Trending News Alerts

ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट

    Home »Personal Finance »Experts» Housing For All By 2022 Possible Only If Govt Removes Policy Related Issues

    कैसे पूरा होगा 2022 तक सभी के लिए घर का सपना

    कैसे पूरा होगा 2022 तक सभी के लिए घर का सपना
    साल2022 तक सभी परिवार को घर देने का वादा खटाई में पड़ता दिख रहा है। नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्‍ट के लिए गंभीर नहीं है। सरकार द्वारा ठोस कदम उठाने की दरकार है जो उठाई नहीं जा रही है। शहरी क्षेत्र में दो करोड़ और ग्रामीण क्षेत्र में चार करोड़ घर के निर्माण के लिए सरकार को दिलचस्‍पी दिखाने के साथ ही निवेशकों को भी आकर्षित करना होगा। अगर 2022 तक सभी को घर देना है तो प्राइवेट सेक्टर की साझेदारी और निवेश बढ़ाना होगा।
     
    एनडीए सरकार ने अपने पहले बजट में सभी को घर के जरूरत का पूरा करने के लिए नेशनल हाउसिंग बैंक में अधिक फंड अलॉट किया था। फंड शहरी और ग्रामीण एरिया में ईडब्ल्यूएस, एलआईजी घरों के निर्माण के लिए दिया गया था। इस बार सरकार ने अपने पूर्ण बजट में सभी के घर योजना के लिए कोई अलग से फंड या स्टेप नहीं लिया। सरकारी एजेंसियों का ट्रैक रिकॉर्ड भी खराब रहा है।
     
    साल 2022 तक देश के सभी परिवार को घर देना तो इसके लिए एक क्लियर विजन की जरूरत है। पॉलिसी लेवल पर सभी कारकों को पटरी पर लाना होगा। मौजूदा समय में प्रोजेक्‍ट की स्वीकृति के लिए काफी वक्‍त बरबाद होता है। कम समय में प्रोजेक्‍ट को स्‍वीकृत कर के कम कीमत के घरों का निर्माण तय समय पर पूरा किया जा सकेगा।
     
    सरकार के पास सात साल का समय बचा हुआ है। अगर 500 वर्ग फुट का घर (शहरी और ग्रामीण एरिया में रह रहे गरीब लोगों के लिए) बनाया जाता है तो हर साल करीब 4 अरब वर्ग फुट क्षेत्र का निर्माण करना होगा। यानि, सात साल के दौरान 30 अरब वर्ग फुट एरिया का निर्माण करना होगा। इसके बाद ही सभी को घर देने का वादा पूरा किया जा सकता है।
     
    इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्‍ट को क्लियर रोडमैप के बिना हासिल करना मुश्किल है। इस प्रोजेक्‍ट को पूरा करने में जमीन की उपलब्ध्ता, फंड, कंस्ट्रक्शन एक्सपर्ट, टाउन प्लानर और प्राइवेट सेक्टर की हिस्‍सेदारी होनी चाहिए जो वर्तमान में कहीं दिखाई नहीं देती है। ये सब कारण सरकार के इस प्रोजेक्‍ट को पूरा करने के रास्‍ते में सबसे बड़ी बाधा है।
     
    सरकार सिर्फ जमीन की उपलब्ध्ता और बिल्डरों को प्रोत्साहित करने के लिए एफएसआई बढ़ा कर कम कीमत के घरों की कमी को पूरा नहीं कर सकती है। शहरी और ग्रामीण गरीबों के आवास की जरूरत को पूरा करने के लिए क्रमिक बदलाव सरकार को करनी होगी। इसके लिए रेगुलेटर स्‍तर पर बदलाव, कम समय में प्रोजेक्‍ट की स्वीकृति, लाल फीताशाही पर अंकुश और जमीन संबंधी विवाद को एड्रेस करने की जरूरत है। सरकार ने अध्यादेश के जरिए अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम संसद पटल पर रखा है, लेकिन अभी यह संसद से ही पास नहीं हो पाया है।
     
    2022 तक सभी के लिए घर का वादा पूरा करने के लिए राज्‍य, नियामक निकायों, निष्पादन एजेंसी और प्राइवेट प्‍लेयर का रोल अहम होगा। राज्‍यों की सरकार की अहम महत्‍वपूर्ण भूमिका होगी। प्राइवेट सेक्टर को इस महत्वाकांक्षी योजना से जोड़ने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और सस्ते लोन मुहैया कराने से भागीदारी को सुनिश्चित किया जा सकता है।
     
    सरकार को प्राइवेट प्‍लेयर को विश्वास में लेने के लिए सरकारी एजेंसियों का ट्रैक रिकॉर्ड सही करना होगा। प्राइवेट सेक्टर के लिए सरकारी एजेंसियों का ट्रैक रिकॉर्ड अच्‍छा नहीं रहा है। प्रोजेक्‍ट की स्वीकृति के लिए प्राइवेट प्‍लेयर को लंबा इंतजार करना होता है।
     
    सरकार अपने किए हुए वादों को पूरा करने के लिए एक मजबूत सोच के साथ आगे बढ़ रही है। हालांकि, सस्ते घर की जरूरत को पूरा करने के लिए प्रत्येक लेवल पर पारदर्शिता लाना होगा। प्राइवेट प्‍लेयर की प्रोजेक्‍ट में हिस्‍सेदारी बढ़ाने के लिए कई पहलुओं पर काम करने की जरूरत है। इसके लिए अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा देना चाहिए। प्राइवेट कंपनियों को आसानी से सस्ते दर पर लोन मिले इसपर पहल करना होगा। आसानी से लोन मिलने से प्रोजेक्‍ट का काम कम समय में पूरा हो पाएगा। राज्‍य और केंद्र सरकार को एक साथ मिलकर घर की जरूरत को पूरा करना होगा। ऐसे कदम उठाए जाने के बाद ही सात साल में सभी परिवार को घर देने का वादा पूरा हो पाएगा।
     
    -लेखक वैश्विक प्रॉपर्टी सलाहकार जेएलएल इंडिया के चेयरमैन एवं कंट्री प्रमुख हैं।

    Recommendation

      Don't Miss

      NEXT STORY