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EPFO उठाने जा रहा है 2 बड़े कदम, आपकी सैलरी और प्रॉविडेंट फंड पर होगा ये असर

लगभग 5 करोड़ कर्मचारियों के प्रॉविडेंट फंड का प्रबंधन करने वाला कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (ईपीएफओ) अपने मेंबर्स को फाय

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नई दिल्‍ली। लगभग 5 करोड़ कर्मचारियों के प्रॉविडेंट फंड का प्रबंधन करने वाला कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (ईपीएफओ) अपने मेंबर्स को फायदा पहुंचाने क लिए दो बड़े कदम उठाने जा रहा है। इससे इन कर्मचारियों की सैलरी और प्रॉविडेंट फंड पर सीधा असर होगा। आज हम आपको बता रहे हैं कि ये दो कदम क्‍या हैं ओर इससे आपके प्रॉविडेंट फंड और सैलरी पर क्‍या असर होगा। 

 

नौकरी जाने पर पीएफ अकाउंट से मिलेगा एडवांस 

 

ईपीएफओ ने अपने ऐसे सदस्‍यों को उनके प्रॉविडेंट फंड अकाउंट से एडवांस लेने की सुविधा देने का प्रस्‍ताव तैयार किया है जिनकी नौकरी चली गई है। ऐसे मेंबर्स नौकरी जाने के 30 दिन के बाद अपने पीएफ अकाउंट से 60 फीसदी रकम एडवांस के तौर पर निकाल सकेंगे। यह एडवांस नॉन रिफेंडेबल होगा। यानी उनको बाद में इसे लौटाने की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा अगर उनको नौकरी जाने के बाद अगले तीन माह तक नौकरी नहीं मिलती है तो वह एक बार फिर से पीएफ अकाउंट से 80 फीसदी तक रकम एडवांस के तौर पर ले सकता है। इस प्रस्‍ताव को सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्‍टीज ने मंजूरी दे दी है। अब केंद्र सरकार को इस पर नोटिफिकेशन जारी करना है। इसके बाद ईपीएफओ के मेंबर्स को यह सुविधा मिलने लगेगी। 

 

क्‍या होगा फायदा 

 

ईपीएफ एक्‍ट, 1952 के मौजूदा नियम के तहत अगर किसी पीएफ अकाउंट होल्‍डर की नौकरी चली जाती है तो वह नौकरी जाने की डेट से 60 दिन के बाद अपने पीएफ अकाउंट से पूरा पैसा निकाल सकता है। यानी फाइनल सेटेलमेंट कर सकता है। इसके बाद उसका पीएफ अकाउंट बंद हो जाता है। लेकिन एडवांस की सुविधा मिलने से मेंबर नौकरी जाने पर पीएफ अकाउंट से एडवांस लेकर अपनी पैसे की जरूरत पूरी कर सकेगा। और उसका पीएफ अकाउंट भी बना रहेगा। जब उसको नौकरी मिल जाएगी तो इस अकाउंट में कंट्रीब्‍यूशन शुरू हो जाएगा। इससे मेंबर्स को यह फायदा होगा कि उसका रिटायरमेंट फंड बना रहेगा और उसके पीएफ फंड में ज्‍यादा पैसा रहेगा। 

वेज की तय होगी परिभाषा 

 

एक और अहम कदम के तौर पर ईपीएफओ ने वेज की परिभाषा तय करने का फैसला किया है। ईपीएफओ के प्रस्‍ताव के तहत अब कंपनियां अगर कर्मचारी की बेसिक सैलरी के 50 फीसदी से अधिक अलाउंसेज रखती है तो उस हिस्‍से को भी बेसिक सैलरी माना जाएगा और कंपनियों को उस हिस्‍से को मिला कर पीएफ काटना होगा। भारतीय मजदूर संघ के महासचिव और सीबीटी मेंबर विरजेश उपाध्‍याय ने बताया कि ईपीएफओ की एक कमेटी इस प्रस्‍ताव का परीक्षण कर रही है। अप्रेल में होने वाली सीबीटी की मीटिंग में इस प्रस्‍ताव पर विचार होगा। 

 

मेंबर्स को क्‍या होगा फायदा 

 

मौजूदा समय में वेज की कोई परिभाषा न होने का फायदा उठा कर कंपनियां कर्मचारियों की कुल सैलरी में बेसिक प्‍लस डीए 10 से 30 फीसदी तक रखती हैं। बाकी हिस्‍सा अलाउंसेज में बांट देती है। कर्मचारी का पीएफ बेसिक प्‍लस डीए का 12 फीसदी कटता है। इस तरह से कर्मचारी का पीएफ कम कटता है। इससे उसका पीएफ फंड कम बनता है। रिटायरमेंट पर उसके पीएफ फंड में कम पैसा इकठ्ठा हो पाता है। ऐसे में कर्मचारी और उसके परिवार को आर्थिक जरूरतें पूरी करने में दिक्‍कत होती है। ईपीएफओ के इस फैसले से कंपनियां बेसिक सैलरी कम नहीं रख पाएंगी। यानी कर्मचारी का पीएफ कंट्रीब्‍यूशन बढ़ जाएगा। इससे रिटायरमेंट के समय उसके पीएफ फंड में ज्‍यादा पैसा होगा। हालांकि इस फैसले से कर्मचारी की इन हैंड सैलरी कम हो जाएगी। 

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