Milkbasket / 4 दोस्तों ने शुरू की थी कंपनी, एक झटके में जुटा लिए 73 करोड़ रुपए

  • मिल्कबास्केट ने 72.73 करोड़ रुपए (1.05 करोड़ डॉलर) की फंडिंग जुटाने का ऐलान किया
  • यह फंडिंग यूनिलीवर वेंचर्स की अगुआई में मेफील्ड इंडिया, कालारी कैपिटल, ब्लूम वेंचर्स से हासिल की गई है

moneybhaskar

Jun 05,2019 02:35:57 PM IST

नई दिल्ली. 4 दोस्तों द्वारा लगभग 4 साल पहले गुड़गांव से शुरू की गई कंपनी को अब खासी सफलता मिलती दिख रही है। कंपनी ने मंगलवार को एक झटके में 72.73 करोड़ रुपए (1.05 करोड़ डॉलर) जुटाने का ऐलान किया। हम यहां किराने का सामान डिलिवरी करने वाले स्टार्टअप मिल्कबास्केट (Milkbasket) की बात कर रहे हैं। कंपनी ने यह फंडिंग यूनिलीवर वेंचर्स की अगुआई में मेफील्ड इंडिया, कालारी कैपिटल, ब्लूम वेंचर्स और कुछ भारतीय फैमिली ऑफिसेस से हासिल की है।

कायम है इन्वेस्टर्स का भरोसा

इन्वेस्टमेंट प्लान्स के संबंध में कंपनी के सीईओ अनंत गोयल ने कहा, ‘भले ही इंडस्ट्री में अब ऐसी कई कंपनियां सामने आ चुकी हैं, जो हमारे मॉडल को फॉलो कर रहे हैं। इसके बावजूद हमने अब तक का अपना सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट हासिल करने में कामयाबी मिली है। यह हमारी सफलता का प्रमाण है। साफ है कि इन्वेस्टर्स का मिल्कबास्केट की ग्रोथ पर भरोसा बना हुआ है।’

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4 साल पहले 4 दोस्तों ने की थी शुरुआत

गौरतलब है कि मिल्कबास्केट (Milkbasket) की स्थापना वर्ष 2015 की शुरुआत में अनंत गोयल, आशीष गोयल, अनुराग जैन और यतीश तालवडिया ने की थी। अनंत गोयल कंपनी के सीईओ हैं। हालांकि उनकी सफलता खासी मुश्किल भरी रही। इससे पहले वे दो बिजनेस में फेल हुए, लाखों रुपए डुबो दिए। लेकिन इससे उन्होंने कई सबक लिए, तब कहीं जाकर बिजनेस जमाने में कामयाबी मिली। हम आपको उनकी संघर्ष की कहानी के बारे में ही बता रहे हैं।

आगे पढ़ें-दो बिजनेस में हो गए थे फेल


दो बिजनेस हो चुके थे फेल फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मिल्कबास्केट की शुरुआती करने से पहले उनके दो वेंचर फेल हो गए थे। हालांकि, उनसे उन्हें कई सबक मिले। कंज्यूमर्स से कई अच्छे फीडबैक भी मिले, जिनका उन्हें नए बिजनेस में फायदा मिला। पहले बिजनेस में हुआ 6 लाख का नुकसान गोयल ने अपने दोस्तों के साथ पहला वेंचर वर्ष 2012 में शुरू किया था। उन्होंने एक पेंट कंपनी शुरू की। इसके माध्यम से उनकी इस्टैंट ऑन-डिमांड पेंटिंग सर्विस देने की योजना थी। गोयल ने हंसते हुए कहा, मैंने तीन महीनों में 40 से ज्यादा घर और फार्म हाउस पेंट कराए।; हालांकि यह छोटी सी कंपनी महज 3 महीने ही चल सकी और 6 लाख रुपए लगाने के बाद इसे बंद करना पड़ा। गोयल ने कहा कि इसकी नाकामी बेहद सामान्य थी, क्योंकि पेंटिंग का यह सर्विस मॉडल कारगर नहीं था। उन्होंने कहा कि इस बिजनेस में आप सिर्फ मार्जिन ही कमा सकते थे। इसमें वॉल्यूम खासा कम था, जिसका मतलब था कि चीन से केमिकल्स खरीदो और ब्रांडिंग करके इसे बेचो। पहला सबक था कि मार्केट को पहचानो और जानो कि इसके लिए कोई प्रोडक्ट और सर्विस कारगर है य नहीं। आगे पढ़ें-दूसरे बिजनेस में भी डूब गए थे लाखोंदूसरे बिजनेस में भी हुआ लाखों का नुकसान इसके बाद उन्होंने दूसरे बिजनेस में कदम बढ़ाए, जो प्रॉपर्टी के प्रबंधन और फिर उसे किराये पर देने से संबंधित था। यह बिजनेस भी एक साल चला और 25 लाख रुपए के नुकसान के साथ इसे भी बंद करना पड़ गया। गोयल के मुताबिक, इन वेंचर्स के फेल होने से हमें सबक मिला कि हमेशा कंज्यूमर्स से ही फीडबैक लो। उन्होंने कहा, हमने ऐसा प्रोडक्ट बनाया था, जिसकी किसी को जरूरत नहीं थी।; इसके बाद उन्होंने तीसरे बिजनेस वेंचर के रूप में मिल्कबास्केट की शुरुआत की, जिसकी सफलता की कहानी आपने सामने है।
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