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मोदी सरकार के एक फैसले से इस कंपनी ने कमा लिए 23 हजार करोड़, ऐसे बढ़ी दौलत

आइए जानते हैं कैसे बढ़ी इस कंपनी की दौलत।

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नई दिल्ली. पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा की थी। मोदी सरकार के इस फैसले से एक ओर को जहां ज्यादातर कंपनियों पर ताला लगने की नौबत आई गई थी। वहीं सरकार के इस फैसले से कुछ कंपनियों की किस्तम खुल गई। नोटबंदी के बाद कैशलेस ट्रांजैक्‍शन को बढ़ाने और डिजिटल इंडिया को प्रोमोट करने के लिए सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों का फायदा इस कंपनी को मिला और बीते एक साल में कंपनी का मार्केट कैप 23 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा बढ़ गया। 

 

 

हम बात कर रहे हैं बैंकिंग, इंश्योरेंस, ई-गवर्नेंस, ई-कॉमर्स सर्विस देने वाली कंपनी वक्रांगी लिमिटेड की। वक्रांगी सभी प्रमुख सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए सबसे बड़ी सिंगल सिस्टम्स इंटग्रेटर है। कंपनी देश के दूरदराज गावों में फाइनेंशियल इंक्लूजन सर्विस और फाइनेंशियल लिटरसी बढ़ाने पर काम कर रही है। मोदी सरकार की डिजिटल इंडिया प्रोग्राम से भी कंपनी को फायदा मिल रहा है। आइए जानते हैं कैसे बढ़ी इस कंपनी की दौलत।

 

 

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ऐसे बढ़ी दौलत

 

नोटबंदी के बाद से वक्रांगी के बिजनेस में तेज उछाल आया है। 8 नवंबर 2016 को बीएसई पर वक्रांगी के स्टॉक की कीमत 260.60 रुपए थी। वहीं 28 नवंबर 2017 को स्टॉक की कीमत 702.55 रुपए हो गई। यानी एक साल में स्टॉक में 169.58 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। स्टॉक में आई तेजी से कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 37,193.11 करोड़ रुपए हो गया है। 8 नवंबर 2016 के बंद भाव पर कंपनी का मार्केट कैप 13796.20 करोड़ रुपए था। इस तरह एक साल में कंपनी के मार्केट कैप में 23396.91 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई।

 

 

आगे पढ़ें- कंपनी के प्रोमोटर बने अरबपति

देश के 88वें अमीर शख्स हैं नंदवाना

 

वक्रांगी लिमिटेड के प्रोमोटर दिनेश नंदवाना को पिछले महीने फोर्ब्स ने देश के टॉप 100 अमीरों की सूची में शामिल किया था। फोर्ब्स ने उनकी कुल दौलत 11,050 करोड़ रुपए (170 करोड़ डॉलर) आंकी है। फोर्ब्स की टॉप 100 भारतीय अमीरों की सूची में नंदवाना 88वें पायदान पर हैं। 
- नंदवाना ने 1990 में वक्रांगी की शुरुआत की थी। कंपनी में उनकी और उनकी पत्नी की हिस्सेदारी 42 फीसदी है।

आइडिया सेल्युलर से निकली आगे

 

वक्रांगी लिमिटेड ने मार्केट कैप के मामले में अशोक लीलैंड, टीवीएस मोटर्स, आइडिया सेल्युलर, पावर फाइनेंस, सेल, एलएंडटी फाइनेंस जैसी बड़ी कंपनियों को छोड़ दिया है। वक्रांगी का मार्केट कैप 37,193.11 करोड़ रुपए है। वहीं आइडिया सेल्युलर का मार्केट कैप 34,304.23 करोड़ रुपए है।

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