• Home
  • Projects worth more than 11 lakh crore stalled

अटके प्रोजेक्टस का इंफ्रा सेक्टर पर दबाव, बढ़ते कर्ज से मुश्किल में कंपनियां

Market Team

Jul 02,2016 04:00:00 AM IST
नई दिल्ली। देश के पहले सॉवरेन वेल्थ फंड नेशनल इनवेस्टमेंट एंड इंफ्रा फंड (एनआईआईएफ) ने फिलहाल रुके हुए प्रोजेक्ट को फंड देने से मना कर दिया है। फंड के इस सतर्क रुख से संकेत मिलता है कि इंफ्रा सेक्टर फिलहाल मुश्किल से गुजर रहा है। इससे इंफ्रा सेक्टर की ऐसी कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है, जो कर्ज मे दबी हैं और राहत का इंतजार कर रही हैं।
रुके हुए प्रोजेक्टस के लिए फंडिंग हुई मुश्किल
एनआईआईएफ में शामिल विदेशी निवेशकों की चिंताओं के बाद फंड ने फिलहाल रुके हुए प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाने से मना कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक इन प्रोजेक्ट्स में प्रमोटर्स अब रुचि कम दिखा रहे हैं। इस वजह से फंडिंग न करने का फैसला लिया गया है। दरअसल अर्थव्यवस्था में सुस्ती, और जमीन अधिग्रहण में देरी से इन प्रोजेक्ट की कॉस्ट काफी बढ़ चुकी है। वहीं लागत बढ़ने और प्रोजेक्ट के पूरा न होने से कंपनियों पर लगातार कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, जिससे प्रमोटर कई प्रोजेक्ट से फिलहाल दूरी बना रहे हैं।
एसेट क्वालिटी बेहतर बनाने का दबाव
वहीं दूसरी तरफ बढ़ते एनपीए की वजह से भी बैंकों पर एसेट क्वालिटी बेहतर बनाने का दबाव है। सीआईआई ने हाल ही में कहा है कि बैंक फिलहाल इंफ्रा सेक्टर को कर्ज देने में काफी सतर्क हैं। वहीं इंफ्रा सेक्टर में लोन पिछले कुछ समय में काफी कम हो गए हैं। फंडिंग को लेकर मुश्किलें बढ़ने से कंपनियां अपने स्तर पर फंड जुटा रही हैं। इंफ्रा सेक्टर कंपनियां अब एसेट की बिक्री कर कर्ज कम करने की कोशिश कर रही हैं।
13 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट अटके
-फरवरी में प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप की आई रिपोर्ट के मुताबिक 12.75 लाख करोड़ रुपए के 304 प्रोजेक्ट अटके हुए हैं। अटके हुए इन प्रोजेक्ट्स में से टॉप 100 प्रोजेक्ट करीब 10.4 लाख करोड़ रुपए के हैं।
-इन 100 प्रोजेक्ट्स में से अधिकांश पावर, स्टील, रेलवे और पेट्रोलियम सेक्टर के हैं।
-प्रोजेक्ट मैनेजमेंट ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक अटके हुए प्रोजेक्ट में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रमुख है।
-इन प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 77 हजार करोड़ रुपए है।
-वहीं 350 ऐसे प्रोजेक्ट जिसमें केंद्र और राज्य मिलकर काम कर रहे हैं, ऐसे प्रोजेक्ट्स में से 108 प्रोजेक्ट 4 से 15 साल की देरी से चल रहे हैं।
-3 लाख करोड़ रुपए के इन प्रोजेक्ट में रेलवे, नेशनल हाइवे, पावर और सिविल एविएशन सेक्टर के हैं।
-वहीं वर्ल्ड बैंक ने साफ कहा है कि अगर सरकार देश के सभी रुके प्रोजेक्ट्स को शुरू कर देती है तो आसानी से 7.6 फीसदी की ग्रोथ को बनी रह सकती है। अगर अटके प्रोजेक्ट में सुधार नहीं होता है तो इकोनॉमी पर दबाव देखने को मिल सकता है।
आगे जानिए इंफ्रा सेक्टर की कंपनियों पर क्या है असर
इंफ्रा प्रोजेक्ट में देरी से कंपनियों की मुश्किलें बढ़ीं प्रोजेक्ट में देरी से लागत और कर्ज बोझ बढ़ने से कई कंपनियों की हालत बुरी हो गई है। लैंको इंफ्राटेक, जीएमआर इंफ्रा और जीवीके पावर पर कुल मिलाकर 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। साल 2015-16 में तीनो कंपनियों को कुल मिलाकर 3300 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। वहीं पिछले 6 महीने में शेयर 28 फीसदी तक टूट चुके हैं। लैंको इंफ्राटेक लैंको इंफ्राटेक पर मार्च 2016 तक 40 हजार करोड़ रुपए कर्ज का बोझ है। कंपनी पावर कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट कारोबार में है। साल 2015-16 में कंपनी को कुल 265 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। कंपनी ने इस दौरान कर्ज पर 2513 करोड़ रुपए चुकाए हैं जिसकी वजह से कंपनी के मार्जिन पर असर देखने को मिला है। कंपनी अपने एसेट की बिक्री कर कर्ज का बोझ कम करने में लगी हुई है। पिछले 6 महीने में शेयर 24 फीसदी टूट चुका है। जीएमआर इंफ्रा कंपनी पर कुल 39814 करोड़ रुपए का कर्ज है, वहीं साल 2015-16 में कंपनी ने ब्याज के रूप में 4057 करोड़ रुपए चुकाए हैं। ब्याज लागत बढ़ने की वजह से कंपनी को साल में 2161 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। इसके साथ ही कंपनी ने एनर्जी और हाई प्रोजेक्ट में कैपिटल एक्सपेंडिचर को कुछ समय के लिए टाल दिया है। वहीं कंपनी कर्ज का बोझ कम करने के लिए अपने दूसरे कारोबार के लिए फंड जुटाने की कोशिश में लगी है। पिछले 6 महीने में शेयर 17 फीसदी टूटा है जीवीके पावर एंड इंफ्रा कंपनी एयरपोर्ट, पावर, कोल माइनिंग और रोड सेक्टर में काम कर रही है। 2015-16 में कंपनी के कर्ज पिछले साल के 20738 करोड़ रुपए से बढ़ कर 23218 करोड़ रुपए हो गए हैं। कंपनी ने साल के दौरान 2149 करोड़ रुपए का ब्याज चुकाया है। कर्ज की लागत बढ़ने से कंपनी के मार्जिन पर असर पड़ा है। साल में कंपनी को 934 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। पिछले 6 महीने में शेयर 28 फीसदी गिरा है। गैमन इन्फ्रास्ट्रक्चर गैमन इन्फ्रास्ट्रक्चर ने कर्ज बोझ कम करने के लिए एसेट बिक्री की सहारा लिया है। हाल ही में 6750 करोड़ रुपए के 9 प्रोजेक्ट्स में कंपनी ने हिस्सेदारी बेचने का ऐलान किया है। डील से मिली रकम का इस्तेमाल कर्ज बोझ कम करने के लिए किया जाएगा।
X

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.