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10 बाइ 10 की छोटी सी दुकान में कभी शादी की पत्रिका छापता था यह शख्स, छापे में पता चली अकूत दौलत

भाजपा सरकार के जरिए अरबों का कारोबार खड़ा किया, फिर कांग्रेस में आया, बाघ की खाल से लेकर विंटेज कारों का शौक

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कुलदीप सिंगोरिया, दिल्ली 


मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों पर आयकर की छानबीन लगातार तीसरे दिन जारी हैं। अब तक छापे से जो कुछ भी बरामद हुआ है वह काफी चौंकाने वाला है। हम यहां इस छापे के मुख्य किरदार  अश्विनी शर्मा के बारे में बता रहे हैं जो महज 19 साल पहले शादी की पत्रिका से लेकर छोटी-मोटी प्रिटिंग डिजाइन के लिए डीटीपी सेंटर चलाता था। लेकिन मप्र में वर्ष 2003 में भाजपा में सत्ता आई तो जैसे शर्मा की किस्मत को पंख लग गए। उसका रसूख हाल ही में बनी कांग्रेस सरकार में भी कम नहीं हुआ। दलाली में वह ऐसा माहिर था कि सीएम के करीबी भी उसके साथ सत्ता की मलाई चाटने लगे। उसका जलवा ऐसा था कि भोपाल के पॉश प्लेटिनम प्लाजा में एक-दो नहीं बल्कि पूरे दो फ्लोर खरीद डाले। विंटेज कारों का काफिला, बाघ की खाल समेत कई एंटीक चीजें उसके कलेक्शन में थीं। आईए जानते हैं शर्मा की पूरी कहानी... 

 

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पिता ने रिटायरमेंट की रकम से खुलवाया, नाकामी हाथ लगी तो खोल लिया एनजीओ 

 

अश्विन के पिता डॉ. चंद्रहास शर्मा जेपी अस्पताल से शिशु राेग विशेषज्ञ डाॅक्टर के पद से वर्ष 2000 में रिटायर हुए हैं। इसके बाद उन्हाेंने हर्षवर्धन नगर में मकान खरीदा था। मकान में शिफ्टिंग के बाद डाॅक्टर पिता ने अश्विनी को हर्षवर्धन नगर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में एक छोटी सी दुकान में इंटरनेट कैफे और डीटीपी सेंटर खुलवाया था।  यहां नाकामी हाथ लगी तो एक एनजीओ खोल लिया। और फिर यहीं से नेताओं और अफसरों से सांठ-गांठ कर अपने एनजीओ के लिए सरकारी विभागों से भरपूर अनुदान हासिल कर जमकर पैसा कमाया। देखते ही देखते वह मंत्रालय का रसूखदार चेहरा बन गया। बताया जाता है कि उसके प्लेटिनम प्लाजा स्थित फ्लैट पर रोजाना प्रशासनिक और पुलिस अफसरों का आना-जाना लगा रहता था। अश्विन के बचपन के दोस्तों ने बताया कि उसे लग्जरी गाड़ियां खरीदने का शौक है। इन गाड़ियों में वह खुद तो कम घूमता था, लेकिन नेताओं और अफसरों को इनमें खूब सैर कराई। 

 

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फ्लैट के पास के स्पा सेंटर से मिलती थे अय्याशी के सामान 

 

नतीजतन अफसरों से उसके रिश्तें घर तक हो गए। धीरे-धीरे अश्विनी के संबंध भाजपा नेताओं से हो गए। यहीं से उसे कांग्रेस के भी लिंक मिले। जैसे ही कांग्रेस सत्ता में आई तो उसने पाला बदल लिया। वह सीएम के ओएसडी रहे प्रवीण कक्कड़ के संपर्क में आ गया। यहां उसकी मदद एक मुख्य सचिव के स्तर से रिटायर हुए एक अफसर ने की। उसकी मौजूदगी का अहसास तब हुआ जब इंदौर से एक कलेक्टर का ट्रांसफर हुआ। यह कलेक्टर भोपाल में कलेक्टर रहते हुए उसके फ्लैट की सेवाएं ले चुके थे। फ्लैट के पास ही मौजूद एक स्पा सेंटर से अय्याशियों का सारा सामान मुहैया होता था। लेकिन खास बात यह थी कि कलेक्टर कांग्रेस के निशाने पर थे इसलिए उनका ट्रांसफर तो होना तय था लेकिन जब नई पदस्थापना हुई तो मलाईदार पोस्ट मिल गई। तब इसके पीछे शर्मा का हाथ माना गया। और इसके बाद तो तबादलों के लिए शर्मा के पास लाइन लग गई। 

 


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281 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी मिली 


सीबीडीटी के प्रवक्ता व इंकम टैक्स कमिश्नर वाइडी शर्मा ने बताया कि  बड़े पैमाने पर बेहिसाब नकदी की मौजूदगी और उसके एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजे जाने की जानकारी मिलने के बाद आयकर विभाग दिल्ली (इन्वेस्टिगेशन) ने एनसीआर, भोपाल, इंदौर और गोवा में कई जगह छापेमारी और जब्ती की कार्रवाई की। इसमें आयकर के 300 अधिकारियों ने चार राज्यों के 52 ठिकाने खंगाले। मध्यप्रदेश में सर्च के दौरान एक संगठित रैकेट द्वारा नेताओं, उद्योगपतियों और नौकरशाहों से जुटाई गई 281 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी मिली। इस राशि में से 20 करोड़ रु. दिल्ली में तुगलक रोड स्थित एक वरिष्ठ नेता द्वारा एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के मुख्यालय में हवाला के जरिए भेजने के भी प्रमाण मिले। तमाम बेहिसाब लेन-देन और नकदी जुटाने के हिसाब-किताब की कई डायरियां, कंप्यूटर फाइल्स, एक्सल शीट्स भी बरामद की गईं। 14.6 करोड़ का बेहिसाब पैसा, 252 शराब की बोतल, कुछ हथियार और बाघ की कई खालें भी मिलीं। दिल्ली में सर्च के दौरान राजनीतिक दल के वरिष्ठ पदाधिकारी के रिश्तेदार के यहां से बड़ी संख्या में कैशबुक मिलीं। इनसे 230 करोड़ रुपए के अवैध लेन-देन के प्रमाण मिले। बोगस बिलों के जरिए 242 करोड़ रुपए विदेशों में भेजे जाने के भी प्रमाण मिले। टैक्स हेवन देशों की 80 कंपनियों के भी सबूत मिले। दिल्ली में कई बेहिसाब/बेनामी संपत्तियों का भी पता चला है। इस मामले में चुनाव आचार संहिता का भी उल्लंघन हुआ है। इसकी जानकारी मुख्य चुनाव आयोग को दे दी गई है। 

 

 

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