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इस कंपनी से क्‍या डर गई मोदी सरकार, 2019 का है खतरा

2019 लोकसभा चुनाव आने में अब 1 साल का समय बचा है और इसके लिए हर राजनीतिक पार्टियां अपने - अपने तरीके से तैयारी कर रही है

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नई दिल्‍ली..  2019 लोकसभा चुनाव आने में अब 1 साल का समय बचा है और इसके लिए हर राजनीतिक पार्टियां अपने - अपने तरीके से तैयारी कर रही हैं। बेहतर तरीके से जनता तक पहुंचने के लिए राजनीतिक पार्टियां अलग - अलग प्रभावशाली मार्केटिंग की कंपनियों से भी संपर्क कर रही हैं। लेकिन इनमें एक ऐसी भी कंपनी है जिसने मोदी सरकार की चिंताएं बढ़ा दी है। तो आइए, जानते हैं कि आखिर कौन सी है वो कंपनी और क्‍यों सरकार इसके खतरे से चिंतित है। 

 

क्‍या है डर की वजह

 

दरअसल, इस कंपनी का नाम कैम्ब्रिज एनालिटिका है। कैम्ब्रिज एनालिटिका पर चुनावों को प्रभावित करने का आरोप है। इस कंपनी ने 2016 में अमेरिकी प्रेसिडेंट चुनाव में डोनाल्‍ड ट्रम्‍प को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। वहीं भारत सरकार के दावे के मुताबिक 2019 चुनाव प्रचार के लिए कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी भी  इसी कंपनी की मदद ले रहे हैं। जाहिर है, सरकार को आने वाले लोकसभा चुनाव की चिंता है। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस आरोप को खारिज कर दिया गया है और  दावा किया गया कि 2010 बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की एनडीए ने इस कंपनी की मदद ली थी। 

 

कंपनी के बारे में 


कैम्ब्रिज एनालिटिका वैसे तो यह अमेरिका की कंपनी है लेकिन भारत में SCL इंडिया से जुड़ी हुई है।  इसकी वेबसाइट पर जो जानकारी दी गई है उसके मुताबिक यह लंदन के SCL ग्रुप और ओवलेनो बिज़नेस इंटेलिजेंस (ओबीआई) प्राइवेट लिमिटेड का ज्‍वाइंट वेंचर है। बीबीसी के मुताबिक ओवलेनो की वेबसाइट पर बताया गया है कि इसके 300 स्थायी कर्मी और 1400 से ज़्यादा एडवाइजर भारत के 10 राज्यों में काम करते हैं। हालांकि जब हमने वेबसाइट पर विजिट करने की कोशिश की तो सस्‍पेंडेड का मैसेज आ रहा था। 

 

भारत में कर्ता-धर्ता  


बीबीसी के मुताबिक भारत में अमरीश त्यागी इसके प्रमुख हैं, जो JDU के दिग्‍गज नेता केसी त्यागी के बेटे हैं। SCL -ओबीआई कई तरह की सेवाएं देती है, उनमें से एक है 'पॉलिटिकल कैंपेन मैनेजमेंट'। इस सेवा के तहत कंपनी सोशल मीडिया के लिए रणनीति तैयार करती है, चुनावी अभियानों और मोबाइल मीडिया का प्रबंधन भी देखती है। सोशल मीडिया की सेवाओं के तहत यह कंपनी 'ब्लॉगर और प्रभावशाली मार्केटिंग', 'ऑनलाइन दुनिया में छवि निर्माण' और 'सोशल मीडिया अकाउंट' मैनेज करती है। 

 

कांग्रेस का क्‍या है दावा 


कांग्रेस का दावा है कि कैम्ब्रिज एनालिटिका ने 2010 में बिहार चुनाव में जेडीयू से करार किया था। दावा है कि कंपनी की मदद से 2010 के चुनाव में जेडीयू की सीटें 90 फीसदी तक बढ़ गई थीं।यह जानकारी कैम्ब्रिज एनालिटिका की वेबसाइट पर भी दी गई है।  आगे पढ़ें - क्‍या है कंपनी पर आरोप 

 

 

 

 

 

क्‍या है कंपनी पर आरोप 

 

न्यूयॉर्क टाइम्स और लंदन ऑब्जर्वर ने पिछले हफ्ते अपनी इंवेस्टिगेटिव रिपोर्ट में कैम्ब्रिज एनालिटिका के बारे में खुलासे किए। इसमें कैम्ब्रिज एनालिटिका के सीईओ निक्स निक्स कैमरे के सामने यह कह रहे हैं कि उन्होंने नेताओं को जाल में फंसाने और चुनावों पर असर डालने के लिए खूबसूरत महिलाओं का इस्तेमाल किया और रिश्वत भी दी। 

 

फेसबुक का किया इस्‍तेमाल 

 

- रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेसबुक ने यह डाटा कैम्ब्रिज एनालिटिका नाम की कंपनी को दिया था। एनालिटिका ने ही ट्रम्प के चुनाव प्रचार में मदद की थी। आगे पढ़ें - कैसे काम करती हैं इस तरह की कंपनियां?

 

 

कैसे काम करती हैं इस तरह की कंपनियां?


इस तरह की कंपनियां सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म से डाटा चुराती हैं। राजनीति के लिए आपकी पसंद और नापसंद के डाटा का विश्लेषण करती हैं। इस डाटा के आधार पर ही ये कंपनियां सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाती हैं। इतना ही नहीं ये कंपनियां नेताओं के भाषण, मेनिफेस्टो के मुद्दे इसी आधार पर तैयार करती हैं। प्रतिद्वंदी पार्टियों के नेताओं के डर्टी सीक्रेट, सेक्स स्कैंडल वाले वीडियो जासूसों से बनवाए जाते हैं। इन्हें सोशल मीडिया पर परोस दिया जाता है।

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