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टैक्‍स फ्री ग्रैच्‍युटी की लिमिट अब 20 लाख, जानें आपको कैसे होगा फायदा

संसद ने बृहस्‍पतिवार को पेमेंट ऑफ गेच्‍युटी अमेंडमेंट बिल पारित कर दिया है।

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नई दिल्‍ली। संसद ने गुरुवार को  पेमेंट ऑफ ग्रैच्‍युटी अमेंडमेंट बिल पारित कर दिया है। इससे सरकार को यह अधिकार मिल गया है कि वह टैक्‍स फ्री ग्रैच्‍युटी 10 लाख रुपए से बढ़ा कर 20 लाख कर सके। इसके अलावा, अब सरकार ग्रैच्‍युटी की अधिकतम सीमा को भी समय समय पर बढ़ा सकेगी। इसके लिए उसे एक्‍ट में संशोधन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

 

 

20 लाख रुपए तक टैक्‍स फ्री ग्रैच्‍युटी 

पेमेंट ऑफ ग्रैच्‍युटी एक्‍ट में प्रावधान था कि प्राइवेट सेक्‍टर में काम करने वाले कर्मचारी को 10 लाख रुपए से ज्‍यादा टैक्‍स फ्री ग्रैच्‍युटी नहीं दी जा सकती है। संशोधन के बाद अब प्राइवेट सेक्‍टर में काम करने वाले कर्मचारियों को 20 लाख रुपए तक टैक्‍स फ्री ग्रैच्‍युटी मिल सकेगी। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पहले ही 20 लाख रुपए तक टैक्‍स फ्री ग्रैच्‍युटी का प्रावधान है। ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधि काफी लंबे समय से प्राइवेट सेक्‍टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ग्रैच्‍युटी की सीमा 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए करने की मांग कर रहे थे।

 

किसको होगा फायदा? 

टैक्‍स फ्री ग्रैच्‍युटी की लिमिट बढ़ने से तात्‍कालिक तौर पर उन्‍हीं लोगों को फायदा होगा जिनकी सैलरी अधिक है। मौजूदा समय में फॉर्मल सेक्‍टर में काम करने वाले ऐसे कम लोग ही होंगे जिनकी बेसिक सैलरी 70,000 रुपए प्रति माह होगी। हालांकि अगर अगले पांच या दस साल में रिटायर होने वाले हैं या आपने जल्‍द नौकरी शुरू की है तो इस बदलाव का फायदा आपको भी मिलेगा। 

 

कब मिलती है ग्रैच्‍युटी? 
मौजूदा समय में संगठित क्षेत्र में काम करने वाला इम्‍पलाई अगर 5 साल या इससे अधिक समय तक काम करता है तो वह 10 लाख तक की टैक्‍स फ्री ग्रैच्‍युटी का हकदार हो जाता है। हालांकि उसको यह ग्रैच्‍युटी नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट पर ही मिलती है। संसद में बिल पारित होने से अब संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को 20 लाख तक टेक्‍स फ्री ग्रैच्‍युटी मिल सकेगी। 

 

किस तरह की कंपनियां आती हैं ग्रैच्‍युटी के दायरे में?  
अगर किसी कंपनी या संस्‍थान में 10 या इससे अधिक कर्मचारी काम करते हैं तो कंपनी पेमेंट ऑफ ग्रैच्‍युटी एक्‍ट के दायरे में आती है और उसको अपने इम्‍पलाई को ग्रैच्‍युटी की सुविधा देनी होती है। यह इम्‍लाई का संवैधानिक अधिकार है। इसके अलावा किसी भी सूरत में कंपनी इम्‍पलाई को ग्रैच्‍युटी देने से मना नहीं कर सकती है।

 

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