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खास खबर: 5 करोड़ EPF मेंबर्स का फ्यूचर दांव पर, लगातार घटा रहा है ब्याज

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने वित्‍त वर्ष 2017-18 के लिए इम्‍पलाइज प्रॉविडेंट फंड यानी ईपीएफ पर 8.55 ब्‍याज तय किया है

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नई दिल्‍ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने वित्‍त वर्ष 2017-18 के लिए इम्‍पलाइज प्रॉविडेंट फंड यानी ईपीएफ पर 8.55 ब्‍याज तय किया है। यह पिछले 5 साल में सबसे कम  है। प्राइवेट सेक्‍टर में काम करने वाले ज्‍यादातर कर्मचारी इस स्‍कीम के तहत कवर है। पिछले एक दशक में प्राइवेट सेक्‍टर में जॉब सिक्‍योरिटी तेजी से कम हुई है। ऐसे समय में  बेरोजगारी जैसी अनिश्चितता का सामना करने के लिए पीएफ ही सबसे बड़ा सहारा है पीफ अकाउंट में आने वाली ब्‍याज की रकम साल दर साल कम होती जा रही है। इससे प्राइवेट सेक्‍टर में काम करने वाला कर्मचारी ठगा हुआ महसूस कर रहा है। उसे लग रहा है कि सरकार उसकी एकमात्र जमा पूंजी यानी पीएफ को लेकर भी उसकी जेब काट रही है। जिससे उसके लिए रिटायरमेंट के बाद की अपनी जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। 

 

 

ऐसा तब हो रहा है जब पिछले 5-6 सालों से ईपीएफओ के पीएफ कॉर्पस को पेशेवर तरीके से मैनेज किया जा रहा है। पीएफ की निवेश की गई राशि पर अधिक रिटर्न हासिल करने के लिए प्रोफेशनल फंड मैनेजर नियुक्‍त किए जा रहे हैं और उनको इस काम के लिए मोटी रकम का भुगतान भी किया जा रहा है। ईपीएफओ पीएफ कॉर्पस का 15 फीसदी हिस्‍सा शेयर बाजार में भी निवेश कर रहा है। ईपीएफओ पिछले 2 साल से शेयर बाजार से बेहतर रिटर्न मिलने का दावा भी कर रहा है।

 

सरकार ने नहीं मानी सीबीटी मेंबर्स की बात 

 

ट्रेड यूनियन हिंद मजदूर सभा के प्रेसीडेंट और सीबीटी मेंबर एडी नागपाल ने moneybhaskar.com को बताया कि अगर सरकार चाहती तो 48 करोड़ रुपए सरप्‍लस रख कर 8.65 फीसदी ब्‍याज तय कर सकती थी। इससे पीएफ पर ब्‍याज नहीं कम करनी पड़ती लेकिन सरकार ज्‍यादा सरप्‍लस रखना चाहती थी। इस वजह से हमारी मांगों को नकार दिया। पीएफ पर ब्‍याज कम करने से सरकार के पास सरप्‍लस के तौर पर 586 करोड़ रुपए बच गए हैं। 

 

ईपीएफ स्‍कीम पर ही उठ रहे हैं सवाल 

 

सवाल उठता है कि संगठित क्षेत्र में काम करने वाले 5 करोड़ से अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराने को। लेकर केंद्र सरकार क्‍या वाकई गंभीर है। ईपीएफ स्कीम संसद से पारित इप्‍लाईज प्रॉविडेंट फंड एक्‍ट के तहत चलाई जा रही है और इसका मकसद स्कीम के तहत कवर होने वाले कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराना है जिससे वे रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को आराम से पूरा कर सकें। एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि समय के साथ हुए बदलाव के अनुरूप ईपीएफ स्कीम को अपग्रेड न करने की वजह से यह स्‍कीम पहले से ही अपने मेंबर्स को रिटायरमेंट के बाद सम्‍मानजनक जीवन मुहैया कराने में नाकाम साबित हो रही है।

 

वित्‍त मंत्रालय ने डाला ब्‍याज कम करने का दबाव 

 

