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प्राइवेट कंपनियों में सैलरी पर मोदी सरकार को मिली है शिकायत, एक्‍शन प्‍लान तैयार

नई दिल्‍ली। मोदी सरकार को प्राइवेट सेक्‍टर के कर्मचारियों की सैलरी को लेकर शिकायतें मिली हैं। इसके बाद मोदी सरकार ऐसा कदम उठाने की तैयारी कर रही हैं जिससे अब कंपनियां आपकी सैलरी को अलाउंसेज में बांट कर बेसिक सैलरी कम रखने की चालाकी नहीं कर पाएंगी। इससे आपके पीएफ अकाउंट में ज्‍यादा पैसा जाएगा।

 

तय होगी वेज की परिभाषा 

 

बेसिक सैलरी पर कंपनियों की चालाकी पर अंकुश लगाने के लिए कर्मचारी भविष्‍य निधि EPFO ने वेज की परिभाषा तय करने का फैसला किया है। इसके तहत अगर बेसिक सैलरी का 50 फीसदी से अधिक अलाउंस रखा जाता है तो इसे भी बेसिक सैलरी का हिस्‍सा माना जाएगा और कंपनी को भी इस पर भी पीएफ काटना होगा। 

 

वेज की परिभाषा तय करने की जरूरत क्‍यों पड़ी 
 

मौजूदा समय में ईपीएफ एक्‍ट में वेज की परिभाषा तय नहीं है। इसकी वजह से एम्‍पलॉयर और असेसिंग अथॉरिटी वेज की व्‍याख्‍या अलग अलग तरह से करते हैं। इसके अलावा ईपीएफओ के अधिकारी भी वेज के मुद्दे पर अलग अलग स्‍टैंड लेते हैं। ईपीएफओ को ऐसी शिकायतें मिल रहीं हैं कि एम्‍पलॉयर बेसिक सैलरी प्‍लस डियरनेस अलाउंस 10 से 30 फीसदी तक दिखाते हैं बाकी सैलरी तमाम अलाउंस जैसे परफार्मेंस अलाउंस, एंटरटेनमेंट अलाउंस, कन्‍वेंस अलाउंस और पर्सनल अलाउंस में बांट देते हैं। 

 

ईपीएफओ ने वेज की परिभाषा तय करने का प्रपोजल तैयार किया है। इस प्रपोजल की कॉपी Moneybhaskar के पास है। सेंट्रल बोर्ड आफ ट्रस्टी यानी सीबीटी के मेंबर और भारतीय मजदूर संघ के महासचिव बृजेश उपाध्‍याय ने Moneybhaskar को बताया कि ईपीएफओ ने इस बारे में एक प्रपोजल तैयार किया है। इस प्रपोजल पर जल्‍द ही चर्चा होगी। सीबीटी की मंजूरी के बाद सरकार इस प्रपोजल को लागू करने के लिए नोटिफिकेशन जारी करेगी। हाल में हुई मीटिंग में इस बाबत चर्चा हुई है। 

 

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