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मोदी के चलते चीन भी हुआ पाक के खिलाफ, ऐसे निकल गई हेकड़ी

भारत में आतंकी हमलों और उसके मास्‍टरमाइंड को शह देना पड़ोसी देश पाकिस्तान को बहुत भारी पड़ गया है।

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नई दिल्‍ली।  पड़ोसी देश पाकिस्‍तान को इंटरनेशनल मंच पर अलग - थलग करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीति काफी हद तक सफल होती नजर आ रही है। भारत में आतंकी हमलों और उसके मास्‍टरमाइंड को शह देना अब पाकिस्तान को बहुत भारी पड़ गया है। दिलचस्‍प बात ये है कि इस बार पाकिस्‍तान को घिरता देख उसके दोस्‍त चीन ने भी दूरी बना ली है। तो आइए जानते हैं कि आखिर क्‍या है पूरा मामला।   

 

 

 

ग्रे लिस्ट में शामिल 


दरअसल, आतंकी फंडिग पर नजर रखने वाली एजेंसी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया है। ग्रे लिस्ट में शामिल देशों पर टेरर फंडिग के लिए कड़ी निगरानी रखी जाती है। बता दें कि इससे पहले एफएटीएफ ने पाकिस्तान को सफाई देने के लिए 3 महीने का समय दिया था।  

 

चीन ने भी वापस ली आपत्तियां 
तीन दिनों से पेरिस में चल रही इस बैठक में पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ शिकंजा कसे जाने को लेकर चर्चा की जा रही थी। पाक पर यह कदम अमेरिका द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर उठाया गया है। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिका द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव का भारत, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने समर्थन किया। वहीं, पाकिस्तान का हमेशा सपोर्ट करने वाले चीन ने भी उसका साथ छोड़ते हुए प्रस्ताव पर अपनी आपत्तियां वापस ले लीं। अब फैसले की आधिकारिक घोषणा होना रह गया है। 

 

 

अमेरिका ने रोकी 1625 करोड़ की मदद


पाकिस्‍तान को अमेरिका से दी जाने वाली 1625 करोड़ रुपए की सैन्‍य मदद पहले ही डोनाल्‍ड ट्रंप रोक चुके हैं। अमेरिका लश्‍कर-ए-तैय्यबा के चीफ आतंकी हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई न करने से काफी नाराज है। भारत और अमेरिका दोनों देश सईद को मुंबई हमलों के मास्‍टर माइंड मानते हैं। हाफिज सईद को ग्‍लोबल टेररिस्‍ट घोषित करके उसके सिर एक करोड़ रुपए का ईनाम भी रखा गया है। आगे भी पढ़ें - 

 

 

 

एफएटीएफ को नहीं समझा पाया पाक
सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान पिछले 3 महीने से फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स को यह समझाने में लगा था कि उसे आतंकी गतिविधियों के खिलाफ एक्शन लिया है। लेकिन पाकिस्तान ऐसा समझाने में नाकाम रहा है। न्यूज एजेंसी के अनुसार पाकिस्तान सरकार की ओर से इस मामले पर कोई बयान नहीं आया है। बता दें कि एफएटीएफ का यह कदम पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि इसका सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर होगा। पाकिस्‍तान के इस लिस्‍ट में शामिल हो जाने पर उसे दुनियाभर के देशों से व्‍यापार करने और फंड जुटाने में दिक्‍कत आएगी।आगे भी पढ़ें - 

 

 

 

जून में फिर होगी समीक्षा 

पाकिस्तान ने मंगलवार को दावा किया था कि FAFT की मीटिंग में उसे तीन महीनों की मोहलत दिए जाने का फैसला हुआ है, लेकिन गुरुवार को पाकिस्तान के इस दावे पर उस समय सवाल खड़े हो गए थे जब अमेरिकी मीडिया के हवाले से यह खबर सामने आई कि आखिरी फैसला होना अभी बाकी है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका के दवाब में इस प्रस्ताव पर फिर से वोटिंग कराई गई जिसमें ज्यादातर देशों ने पक्ष में वोट डाला। पाकिस्तान को फिलहाल तीन महीने के लिए 'ग्रे लिस्ट' डाला गया है। जून में एक बार फिर इसकी समीक्षा की जाएगी। 

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