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मोदी सरकार के लिए खड़े हो रहे हैं ये चार खतरे, RBI ने किया अलर्ट

रिजर्व बैंक बुधवार को ने छठीं मॉनिटी पॉलिसी जारी जारी की है।

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नई दिल्‍ली। रिजर्व बैंक बुधवार को ने छठीं मॉनिटी पॉलिसी जारी जारी की है। मॉनिटरी पॉलिसी में रिजर्व बैंक ने मोदी सरकार को इकोनॉमी से जुड़े चार खतरों से आगाह किया है। अगर मोदी सरकार ने इन खतरों से निपटने के लिए कदम नहीं उठाए तो इससे पीएम मोदी को 2019 के आम चुनाव में नुकसान हो सकता है। ऐसे में मोदी सरकार के पास अब भी समय है कि वो इन खतरों पर नजर रखे और इनका समाधान करे। 

 

महंगाई का खतरा 

 

रिजर्व बैंक ने अपनी मॉनिटरी पॉलिसी स्‍टेटमेंट में कहा है कि देश में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है। ऐसे में कंपनियां लागत में इजाफे का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं। इससे महंगाई बढ़ सकती है। इसके अलावा कच्‍चे तेल की कीमतें बढ़ने से भी आने वाले समय में महंगाई बढ़ने का खतरा है। ऐसे में रिजर्व बैंक ने मोदी सरकार को सलाह दी है कि अगले कुछ महीनों में महंगाई पर नजर रखी जानी चाहिए। 

 

आगे पढें- राजकोषीय घाटे पर आरबीआई ने क्‍या कहा। 

 

 

राजकोषीय घाटा 

 

मॉनिटरी पॉलिसी स्‍टेटमेंट में कहा गया है कि बजट 2018 में राजकोषीय घाटा बढ़ने का अनुमान जताया गया है। अगर राजकोषीय घाटा बढ़ता है तो इससे अर्थव्‍वस्‍था को मजबूत बनाने वाले फैक्‍टर कमजोर होंगे और सरकार के लिए भी कर्ज महंगा हो जाएगा। अगर सरकार राजकोषीय मोर्चे पर स्थिति को नियंत्रित नहीं कर पाती है तो वैश्विक स्‍तर पर भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर नजरिया नकारात्‍मक हो सकता है। आम चुनाव से पहले इस तरह का परिदृश्‍य मोदी सरकार को राजनीतिक तौर पर नुकसान पहुंचा सकता है। 

कच्‍चे तेल की कीमतों में इजाफा 

मॉनिटरी पॉलिसी स्‍टेटमेंट में कहा गया है कि वैश्विक ग्रोथ में तेजी आ रही है। इससे अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा कमोडिटी की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली भी कह चुके हैं कि अगर कच्‍चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो इससे देश को नुकसान होगा। भारत पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट का नेट बॉयर है। मौजूदा समय में कच्‍चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के स्‍तर पर है। अगर कच्‍चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं तो मोदी सरकार के लिए इकोनॉमी को मजबूत करने वाले फैक्‍टर को संभालना मुश्किल हो जाएगा। 


विदेशी निवेशकों का भरोसा हो सकता है कमजोर 

 

रिजर्व बैंक का कहना है कि भारत में राजकोषीय घाटा बढ़ने और और विकसित देशों की मौद्रिक नीति सामान्‍य होने से विदेश से पैसा जुटाना और महंगा हो सकता है। इससे निवेश के लिए सबसे आकर्षक देश होने को लेकर निवेशकों का भरोसा भी कमजोर हो सकता है। 

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