Fixed deposit में करते हैं निवेश, तो जान लें इस इंवेस्टमेंट स्कीम के बारे में, इसमें मिलेगा 3 फीसदी तक ज्यादा रिटर्न

Fixed Deposit Vs NCD Which Is Better?: अगर आप फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करते हैं या निवेश के लिए कोई फिक्स्ड डिपॉजिट तलाश रहे हैं तो आपको इस इंवेस्टमेंट प्रोडक्ट के बारे में जानना चाहिए। NCD यानी नॉन कंवर्टिवल डिबेंचर्स में आपको फिक्स्ड डिपॉजिट से दो से तीन फीसदी ज्यादा रिटर्न मिलता है। 

Money Bhaskar

Apr 07,2019 02:10:00 PM IST

नई दिल्ली.
अगर आप फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करते हैं या निवेश के लिए कोई फिक्स्ड डिपॉजिट तलाश रहे हैं तो आपको इस इंवेस्टमेंट प्रोडक्ट के बारे में जानना चाहिए। NCD यानी नॉन कंवर्टिवल डिबेंचर्स में आपको फिक्स्ड डिपॉजिट से दो से तीन फीसदी ज्यादा रिटर्न मिलता है। पिछले कुछ वर्षों में एनसीडी में काफी उछाल आया है। कई कंपनियों ने बाजार में अपने एनसीडी उतारे हैं। सीए व टेक्स एक्सपर्ट हिमांशु कुमार के मुताबिक अगर आप भी एनसीडी में इंवेस्ट करना चाहते हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखने की जरूरत है, तभी आप बेहतर रिटनर्स पा सकेंगे।

क्या है एनसीडी


यह Non Convertible Debentures होते हैं, जिन्हें कंपनियां जारी करती हैं। बड़े कॉर्पोरेट हाउसेस सीधे लोगों से लोन लेते हैं। इसके बदले कंपनी आपको एक टोकन देती है जिसमें आपके पैसे पर मिलने वाली ब्याज दर लिखी रहती है। जब आप फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा लगाते हैं तो आप एक निश्चित समय के लिए अपना पैसा बैंक को देते हैं। इस पर बैंक आपको एक ब्याज दर के हिसाब से अवधि पूरा होने पर पैसा लौटाता है। जब आप एनसीडी में पैसा लगाते हैं तो आप किसी कंपनी या बड़े ऑर्गेनाइजेशन को डायरेक्टली पैसा उधार देते हैं। इसमें कंपनियां अक्सर एफडी में मिलने वाली ब्याज दर से ज्यादा इंटरेस्ट देती हैं।

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निवेश करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान


जहां आपको ज्यादा फायदा मिलता है वहां अक्सर काफी सारे रिस्क भी होते हैं। एनसीडी में निवेश से पहले आपको तीन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

-जिस कंपनी में आप पैसा लगाने वाले हैं उसका फाइनेंशियल स्टेटस क्या है। अगर कंपनी की बैलेंसशीट और फाइनेंशियल बुक्स ठीक हैं तभी उसमें पैसा लगाएं। अगर आपने ज्यादा रेट ऑफ इंटरेस्ट पाने के चक्कर में किसी ऐसी कंपनी में पैसा लगा दिया जिसका फाइनेंशियल स्टेटस सही नहीं है, तो हो सकता है कंपनी आपको आपका पैसा लौटा ही न पाए।

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- एनसीडी दो तरह के होते हैं- सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड। सिक्योर्ड एनसीडी में जब कंपनी आपसे पैसा लेती है तो उसके बदले में कोई असेट गिरवी रखती है। जैसे अगर कंपनी ने 500 करोड़ के एनसीडी जारी किए हैं तो उसके बदले में वह असेट अलॉट करेगी, कि अगर किसी वजह से वह लोगों का पैसा नहीं चुका पाती है तो उसके असेट को बेचकर लोगों के पैसे की भरपाई हो सकती है। अनसिक्योर्ड एनसीडी में कंपनी लोगों के पैसों के बदले कोई असेट अलॉट नहीं करती है। इसमें अगर कंपनी आपका पैसा नहीं लौटा पाती है, तो किसी और तरीके से आपके पैसे की भरपाई नहीं हो पाती है। इसलिए निवेश से पहले हमेशा यह सुनिश्चित करें कि आप सिक्यार्ड एनसीडी में ही पैसा लगा रहे हैं।

- एनसीडी में निवेश के लिए कंपनी की रेटिंग्स भी चेक करना जरूरी है। यह सबसे जरूरी प्वाइंट है। हमेशा अपना पैसा AAA रेटिंग वाली कंपनी में ही लगाएं। इन कंपनियों में डिफॉल्ट होने के चांस बेहद कम रहते हैं।

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एफडी और एनसीडी में से क्या है बेहतर


एनसीडी में बेशक आपको बेहतर इंटरेस्ट मिलता है, लेकिन इसमें रिस्क भी रहता है। इसलिए अगर आपको Fixed deposit के मुकाबले सिर्फ एक या डेढ फीसदी ज्यादा इंटरेस्ट मिल रहा हो तो आपके लिए एनसीडी अच्छा विकल्प नहीं होगा। क्योंकि टैक्स निकालने के बाद आपका प्रॉफिट बेहद कम रह जाएगा। एनसीडी में सिर्फ तभी निवेश करना फायदे का सौदा होता है जब एफडी के मुकाबले दो या तीन फीसदी ज्यादा इंटरेस्ट रेट हो। इसके अलावा एनसीडी इस मामले में भी काफी बेहतर होता है कि आप इसे स्टॉक मार्केट में बेच भी सकते हैं। जबकि आप एफडी के मैच्योर होने से पहले अगर उसे बेचने जाते हैं तो कई तरीके के टैक्स आपको देने पड़ते हैं। एनसीडी के मामले में ऐसा नहीं है, इसलिए यह एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

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