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    बजट में टैक्स विवादों में कमी लाने पर है खास जोर

    बजट में टैक्स विवादों में कमी लाने पर है खास जोर
     
    बजट में बदलाव के नौ पिलर्स में से एक टैक्स रिफॉर्म है और टैक्स के नौ प्रमुख क्षेत्रों में रिफॉर्म पर जोर दिया गया है। बजट 2016 में कानूनी विवादों में कमी लाने और विवाद समाधान प्रक्रिया को दुरुस्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके लिए घरेलू टैक्सपेयर्स के वास्ते एक सीमित अवधि की कंप्लायंस विंडो पेश की गई, जिसमें 45 फीसदी टैक्स का भुगतान और रिट्रोस्पेक्टिव (पिछली तारीख से लागू) संशोधनों के कारण होने वाले विवादों के लिए एक विवाद समाधान योजना शामिल है।
     
     
    बजट 2016 में 5 करोड़ रुपए से कम टर्नओवर वाले छोटे कारोबारियों के लिए टैक्‍स में 1 फीसदी की कमी का प्रस्‍ताव दिया गया है। साथ ही नई मैन्‍युफैक्‍चरिंग कंपनी जो कोई छूट क्‍लेम नहीं करती है, उसे 5 फीसदी छूट देने का प्रस्‍ताव दिया गया है। हालांकि, सभी टैक्‍सपेयर्स को एक्सिलिरेटेड डेप्रीशिएशन और वेटेड डिडक्‍शन घटाने का लाभ मिलेगा। अमीरों की जेब पर कैंची चलाते हुए बजट में एक्‍स्‍ट्रा बोझ डाला गया है। 10 लाख से अधिक के लाभांश पर अतिरिक्‍त 10 फीसदी टैक्‍स लगाया गया है। साथ ही सरचार्ज 12 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है।
     
    बजट में दूसरी सकारात्‍मक पहल में ग्‍लोबल पेटेंट से होने वाली इनकम पर टैक्‍स छूट मिलेगी। सर्विस टैक्‍स में कोई बढ़ोतरी तो नहीं की गई है लेकिन कृषि कल्याण सेस 0.5 फीसदी लगाया गया है। अगले साल गार लागू करने की बात कही गई है।
     
    (लेखक पीडब्ल्यूसी इंडिया में लीडर-टैक्स हैं)

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