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  • What is the co location case, how thousands of orders were held in the stock market within 1 second

बड़ा खेल /क्या है co-location केस, कैसे 1 सेकंड के भीतर शेयर बाजार में लगते थे हजारों ऑर्डर

  • एनएसई (NSE) द्वारा कुछ मेंबर्स को दी गई यह खास फैसिलिटी थी co-location
  • दूसरों की तुलना में तेजी से ‘बाय’ और ‘सेल’ ऑर्डर प्लेस कर सकते थे खास मेंबर्स

moneybhaskar

May 01,2019 03:02:00 PM IST

नई दिल्ली. स्टॉक मार्केट रेग्युलेटर सेबी (SEBI) के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को 687 करोड़ रुपए जमा करने के आदेश से को-लोकेशन (co-location) केस खासा सुर्खियों में है। दरअसल, एनएसई (NSE) द्वारा कुछ मेंबर्स को दी गई यह एक ऐसी फैसिलिटी थी, जिससे वे स्टॉक एक्सचेंज के ट्रेडिंग इंजन पर दूसरों की तुलना में तेजी से ‘बाय’ और ‘सेल’ ऑर्डर प्लेस कर सकते थे। हम आपको को-लोकेशन (co-location) केस की पूरी ए, बी, सी, डी बता रहे हैं।

2010 में हुई थी शुरुआत

एनएसई (NSE) ने वर्ष 2010 में अपने मेंबर्स के लिए को-लोकेशन (co-location) फैसिलिटी की शुरुआत की थी। इसके तहत उस जगह पर एनएसई एक सेट-अप लगाती थी, जहां ब्रोकर के कम्प्यूटर लगे होते थे। यह स्टॉक एक्सचेंज के सर्वर की तरह ही लगाए जाते थे। इसके अलावा हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (एचएफटी) होती थी, जिसका मतलब इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के इस्तेमाल से था।

इसके एवज में फीस लेता था एनएसई

एनएसई (NSE) अपनी इस फैसिलिटी के एवज में मेंबर्स से फीस भी वसूलता था। दरअसल, इस सिस्टम से एक सेकंड से भी कम वक्त में स्टॉक एक्सचेंज पर हजारों ऑर्डर एक्जीक्यूट यानी पूरे किए जा सकते थे।
अगर किसी इन्वेस्टर के पास एक्सचेंज की को-लोकेशन फैसिलिटी नहीं है, तो उसे एक्सचेंज के ट्रेडिंग सिस्टम से दूरी के कारण मार्केट इन्फोर्मेशन मिलने में देरी हो सकती थी। रेग्युलेटर ने मार्केट फंक्शनिंग में इस इश्यू की पहचान की थी।

मार्केट फीडबैक के बिना शुरू कर दी थी यह सुविधा

इस गड़बड़ी की खबर सबसे पहले वर्ष 2017 की शुरुआत में सामने आई थी। इसके बाद सेबी (SEBI) ने स्टॉक एक्सचेंज और एनएसई की पूर्व एमडी चित्रा रामकृष्णा और रवि नारायण सहित 14 अधिकारियों को शोकॉज नोटिस जारी किए।
जब यह फैसिलिटी लागू हुई थी, तब रवि नारायण एनएसई के सीईओ और एमडी थे। उसके बाद नारायण वाइस चेयरमैन बन गए थे। नोटिस मिलने के बाद नारायण ने जून, 2017 में इस्तीफा दे दिया। एनएसई की एमडी और सीईओ चित्रा रामकृष्णा दिसंबर, 2016 में इस्तीफा दे दिया था।

सेबी की एनएसई पर बड़ी कार्रवाई

मंगलवार को सेबी (Sebi) ने को-लोकेशन केस (Co-location case) में बड़ा एक्शन लिया है। सेबी ने इस मामले में एनएसई (NSE) को ब्याज सहित 625 करोड़ रुपए जमा करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही सेबी ने एनएसई (NSE) के पूर्व सीईओ रवि नारायण और चित्रा रामकृष्ण को पैसा जमा करने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन पर 5 साल तक किसी भी लिस्टेड कंपनी के साथ जुड़ने पर बैन लगा दिया गया है। सेबी ने कहा कि एनएसई ने टीबीटी (Tick-by-Tick) आर्किटेक्चर यानी को-लोकेशन फैसिलिटी लगाने से पहले इस पर पर्याप्त विचार नहीं किया था।

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