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Stock Exchange / को-लोकेशन केस में NSE को राहत, ट्रिब्यूनल ने 625 करोड़ के जुर्माने की कार्रवाई पर लगाया स्टे

लेकिन मार्केट रेग्युलेटर सेबी के अकाउंट में जमा कराने होंगे 625 करोड़ रु

Securities Appellate Tribunal stays NSE fine in unfair access case
  • अपीली ट्रिब्यूनल ने एनसएसई पर सेबी की कार्रवाई पर लगाया स्टे 
  • लेकिन फैसला होने तक फंड नहीं जुटा सकेगा एनएसई


मुंबई. Co-location Case: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को को-लोकेशन केस में हुई 625 करोड़ रुपए की जुर्माने की कार्रवाई में बड़ी राहत मिली है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अपीली ट्रिब्यूनल ने सेबी द्वारा एनसएसई पर की गई इस कार्रवाई पर बुधवार को स्टे लगा दिया है। गौरतलब है कि इस मामले में एनएसई पर कुछ ब्रोकर्स को अपने नेटवर्क सर्वर का गलत तरीके से एक्सेस देने के आरोप लगे थे।

सेबी के अकाउंट में जमा करने होंगे 625 करोड़ रु

हालांकि सिक्योरिटीज अपीली ट्रिब्यूनल के दो जजों के पैनल ने एनएसई को 9 करोड़ डॉलर (लगभग 625 करोड़ रुपए) की पेनल्टी की रकम को मार्केट रेग्युलेटर सेबी (SEBI) द्वारा मैनेज्ड अकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए कहा है, जहां इस मामले में अंतिम फैसला आने तक यह धनराशि ऐसे ही रखी रहेगी।

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पिछले महीने सेबी ने लिया था बड़ा एक्शन

सेबी ने अप्रैल के आखिरी सप्ताह में इस मामले में एनएसई (NSE) को ब्याज सहित 625 करोड़ रुपए जमा करने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही सेबी ने एनएसई (NSE) के पूर्व सीईओ रवि नारायण और चित्रा रामकृष्ण पर 5 साल तक किसी भी लिस्टेड कंपनी के साथ जुड़ने पर बैन लगा दिया गया है। सेबी ने एनएसई (NSE) को को-लोकेशन केस में सालाना 12 फीसदी ब्याज के साथ 625 करोड़ रुपए जमा करने का आदेश दिया था। सेबी ने कहा था कि एनएसई ने टीबीटी (Tick-by-Tick) आर्किटेक्चर लगाने से पहले इस पर पर्याप्त विचार नहीं किया था। साथ ही सभी ब्रोकर्स को समान रूप से अपने नेटवर्क सर्वर का एक्सेस देना सुनिश्चित नहीं किया गया था।

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फंड नहीं जुटा सकेगा एनएसई

ट्रिब्यूनल ने कहा कि सेबी के आदेश पर एनएसई की अपील पर फैसला नहीं होने तक उस पर फंड जुटाने से जुड़ी बंदिशें लागू रहेंगी। एनएसई के एक वकील ने ट्रिब्यूनल को बताया कि स्टॉक एक्सचेंज ने लगभग 6 महीने के लिए स्वैच्छिक रूप से अपनी लिस्टिंग की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
एनएसई ने वर्ष 2017 में अपना आईपीओ लाने की योजना बनाई थी, लेकिन इस मामले में सेबी की जांच लंबी खिंचने की वजह से आईपीओ से कदम वापस खींच लिए थे।

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को-लोकेशन की जांच कर रहा था सेबी

आपको बता दें कि सेबी को-लोकेशन को लेकर एनएसई पर जांच कर रही थी। दरअसल मामला ये है कि जल्दी जानकारी के लिए एनएसई के डाटा सेंटर में ट्रेडर्स के सर्वर लगाते हैं। इसके लिए एनएसई एक चार्ज लेता है। जुलाई 2016 में सेबी ने इसी को-लोकेशन और इससे होने वाली आय पर जांच के आदेश दिए थे।

सामने आई थी गंभीर चूक

सेबी के अधिकारियों ने कहा था कि मार्केट रेगुलेटर को शुरुआती जांच में एक्सचेंजों की तरफ से चुनिंदा ब्रोकर्स को प्रेफरेंशियल एक्सेस दिए जाने जैसी गंभीर चूक होने का पता चला। सेबी ने जांच में एनएसई और रिलेटेड पार्टीज के फॉर्मर और मौजूदा टॉप एग्जिक्यूटिव्स की तरफ से भी चूक होने की बात की जानकारी मिली है। रेगुलेटर ने जांच के तहत कई लोगों के स्टेटमेंट भी रिकॉर्ड किए हैं। 


 

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