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GST के झटके से उबर रहा है इम्‍पलॉयमेंट सेक्‍टर, 17 लाख बढ़े EPFO के सक्रिय मेंबर

इकोनॉमी गुड्स एंड सर्विस टैक्‍स जीएसटी के झटके से उबर रही है। खास कर नौकरियों के लिहाज से इकोनॉमी अब रिकवरी के मोड में ह

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नई दिल्‍ली। इकोनॉमी गुड्स एंड सर्विस टैक्‍स (जीएसटी) के झटके से उबर रही है। खास कर नौकरियों के लिहाज से इकोनॉमी अब रिकवरी के मोड में है। यह बात रिटायरमेंट फंड बॉडी कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) कंट्रीब्‍यूटरी मेंबर्स की संख्‍या बढ़ने से साबित होती है। दिसंबर 2017 से मार्च 2018 की अवधि में ईपीएफओ के कंट्रीब्‍यूटरी मेंबर्स की संख्‍या में 17 लाख का इजाफा हुआ है।

 

समान अवधि में अपने कर्मचारियों का पीएफ काट कर ईपीएफओ के पास जमा कराने वाले इस्‍टैबलिशमेंट की संख्‍या भी लगभग 29 हजार बढ़ी है। वहीं जुलाई में जीएसटी लागू होने के बाद ईपीएफओ के सक्रिय मेंबर्स की संख्‍या में 35 फीसदी तक गिरावट आई थी। 

 

17 लाख बढ़े ईपीएफओ के मेंबर्स 

 

लेबर मिनिस्‍ट्री के लेटेस्‍ट डाटा के अनुसार नवंबर, 2017 में ईपीएफओ के पीएफ फंड में योगदान करने वाले मेंबर्स की संख्‍या 4,54,96,4 35 थी। मार्च, 2018 में यह ईपीएफओ के पीएफ फंड में योगदान करने वाले मेंबर्स की संख्‍या बढ़ कर 4,71,36,381 हो गई है। इस तरह से 4 माह की अवधि में ईपीएफओ के सक्रिय मेंबर्स की संख्‍या लगभग 17 लाख तक बढ़ी है। ईपीएफओ के सक्रिय मेंबर वे मेंबर होते हैं जिनका पीएफ कंट्रीब्‍यूशन हर माह ईपीएफओ के पास जमा होता है। ऐसे मेंबर जिनका पीएफ कंट्रीब्‍यूशन ईपीएफओ के पास जमा नहीं हो रहा है उनको निष्क्रिय मेंबर कहा जाता है। ईपीएफओ के एक्टिव मेंबर्स की संख्‍या बढ़ने के दो मायने हो सकते हैं। एक कंपनियां अपने यहां कर्मचारियों की नियुक्ति कर रही हैं और दूसरा अब ऐसे इस्‍टैबलिशमेंट भी अपने कर्मचारियों का पीएफ काट कर ईपीएफओ के पास जमा कर रहे हैं जो किसी वजह से ईपीएफओ के पास अपने कर्मचारियों के पीएफ का पैसा नहीं जमा करा रे थे यॉनी डिफॉल्‍ट कर रहे थे। 

 

  अवधि    ईपीएफओ के सक्रिय मेंबर्स की संख्‍या (करोड़ में)
नवंबर, 2017  4,54,96,4 35 
दिसंबर, 2017 4,50,33,466
जनवरी, 2018  4,50,33,466
फरवरी,2018  4,57,21,082
मार्च 2018  4,71,36,381

सोर्स-लेबर मिनिस्‍ट्री 

29 हजार बढ़ी इस्‍टैबलिशमेंट की संख्‍या 

 

लेबर मिलिस्‍ट्री के डाटा के मुताबिक चार माह यानी नवंबर, 2017 से मार्च 2018 के बीच ईपीएफओ के पास अपने कर्मचारियों का पीएफ जमा कराने वाले इस्‍टैबलिशमेंट की संख्‍या  29 हजार तक बढ़ी है। ईपीएफओ के पास पीएफ जमा कराने वाले इस्‍टैबलिशमेंट की संख्‍या में बड़े पेमाने पर इजाफा होना इस बात की ओर संकेत करता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और कंपनियां कर्मचारियों की संख्‍या बढ़ा रही हैं जिससे वे ईपीएफओ के कवरेज के दायरे में आ रहीं हैं। 20 या इससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों के लिए अपने कर्मचारी का पीएफ काटना जरूरी है। दूसरा कारण यह भी है कि ईपीएफओ ने अब ईपीएफ एक्‍ट के अनुपालन को लेकर कड़ाई की है और उन सभी कंपनियों में जहां 20 या इससे अधिक कर्मचारी काम कर रहे उनको ईपीएफ एक्‍ट के तहत कवर करने पर जोर दिया जा रहा है। 

 

  अवधि    पीएफ जमा कराने वाले इस्‍टैबलिशमेंट की संख्‍या 
(लाख  में)
नवंबर, 2017  4,43,222
दिसंबर, 2017 4,46,193 
जनवरी, 2018  4,46,193
फरवरी,2018  4,58,178 
मार्च 2018  4,71,875

 

बढ़ी हैं आर्थिक गतिविधियां 

 

क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्‍ट डीके जोशी ने moneybhaskar.com को बताया कि इंडस्ट्रियल प्रोडक्‍ट सहित दूसरे कई डाटा से यह साफ दिखता है कि पिछले कुछ माह के दौरान मदेश में आर्थिक गतिविधियों में इजाफा हुआ है। लेकिन इसका कितना असर इम्‍पलॉयमेंट सेक्‍टर पर पड़ा है। इस बारे में हमें लेबर ब्‍यूरो के डाटा के इंतजार करना होगा। सरकार को हर तिमाही इम्‍लॉयमेट का डाटा जारी करना चाहिए।

 

आगे पढें जीएसटी लागू होने के बाद घट गए थे सक्रिय मेंबर  

 

 

जीएसटी लागू होने के बाद घट गए थे ईपीएफओ के सक्रिय मेंबर 

 

1 जुलाई से देश भर में जीएसटी लागू होने का असर इम्‍पलॉयमेंट सेक्‍टर पर भी दिखा था। ईपीएफओ डाटा के अनुसार अलग-अलग​ पीएफ ऑफिस के तहत जुलाई 2017 से सितंबर 2017 के बीच पीएफ में कंट्रीब्‍यूट करने वाले मेंबर्स की संख्‍या में 10 से 35 फीसदी तक कमी आई थी। कंट्रीब्‍यूट करने वाले मेंबर्स की संख्‍या में सबसे ज्‍यादा कमी बहरामपुर में आई थी। यहां पर जुलाई 2017 में 1,54,985 मेंबर्स ने पीएफ अकाउंट में कंट्रीब्‍यूट किया था। सितंबर 2017 में यह संख्‍या घट कर 99,468 रह गई है। वहीं, भागलपुर में पीएफ में कंट्रीब्‍यूट करने वाले मेंबर्स की संख्‍या में 31.6 फीसदी गिरावट आई थी। 

 

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