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यूपी चीनी मिलों को राहत, प्रदेश सरकार ने 2070 करोड़ का पैकेज दिया

MarketTeam

Sep 02,2015 06:16:00 PM IST
उत्तर प्रदेश में शुगर मिल्स को प्रदेश सरकार ने राहत दी है। नकदी की किल्लत का सामना कर रही शुगर कंपनियों को राज्य सरकार ने 2070 करोड़ का राहत पैकेज दिया है। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार शुगर मिलों को गन्ने की कीमत पर 28.6 रुपए प्रति क्विंटल का सब्सिडी देगी। शुगर मिलें इस रकम का इस्तेमाल किसानों के बकाया भुगतान में करेंगी।
किसानों को मिलेगी राहत
किसान मजदूर संगठन के संयोजक बीएम सिंह ने बताया कि राज्य सरकार के पैकेज से किसानों का बकाया चुकाया जाएगा। बीएम सिंह ने कहा कि किसानों को 40 रुपए में से 28.6 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जाएगा, जबकि किसानों को 40 रुपए में से 11.4 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। राज्य सरकार ने किया हुआ वादा ही केवल पूरा किया है।
शुगर मिल्स पर बढ़ा बकाए का बोझ
शुगर इंडस्ट्री के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार से मिलने वाली राहत पिछले राहत पैकेज का ही हिस्सा है। यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी दीपक गुप्तारा के मुताबिक ये राहत पैकेज नया नहीं है इस पर पहले ही बात हो चुकी थी। दीपक गुप्तार ने मनीभास्कर से खास बातचीत में कहा कि छोटी अवधि में इस राहत से शुगर कंपनियों को फायदा मिल सकता है, हालांकि लंबी अवधि में इंडस्ट्री को और राहत की जरुरत होगी। उन्होने उम्मीद जताई कि सरकार आगे भी इंडस्ट्री के हित में फैसले ले सकती है। सचिव ने साफ किया कि फिलहाल शुगर मिल काफी मुश्किलों से जूझ रही है ऐसे में सरकार द्वारा मिलने वाले राहत पैकेज इंडस्ट्री के काफी जरूरी हैं। दरअसल नवंबर में प्रदेश सरकार ने 40 रुपए प्रति सौ किलो की सब्सिडी देने की बात कही थी। हालांकि प्रदेश सरकार ने गन्ने पर एसएपी में कोई बदलाव नहीं किया है। वहीं, शुगर इंडस्ट्री लगातार स्टेट एडवाइज्ड प्राइस में कटौती की मांग कर रही है। चीनी की कीमतों में जारी गिरावट और बढ़ती लागत से शुगर कंपनियों पर बोझ काफी बढ़ गया है। फिलहाल उत्तर प्रदेश की शुगर मिल्स पर किसानों का 7400 करोड़ रुपए बकाया है।
शुगर कंपनी के शेयरों में तेजी
इस खबर का असर उत्तर प्रदेश में स्थित शुगर कंपनियों के स्टॉक्स पर देखने को मिला है। खबर के बाद सभी स्टॉक्स में 10 फीसदी तक बढ़त देखने को मिली। कारोबार के दौरान धामपुर शुगर में 6 फीसदी, बजाज हिंदुस्तान 7 फीसदी, राणा शुगर 5 फीसदी, द्वारिकेश शुगर में 10 फीसदी तक तेजी देखने को मिली है।
लगातार 5 साल से चीनी का सरप्लस प्रोडक्शन
शुगर कंपनियों के लिए सबसे बड़ी समस्या पिछले 5 साल से हो रहा सरप्लस प्रोडक्शन है। मांग के मुकाबले सप्लाई ज्यादा रहने से कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है, और कीमतें लागत से भी नीचे चली गई हैं। इस वजह से शुगर कंपनियों पर किसानों के बकाया का बोझ बढ़ता जा रहा है। वहीं छठे साल भी रिकॉर्ड उत्पादन की आशंका से कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में चीनी कीमतें 7 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं, इससे शुगर कंपनियों के लिए अतिरिक्त चीनी के लिए मार्केट नहीं मिल रहा है। इससे कंपनियों पर दबाव काफी बढ़ गया है। देश में उत्तर प्रदेश दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है। अनुमान है कि इस साल उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन 76 लाख टन के स्तर पर पहुंच सकता है। उत्पादन बढ़ने से शुगर मिल्स मिलों के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
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