कंपनी नहीं बढ़ा रही बेसिक सैलरी तो हो जाएं अलर्ट, आपको होंगे ये नुकसान

पीएफ फंड में होगा कम पैसा पीएफ फंड में होगा कम पैसा
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हर साल अप्रैजल के बाद बढ़ी हुई सैलरी अकाउंट में आने पर सभी कर्मचारियों को खुशी होती है। ऐसे में बहुत कम कर्मचारी ऐसे होते हैं जो अपनी सैलरी स्लिप चेक करते हैं कि क्‍या उनकी ग्रॉस सैलरी बढ़ने के साथ उनकी बेसिक सैलरी भी बढ़ी है या नहीं।

moneybhaskar

Jan 11,2018 03:27:00 PM IST

नई दिल्‍ली. हर साल अप्रैजल के बाद बढ़ी हुई सैलरी अकाउंट में आने पर सभी कर्मचारियों को खुशी होती है। ऐसे में बहुत कम कर्मचारी ऐसे होते हैं जो अपनी सैलरी स्लिप चेक करते हैं कि क्‍या उनकी ग्रॉस सैलरी बढ़ने के साथ उनकी बेसिक सैलरी भी बढ़ी है या नहीं। अक्‍सर कंपनियां कर्मचारियों के अप्रैजल के समय ग्रॉस सैलरी के साथ बेसिक सैलरी नहीं बढ़ाती हैं।

इसका कर्मचारियों को तात्‍कालिक तौर पर तो फायदा होता है। हर माह उनके अकाउंट में इनहैंड सैलरी के रूप में ज्‍यादा पैसा आता है लेकिन लंबी अवधि में इसका कर्मचारी को नुकसान उठाना पड़ता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि अप्रैजल के बाद हर साल आपकी बेसिक सैलरी न बढ़ने से आपको किस तरह से नुकसान उठाना पड़ता है।

नहीं बढ़ता है आपका PF

अगर कंपनी अप्रैजल के बाद आपकी बेसिक सैलरी नहीं बढ़ाती है तो इसका सीधा असर आपके पीएफ पर पड़ता है। यानी बेसिक सैलरी न बढ़ने की वजह से आपका पीएफ कंट्रीब्‍यूशन नहीं बढ़ता है। ईपीएफ एक्‍ट के तहत कर्मचारी की बेसिक सैलरी प्‍लस डीए का 12 फीसदी हर माह पीएफ के तौर पर उसके प्रॉविडेंट फंड अकाउट में जाता है। बेसिक सैलरी प्‍लस डीए का 12 फीसदी ही कंपनी का कंट्रीब्‍यूशन होता है। अगर आपकी हर साल बेसिक सैलरी नहीं बढ़ रही है तो आपका पीएफ कंट्रीब्‍यूशन भी नहीं बढ़ता है।

आगे पढें- रिटायरमेंट पर कम मिलेगा पैसा

PF फंड में होगा कम पैसा लंबी अवधि में आपको इसकी कीमत पीएफ फंड में कम राशि के रूप मं चुकानी होगी। जब आप 58 साल की उम्र में रिटायर होंगे तो आपके पीएफ फंड में शायद इतना पैसा नहीं होगा आप रिटायरमेंट के बाद की आपकी जरूरतें पूरी हो सकें। इसके अलावा आपको पीएफ फंड में कंपाउंडिंग का भी उतना फायदा नहीं मिल पाएगा जितना हर साल आपका पीएफ कंट्रीब्यूशन बढ़ने पर कंपाउंडिंग का फायदा आपको मिलता। बढ़ जाती है टैक्स देनदारी इनकम टैक्स एक्ट के तहत आपकी सैलरी का जो हिस्सा पीएफ में जाता है आप उस पर सेक्शन 80 सी के तहत टैक्स छूट ले सकते हैं। लेकिन बेसिक सैलरी न बढ़ने की वजह से आपकी सैलरी तो बढ़ जाती लेकिन आपका पीएफ कंट्रीब्यूशन नहीं बढ़ता है। इससे आपकी टैक्स देनदारी बढ़ जाती है। आपको इस देनदारी को मैनेज करने के लिए अलग से किसी टैकस सोविंग ऑप्शन में निवेश करना पड़ता है। आगे पढें- एचआर कर सकता है आपकी मददHR से करें संपर्क इस स्थिति से बचने के लिए आप अपनी कंपनी के एचआर से संपर्क कर सकते हैं और उनको आप बता सकते हैं कि आप चाहते हैं कि अप्रैजल के बाद आपकी बेसिक सैलरी को भी रिवाइज किया जाए। आप एचआर को यह बता सकते हैं कि आपके लिए आपका पीएफ फंड सोशल सिक्युरिटी के लिहाज से अहम है और आप पीएफ फंड के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं। आम तौर पर कंपनियां इस मोर्चे पर कर्मचारी के सुझाव को अहमियत देती हैं।
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