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मार्च में एफपीआई ने अब तक भारतीय बाजार से एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा निकाले, 2018 में साल भर में 80 हजार करोड़ रुपए ही निकाले थे

जल्दी हालत सुधरने की उम्मीद नहीं जल्दी हालत सुधरने की उम्मीद नहीं

  • संक्रमण फैलने और वैश्विक मंदी की आहट के बीच विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से निकल रहे
  • यात्रा पर पाबंदी और लॉक डाउन का नकारात्मक असर शेयर बाजार पर भी पड़ा है

Moneybhaskar.com

Mar 25,2020 03:39:45 PM IST

नई दिल्ली. कोरोना वायरस के प्रसार और वैश्विक मंदी की आहट के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से मार्च में इतनी तेजी से पैसे निकाले हैं, जितनी तेजी उन्होंने पहले कभी नहीं दिखाई थी। नेशनल सिक्युरिटीज एंड डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के मुताबिक मार्च में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय बाजार से एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की पूंजी निकाल ली। जबकि मार्च खत्म होने में अभी छह दिन बाकी ही हैं। 2018 में पूरे वर्ष में एफपीआई ने भारतीय बाजार से 80 हजार करोड़ रुपए की निकासी की थी। 2018 को भारत में एफपीआई निवेश के लिहाज से सुस्त साल माना जाता है। इससे पता चलता है कि विदेशी निवेशक कितने हताश हैं।

मार्च में 29 फीसदी गिर चुका है सेंसेक्स

कोरोना वायरस के दुनियाभर में प्रसार और इसके कारण पूरे दुनिया के मंदी की गिरफ्त में फंसने की आशंका के कारण दुनियाभर के बाजारों में हाल में भारी गिरावट देखी जा रही है। भारतीय बाजार में हालांकि कई देशों के मुकाबले ज्यादा गिरावट हुई है। मार्च में बीएसई का सेंसेक्स करीब 29 फीसदी गिर चुका है। यात्रा पर पाबंदी और संपूर्ण लॉक डाउन का नकारात्मक असर शेयर बाजार पर भी पड़ा है।

जनवरी और फरवरी में भारतीय बाजार में निवेशक बने हुए थे एफपीआई

एफपीआई जनवरी और फरवरी में भारतीय बाजार में निवेशक बने हुए थे। जनवरी में उन्होंने भाारतीय बाजार में 957 करोड़ और फरवरी में 8,970 करोड़ रुपए लगाए थे। लेकिन कोरोना वायरस के भारत में प्रवेश करने के बाद एफपीआई ने भारतीय बाजार से निकलना शुरू कर दिया।

दो साल से भारत में बिक्री कर रहे हैं एफपीआई

एफपीआई भारत में दो साल से बिक्री कर रहे हैं। 2018-19 में एफपीआई ने भारत में 38,930 करोड़ रपए की शुद्ध बिक्री की थी। चालू कारोबारी साल में एफपीआई ने अभी तक 15,925 करोड़ रुपए की शुद्ध बिक्री की है। जिस तरह से भारत में कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ रही है, उसके आाधार पर यही कहा जा सकता है कि निकट भविष्य में स्थिति में सुधार नहीं होने वाला है।

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