थी कि हायर पेशन पर देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में चल रहे मामलों को एक जगह पर ट्रांसफर किया जाए। ईपीएफओ ने बुधवार को जारी एक सर्कुलर में अपने सभी फील्‍ड ऑफिस को सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की जानकारी दी है। 

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्‍या होगा असर?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर एग्‍जेम्‍पटेड इस्‍टैबलिशमेंट के उन कर्मचारियों की याचिका पर पड़ेगा जिन्‍होंने देश के अलग अलग हाई कोर्ट में याचिका दाखिकर कहा था कि हायर पेंशन का ऑप्‍शन उनको भी दिया जाए। ईपीएफओ ने एग्‍जेम्‍पटेड इस्‍टैबलिशमेंट के कर्मचारियों को हायर पेंशन का ऑप्‍शन देने से मना कर दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश के तमाम हाई कोर्ट में हायर पेंशन को लेकर चल रहे मामलों में सुनवाई शुरू हो जाएगी जो सुप्रीम कोर्ट अंतरिम स्‍टे की वजह से रूक गई थी। 

 

कैसे आया था हायर पेंशन का मामला? 

1996 में ईपीएफ एक्‍ट में संशोधन के जरिए मेंबर्स को यह अनुमति दी कि उनकी कंपनी चाहे तो उनकी पूरी सैलरी पर पेंशन कंट्रीब्‍यूशन जमा कराए। उसकी सैलरी चाहे जितनी हो।  कंपनी के पीएफ कंट्रीब्‍यूशन का 8.33 फीसदी ईपीएस यानी इम्‍पलाई पेंशन फंड में जाता है। सोच यह थी कि इससे मेंबर्स को रिटायरमेंट पर ज्‍यादा पेंशन मिलेगी। इस संशोधन की जानकारी न होने के कारण  अगले लगभग एक दशक में हायर पेंशन कंट्रीब्‍यूशन के ऑप्‍शन का यूज किसी ने नहीं किया। बाद में मीडिया से जानकारी मिलने के बाद कुछ कंपनियों और एग्‍जेम्‍पटेड ट्रस्‍ट ने ईपीएफओ से संपर्क कर पूरी सैलरी पर पेंशन फंड में कंट्रीब्‍यूशन का विकल्‍प चुनने की अनुमति मांगी। लेकिन ईपीएफओ ने उनकी मांग को यह कह कर खारिज कर दिया कि हायर पेंशन कंट्रीब्‍यूशन के लिए अनुरोध संशोधन के छह माह के अंदर आना चाहिए था। 

 

अक्‍टूबर, 2016 में SC ने कर्मचारियों के पक्ष में सुनाया था फैसला

अक्‍टूबर, 2016 में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि कर्मचारी को पेंशन कंट्रीब्‍यूशन बढ़ाने का अधिकार है और इसके लिए कोई कट ऑफ डेट तय नहीं की जा सकती है। इसके आधार पर 12 रिटायर्ड कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर ईपीएफओ से ज्‍यादा पेंशन की मांग की थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ को इन कर्मचारियों को हायर कंट्रीब्‍यूशन जमा कराने पर ज्‍यादा पेंशन देने का आदेश दिया था। 

 

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