ईपीएफ स्कीम में केंद्र सरकार कोई सब्सिडी नहीं देती है इसके बावजूद पिछले एक दशक से केंद्र सरकार का प्रयास रहा है कि ईपीएफ और दूसरी प्रॉविडेट फंड स्कीम के ब्‍याज में ज्‍यादा अंतर न रहे। इंडियन ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रेसीडेंट और सीबीटी मेंबर संजीव रेड्डी का कहना है कि वित्‍त मंत्रालय का दबाव था कि ईपीएफ पर ब्‍याज कम किया जाए। ईपीएफओ पिछले कुछ सालों से लगातार ऐसे फैसले कर रहा है जिससे ईपीएफ मेंबर्स को नुकसान हो रहा है।   

 

बीते 5 सालों में पीएफ पर ब्याज 

फाइनेंशियल ईयर पीएफ दर
2013-14  8.75% 
2014-15  8.75%
2015-16 8.80%
2016-17 8.65%
2017-18 8.55% (प्रस्तावित)

 

 

 

सैलरी स्‍ट्रक्‍चर में बदलाव से घटा है पीएफ कंट्रीब्‍यूशन 

 

पिछले एक दशक से इंडस्‍ट्री में सैलरी स्‍ट्रक्‍चर में ऐसे बदलाव हुए हैं जिससे कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी तो बढी है लेकिन उनका पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन बहुत घट गया है। कंपनिनों ने कर्मचारियों की सैलरी को कई तरह के अलाउंसेज में बांट दिया है और कर्मचारियों की बेसिक सैलरी जान बूझ कर कम रखती है। उदाहरण के तौर पर 50,000 सैलरी वाले इम्‍पलाई की बेसिक सैलरी 16,000 है। बाकी सैलरी को अलाउंसेज में बांट दिया गया है। ईपीएफ के नियमों के तहत कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12 फीसदी हर माह पीएफ अकाउंट में जाता है और इतना ही कंट्रीब्‍यूशन कंपनी करती है। अलाउंसेज में बांटने से कर्मचारी के पीएफ फंड में कम पैसा जा रहा है। इससे कंपनी को भी फायदा हो रहा है। कंपनी को कर्मचारियों के पीएफ अमाउंट पर एक निश्चित राशि ईपीएफओ को मैनेजमेंट चार्ज के तौर पर देनी होती है। पीएफ कंट्रीब्‍यूशन कम होने से कंपनी को मैनेजमेंट चार्ज के तौर पर कम पैसा देना पड़ता है। 

 

आगे पढें- आपके रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को पूरा नहीं करेगा प्रॉविडेंट फंड 

 

 रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को पूरा नहीं करेगा प्रॉविडेंट फंड 

 

ईपीएफओ के एक वरिष्‍ठ अधिकारी का कहना है कि इस प्रैक्टिस ने ईपीएफ स्‍क्‍ीम के मकसद को ही फेल कर दिया है। कर्मचारी का पीएफ कंट्रीब्‍यूशन कम होने से उनका रिटायरमेंट फंड इतना नहीं हो पाएगा जिससे रिटायरमेंट के बाद उसकी जरूरतें पूरी हो सकें। इस स्‍कीम के तहत कर्मचारी को सामाजिक सुरक्षा तभी मिल पाएगी जब कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी पर पीएफ काटा जाए। 

 

रिटर्न से लिंक्‍ड है ब्‍याज दर 

 

ईपीएफओ के एक वरिष्‍ठ अधिकारी का कहना है कि पीएफ पर मिलने वाला ब्‍याज निवेश की गई राशि पर मिलने वाले रिटर्न से जुड़ा है। पिछले कुछ सालों से बांड ओर सरकारी स्‍कीमों और सिक्‍योरिटीज पर मिलने वाले रिटर्न कम हुआ है। पीएफ की निवेश योग्‍य राशि का 85 फीसदी हिस्‍सा सरकारी बांड और सरकारी स्‍कीमों में निवेश किया जाता है। ऐसे में पीएफ पर लगातार ऊंची ब्‍याज दर देना संभव नहीं है। इकोनॉमी का साइकल कम ब्‍याज दरों की ओर जा रहा है। बैंक लोन से लेकर स्‍माल सेविंग स्‍क्‍ीमों पर ब्‍याज दर घट रही है। ऐसे में ईपीएफओ के लिए निवेश के ऐसे विकल्‍प ढूंढना चुनौती है जहां ज्‍यादा रिटर्न मिले। फिलहाल शेयर बाजार में 15 फीसदी कॉपर्स पर बेहतर रिटर्न मिला है। आने वाले समय में पीएफ मेंबर्स को इसका फायदा बेहतर ब्‍याज दर के तौर पर मिल सकता है। 

 

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