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भारत के इस प्रोजेक्‍ट से डरा चीन,जताई जंग की आशंका

भारत और चीन के बीच लंबे समय से तनाव का दौर जारी है। पिछले कुछ समय से भारत चीन को हर मुद्दे पर घेर रहा है ।

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नई दिल्‍ली। भारत और चीन के बीच लंबे समय से तनाव का दौर जारी है। पिछले कुछ समय से भारत चीन को हर मुद्दे पर घेर रहा है । यही वजह है कि वहां के थिंक टैंक और एक्‍सपर्ट भारत की गतिविधयों से सहमे हुए हैं। अब चीन के एक्‍सपर्ट्स ने भारत के रोड कंस्‍ट्रक्‍शन प्रोजेक्‍ट को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। उन्‍होंने कहा है कि सीमा पर भारत की बढ़ रही गतिविधियों से चीन को सचेत रहने की जरुरत है। आइए, विस्‍तार से जानते हैं चीन के एक्‍सपर्ट्स की चिंता के बारे में। 

 

क्‍या कहा चीन ने 


दरअसल, गुरुवार को चीन के सरकारी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स में एक लेख छपा है। इस लेख में कहा गया है कि दोनों देशों की सीमा पर भारत के रोड कंस्‍ट्रक्‍शन से चीन को सचेत रहने की जरुरत है। इसके साथ ही चीन को आशंका है कि भारत जंग की तैयारी में जुटा है। 

 

 

राजनाथ सिंह के दौरे से भी चिंतित 


चीन ने पिछले 1 जनवरी को देश के होम मिनिस्‍टर राजनाथ सिंह के भारत - चीन सीमा पर भारतीय सैनिकों से मुलाकात का भी जिक्र किया है। उसका कहना है कि राजनाथ सिंह ने पिछले दिनों सीमा पर जाकर अपने सैनिकों का उत्‍साह बढ़ाया है। इसके अलावा सैनिकों के लिए अधिक सुविधाएं देने का एलान किया है। भारत की ये गतिविधियां कहीं न कहीं जंग की तैयारी का इशारा कर रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने 1962 से बहुत सबक लिया है और दोबारा ऐसी गल‍ती न हो, इसकी पूरी तैयारी कर रहा है। 

 

 

भारत का रोड प्रोजेक्‍ट क्‍या है 


दरअसल, भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास चीन की चुनौतियों से निपटने के लिए सड़क मार्ग पर काम शुरू किया है। इस सड़क का फायदा ये होगा कि सभी मौसमों में खुला रहेगा और संकट के समय भारतीय सेना आसानी से चीन के बॉर्डर तक पहुंच सकेगी। यह उत्त्तराखंड में टनकपुर और पिथौरागढ़ के बीच 150 किलोमीटर लंबी सड़क है। इसका इस्तेमाल सभी तरह के मौसम में किया जा सकेगा। इस सड़क के 2019 तक बन जाने की उम्मीद है। आगे पढे़ - सड़क पर आएगी 1,065 करोड़ रुपए की लागत

सड़क पर आएगी 1,065 करोड़ रुपए की लागत
इस सड़क की कुल लागत 1,065 करोड़ रुपए है. इसका निर्माण इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी ) के तहत किया जा रहा है। इस की चौड़ाई 12 मीटर होगी। फिलहाल 4 कंपनियों को ये निर्माण कार्य सौंपा गया है। इन कंपनियों का चुनाव उनके ऑल वेदर रोड बनाने के अनुभव के अधार पर किया गया है।

 

 

चीनी विशेषज्ञ लगातार कर रहे आगाह 


बता दें कि पिछले साल डोकलाम को लेकर दोनों देशों की सेना आमने - सामने थीं। तब करीब तीन महीने के तनाव के बाद भारत को जीत मिली और चीन को पीछे हटना पड़ा था। हाल ही में अरुणाचल की सीमा में एक बार फिर चीन के सैनिकों ने घुसने की कोशिश की। लेकिन भारतीय सेना ने उन्‍हें खदेड़ दिया। भारत की बढ़ती ताकत से चीनी विशेषज्ञों पिछले कुछ समय से लगातार अपनी सरकार से आगाह कर रहे हैं कि भारत 2018 में भी सीमा पर परेशान करता रहेगा। 
 

 

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