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    रियल एस्‍टेट बिल से रियल्‍टी में नए दौर की शुरुआत होगी

    रियल एस्‍टेट बिल से रियल्‍टी में नए दौर की शुरुआत होगी
    नई दिल्‍ली।बहुप्रतिक्षित रियल एस्टेट बिल को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। अब यह बिल संसद के पटल पर रखा जाएगा और कानून बन जाएगा। नए बिल में किए गए प्रावधान के अनुसार बिल्डर अब प्रोजेक्‍ट निर्माण का 70 फीसदी की जगह 50 फीसदी पैसा ही अगल खाते (एस्‍क्रो अकाउंट) में रख सकता है। खरीदारों से एकत्र किया गया पैसा को 15 दिनों के अंदर एस्‍क्रो अकाउंट में रखना होगा। इस प्रावधान से बिल्‍डर को अपना पोर्टफोलियो बड़ा करना आसान नहीं होगा। बिल्‍डर एक प्रोजेक्‍ट के पैसे से जमीन या दूसरा प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च नहीं कर पाएगा। हालांकि, 50 फीसदी राशि किसी दूसरे खाते में रखने को लेकर और भी सख्ती बरतने की जरूरत है।
    बिल में बिल्‍डर के साथ प्रॉपर्टी एजेंट को भी शामिल किया गया है। खरीदारों के साथ धोखाधड़ी करने पर सख्‍त सजा का प्रावधान किया गया है। बिल में फंड डायवर्जन की मंजूरी देने से खरीदारों की चिंता और बढ़ गई है। कुल मिलकार यह बिल खरीदारों के लिए राम-बाण नहीं कहा जा सकता। हां, कॉमर्शियल प्रोजेक्‍ट को बिल के दायरे में लाना एक स्वागत योग्‍य कदम है। इससे कॉमर्शियल प्रोजेक्‍ट में निवेश किए हुए निवेशकों का जोखिम कम होगा।
     
    बिल्‍डर को अपने सभी अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन प्रॉपर्टी का रजिस्‍ट्रेशन तीन महीने के भीतर रेगुलेटर के गठन होने के बाद करना अनिवार्य होगा। प्रोजेक्‍ट के ले-आउट में बदलाव के लिए भी बिल्‍डर को दो-तिहाई खरीदारों से अनुमति लेनी होगी। राज्‍य सरकारों को एक साल के अंदर यह बिल लागू करना होगा। साथ ही अगले एक साल में ऑनलाइन प्रोजेक्‍ट स्‍वीकृति के लिए एक बॉडी बनानी होगी।
     
    डेवलपर की ओर से प्रोजेक्‍ट का रजिस्‍ट्री रेगुलेटर के पास कराने में असफल रहने पर कुल प्रोजेक्‍ट लागत की 10 फीसदी पेनल्टी वसूल की जाएगी। अगर, डेवलपर रेगुलेटर के नियमों की बार-बार तोड़ता है तो उसको 10 फीसदी अलग से पेनल्टी वसूल किया जाएगा या तीन साल की सजा होगी। गलत जानकारी देने पर प्रोजेक्‍ट की लागत का 5 फीसदी पेनल्‍टी देनी होगी। बिल्डर द्वारा बार-बार नियमों की अवहेलना करने पर प्रोजेक्‍ट कैंसिल करने का भी प्रावधान किया गया है।
     
    बिल में प्रावधान किया गया है कि खरीदार बिल्डर के खिलाफ शिकायत उपभोक्ता फोरम में उठा सकता है। हितधारकों ने मुद्दा उठाया था कि सिर्फ रेगुलेटर के पास शिकायत दर्ज होने से बोझ बढ़ेगा। इस बिल के अंदर उन सभी प्रोजेक्‍ट को लाया गया है जिनका पजेशन सर्टिफिकेट नहीं मिला है। इसलिए यह बिल खरीददारों और निवेशकों को बड़ी राहत देने वाला होगा।
     
    यह बिल रियल एस्टेट सेक्टर में एक नए दौर की शुरुआत करेगा। रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी। 90 देशों के ऊपर किए गए जेएलएल के ट्रांसपैरेंसी इंडेक्स में इंडिया की रैंकिंग काफी नीचे थी। इस बिल के आने के बाद ऊपर होगी। यह बिल विदेशी निवेशकों के विश्वास को बढ़ाएगा और वो निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगे। इस बिल में बहुत से बदलाव किए गए हैं, जिससे रियल्टी सेक्टर में पारदर्शिता आएगी। हालांकि, प्रोजेक्‍ट की देरी में सरकारी एजेंसियों का रोल अहम होता है। इस बिल में सरकारी एजेंसियों को शामिल नहीं किया है। इस मुद्दे को एड्रेस करने की जरूरत है।
    -लेखक वैश्विक रियल एस्‍टेट सलाहकार फर्म जेएलएल इंडिया के कंट्री हेड हैं।

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