10 बाइ 10 की छोटी सी दुकान में कभी शादी की पत्रिका छापता था यह शख्स, छापे में पता चली अकूत दौलत

मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों पर आयकर की छानबीन लगातार तीसरे दिन जारी हैं। अब तक छापे से जो कुछ भी बरामद हुआ है वह काफी चौंकाने वाला है। हम यहां इस छापे के मुख्य किरदार  अश्विनी शर्मा के बारे में बता रहे हैं जो महज 19 साल पहले शादी की पत्रिका से लेकर छोटी-मोटी प्रिटिंग डिजाइन के लिए डीटीपी सेंटर चलाता था। लेकिन मप्र में वर्ष 2003 में भाजपा में सत्ता आई तो जैसे शर्मा की किस्मत को पंख लग गए।

money bhaskar

Apr 09,2019 02:33:00 PM IST

कुलदीप सिंगोरिया, दिल्ली


मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों पर आयकर की छानबीन लगातार तीसरे दिन जारी हैं। अब तक छापे से जो कुछ भी बरामद हुआ है वह काफी चौंकाने वाला है। हम यहां इस छापे के मुख्य किरदार अश्विनी शर्मा के बारे में बता रहे हैं जो महज 19 साल पहले शादी की पत्रिका से लेकर छोटी-मोटी प्रिटिंग डिजाइन के लिए डीटीपी सेंटर चलाता था। लेकिन मप्र में वर्ष 2003 में भाजपा में सत्ता आई तो जैसे शर्मा की किस्मत को पंख लग गए। उसका रसूख हाल ही में बनी कांग्रेस सरकार में भी कम नहीं हुआ। दलाली में वह ऐसा माहिर था कि सीएम के करीबी भी उसके साथ सत्ता की मलाई चाटने लगे। उसका जलवा ऐसा था कि भोपाल के पॉश प्लेटिनम प्लाजा में एक-दो नहीं बल्कि पूरे दो फ्लोर खरीद डाले। विंटेज कारों का काफिला, बाघ की खाल समेत कई एंटीक चीजें उसके कलेक्शन में थीं। आईए जानते हैं शर्मा की पूरी कहानी...

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पिता ने रिटायरमेंट की रकम से खुलवाया, नाकामी हाथ लगी तो खोल लिया एनजीओ

अश्विन के पिता डॉ. चंद्रहास शर्मा जेपी अस्पताल से शिशु राेग विशेषज्ञ डाॅक्टर के पद से वर्ष 2000 में रिटायर हुए हैं। इसके बाद उन्हाेंने हर्षवर्धन नगर में मकान खरीदा था। मकान में शिफ्टिंग के बाद डाॅक्टर पिता ने अश्विनी को हर्षवर्धन नगर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में एक छोटी सी दुकान में इंटरनेट कैफे और डीटीपी सेंटर खुलवाया था। यहां नाकामी हाथ लगी तो एक एनजीओ खोल लिया। और फिर यहीं से नेताओं और अफसरों से सांठ-गांठ कर अपने एनजीओ के लिए सरकारी विभागों से भरपूर अनुदान हासिल कर जमकर पैसा कमाया। देखते ही देखते वह मंत्रालय का रसूखदार चेहरा बन गया। बताया जाता है कि उसके प्लेटिनम प्लाजा स्थित फ्लैट पर रोजाना प्रशासनिक और पुलिस अफसरों का आना-जाना लगा रहता था। अश्विन के बचपन के दोस्तों ने बताया कि उसे लग्जरी गाड़ियां खरीदने का शौक है। इन गाड़ियों में वह खुद तो कम घूमता था, लेकिन नेताओं और अफसरों को इनमें खूब सैर कराई।

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फ्लैट के पास के स्पा सेंटर से मिलती थे अय्याशी के सामान

नतीजतन अफसरों से उसके रिश्तें घर तक हो गए। धीरे-धीरे अश्विनी के संबंध भाजपा नेताओं से हो गए। यहीं से उसे कांग्रेस के भी लिंक मिले। जैसे ही कांग्रेस सत्ता में आई तो उसने पाला बदल लिया। वह सीएम के ओएसडी रहे प्रवीण कक्कड़ के संपर्क में आ गया। यहां उसकी मदद एक मुख्य सचिव के स्तर से रिटायर हुए एक अफसर ने की। उसकी मौजूदगी का अहसास तब हुआ जब इंदौर से एक कलेक्टर का ट्रांसफर हुआ। यह कलेक्टर भोपाल में कलेक्टर रहते हुए उसके फ्लैट की सेवाएं ले चुके थे। फ्लैट के पास ही मौजूद एक स्पा सेंटर से अय्याशियों का सारा सामान मुहैया होता था। लेकिन खास बात यह थी कि कलेक्टर कांग्रेस के निशाने पर थे इसलिए उनका ट्रांसफर तो होना तय था लेकिन जब नई पदस्थापना हुई तो मलाईदार पोस्ट मिल गई। तब इसके पीछे शर्मा का हाथ माना गया। और इसके बाद तो तबादलों के लिए शर्मा के पास लाइन लग गई।


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