मामला /निजाम के 308 करोड़ रु के लिए भारत-पाक में चल रही जंग, 72 साल बाद आ सकता है फैसला

  • हैदराबाद के आठवें निजाम प्रिंस मुकर्रम जेह और उनके छोटे भाई मुफाखाम जेह ने भारत सरकार से मिलाया हाथ 

Moneybhaskar.com

Jun 26,2019 01:12:55 PM IST

नई दिल्ली. भारत और पाकिस्तान के बीच आजादी के बाद से हैदराबाद निजाम के 308 करोड़ रुपए के मालिकाना हक को लेकर लड़ाई जारी है। दरअसल इस रकम 1948 में हैदराबाद के तत्कालीन निजाम उस्मान अली खान ने नवगठित पाकिस्तान के ब्रिटेन में उच्चायुक्त रहे हबीब इब्राहिम रहीमटोला के लंदन स्थित एक बैंक खाते में जमा करा दी थी, जिस पर भारत और पाकिस्तान दोनों अपना हक जताते रहे हैं।

भारत के पक्ष में आ सकता है फैसला

हालांकि अब इस मामले का फैसला भारत के पक्ष में आने की उम्मीद है, क्योंकि लंदन के नेटवेस्ट बैंक पीएलसी में जमा राशि को लेकर हैदराबाद के आठवें निजाम प्रिंस मुकर्रम जेह और उनके छोटे भाई मुफाखाम जेह ने पाक सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई में भारत सरकार से हाथ मिलाया है। इस मालम में अलगे छह हफ्तों में फैसला आ सकता है। भारत समर्थक निजाम के वंशजों का दावा है कि इस पर उनका अधिकार है। ब्रिटेन स्थित पाकिस्तानी उच्चायुक्त बनाम सात अन्य (निजाम के वंशज, भारत सरकार और भारत के राष्ट्रपति) के बीच चल रहा यह मुकदमा जस्टिस मार्कस स्मिथ की कोर्ट में चल रहा है।

दरअसल हैदराबाद के अंतिम निजाम ओस्मान अली खान, जो भारत या फिर पाकिस्तान में जाने को लेकर संशय में थे। ऐसे में उन्होंने अपना धन लंदन स्थित बैंक में जमा करा दिया और तय हुआ कि निजाम जिस देश में शामिल होंगे, धन पर उस देश का मालिकाना हक हो जाएगा। हालांकि निजाम की मृत्यु के बाद जब भारत ने धन वापसी की मांग की तो नेटवेस्ट बैंक ने कहा कि उसने फंड की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान हाई कमिशनर हबीब रहमतुल्ला के पास यह धन जमा कर दिया है। तभी से इसके मालिकाना हक को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच जंग जारी है।

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