साइकिल हो या बाइक, छाई रही भारत की ये नं. 1 कंपनी, अब मिला नया 'हीरो'

Market team

Jun 08,2015 04:16:00 PM IST
फोटोः भारत की नंबर एक टू-व्हीलर कंपनी के नए चेयरमैन पवन मुंजाल।
नई दिल्ली. साइकिल हो या बाइक, हीरो मोटोकॉर्प कंपनी हर सेगमेंट में छाई रही। साल 1984 में कंपनी की स्थापना हुई। तब से लेकर अब तक कंपनी की नेट वर्थ 5599 करोड़ रुपए आंकड़े को पार कर गई है। तमाम-उतार चढ़ाव आए, लेकिन कंपनी आगे बढ़ती रही। अब तक इस कंपनियों को कई लोगों ने अपनी खून-पसीने से सींचा। अब कंपनी को नया 'हीरो' मिला है। दरअसल, स्थापना के समय से कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक रहे 92 वर्षीय बृहमोहन लाल मुंजाल ने कंपनी की कमान बेटे पवन मुंजाल को सौंप दी है। उन्होंने कार्यकारी चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, अभी बृजमोहन गैर-कार्यकारी की भूमिका में बने रहेंगे।
बृजमोहन लाल हैं भारत के 38वें सबसे अमीर व्यक्ति
हीरो समूह के चेयरमैन बृजमोहन लाल मुंजाल ने अपनी मेहनत, दूरदर्शिता से वह कर दिखाया, जो बहुत से लोगों के लिए सिर्फ एक सपना ही होता है। उन्होंने कड़ी मेहनत से आज अपनी टू-व्हीलर कंपनी को इस क्षेत्र में विश्व की नंबर एक कंपनी बना दिया है। सितंबर 2014 में जारी फोर्ब्स की सूची के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति 23310 करोड़ रुपए है। वह भारत के 38वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं।

ऐसे शुरू हुआ था सफर, पाकिस्तान से आए थे मुंजाल
बृजमोहन लाल मुंजाल ने अपने शुरुआती दिनों में सपना देखा था कि परिवहन का एक ऐसा सस्ता माध्यम बनाया जाए, जिसे गरीबों के लिए अपनाना मुश्किल न हो। उनके भाई ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा दी। उन्होंने साइकिल उद्योग स्थापित किया और उसे गरीबों का वाहन बना दिया। इसके बाद बृजमोहन मुंजाल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मुंजाल 20 साल की उम्र में 1944 में अपने तीन भाइयों दयानंद, सत्यानंद और ओमप्रकाश के साथ पाकिस्तान के कमालिया से अमृतसर आए थे। उन्होंने सबसे पहले साइकिल के कलपुर्जों का कारोबार शुरू किया था। उनका जन्म कमालिया में ही हुआ, जो अब पाकिस्तान में है। बंटवारे से पहले ही वे अमृतसर चले आए और यहां छोटा-मोटा काम करने लगे। बाद में वह लुधियाना चले गए, जहां वह अपने तीन भाइयों के साथ साइकिल के पार्ट्स बेचने लगे। 1954 में उन्होंने पार्ट्स बेचने की बजाए साइकिल के हैंडल, फोर्क वगैरह बनाना शुरू किया। उनकी कंपनी का नाम था ‘हीरो साइकिल्स लिमिटेड’। 1956 में पंजाब सरकार ने साइकिल बनाने का लाइसेंस जारी किया। यह लाइसेंस उनकी कंपनी को मिला और यहां से उनकी दुनिया बदल गई। सरकार से 6 लाख रुपए की वित्तीय मदद और अपनी पूंजी के दम पर हीरो साइकिल की नींव रखी। उस समय कंपनी की सालाना उत्पादन क्षमता 7,500 साइकिलों की थी। 1986 में हीरो साइकिल को दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल कंपनी माना गया।
आगे की स्लाइड में जानिए कैसे शुरू हुआ कंपनी का टू-व्हीलर बनाने का सफर....

फोटोः अब तक कंपनी के चेयरमैन रहे बृजमोहन लाल मुंजाल। 
 
ऐसे शुरू हुआ टू-व्हीलर का सफर
 
इसके बाद उन्होंने एक टू-व्हीलर कंपनी खोली, जिसका नाम था हीरो मैजेस्टिक कंपनी। इसमें उन्होंने मैजेस्टिक स्कूटर बनाने शुरू किए। 1984 में उन्होंने जापान की बड़ी ऑटो कंपनी होंडा से करार किया और यहीं से उनकी दुनिया ने फिर करवट बदली। उन्होंने होंडा के साथ मिलकर हरियाणा के धारूहेड़ा में प्लांट लगाया। 13 अप्रैल 1985 में हीरो-होंडा की पहली बाइक सीडी 100 बाजार में आई। 
 
दूसरों से खास है उनके काम करने का तरीका 
 
बृजमोहन लाल मुंजाल के अनुसार, किसी भी उद्यम को आगे बढ़ाने के लिए एक अच्छी और जुझारू टीम का होना जरूरी है, क्योंकि किसी भी व्यावसायिक लक्ष्य को पाने में 60-70 फीसदी योगदान टीम वर्क का होता है। वह कहते हैं- मैं हर हफ्ते अपने बेटों को यह कहना नहीं भूलता था कि वे अपने कर्मचारियों और डीलरों के साथ मजबूत संबंध बनाएं। उन्होंने अपने 40 डीलरों को बड़े कारोबारियों में बदला है और उनके बेटों ने उनसे एक कदम आगे बढ़कर इस आंकड़े को दोगुना और फिर तिगुना कर दिया है।
 
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धैर्य बनाएं रखें
 
किसी भी उद्यम के प्रारंभ में आने वाली कठिनाइयों से निपटने के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है। ऐसा अक्सर होता है कि आप कोई बिल जमा करने जाएं, धूप में लंबी लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करें और आपका नंबर आते-आते खिड़की बंद हो जाए। ऐसी स्थिति में अपने भाग्य को मत कोसिए, बल्कि धैर्य के साथ आगे की योजनाओं के बारे में सोचिए। एक व्यवसायी के लिए आवश्यक है कि वह छोटी-छोटी बाधाओं से परेशान होकर हताश न हो, बल्कि उनसे सीख लेकर आगे बढ़े।
 
 
ग्राहकों की नब्ज पहचानें
 
मुंजाल एक बार तकनीकी ज्ञान लेने जर्मनी गए थे। वहां जो व्यक्ति उन्हें लेने आया था, उसने हवाई अड्डे से होटल तक न सिर्फ उन्हें गीता के श्लोक सुनाए, बल्कि वे स्थान भी दिखाए, जहां साइकिलें बनती थीं। उसे पता था कि उससे मिलने आने वाला भारतीय है, इसलिए वह उसी हिसाब से तैयारी करके आया था। दरअसल सफल व्यवसायी के लिए ग्राहकों की सोच को पकड़ना जरूरी है। हीरो ग्रुप ने इस मंत्र को अच्छी तरह समझा और आज यह विश्व में दोपहिया वाहनों की सबसे बड़ी कंपनी है।
 
 
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साल-दर-साल हुई तरक्की
 
1983- होंडा मोटर कंपनी, जापान के साथ परस्पर सहयोग का करार
1984- हीरो होंडा मोटर्स लिमिटेड का गठन
1985- कंपनी की पहली मोटर साइकिल 'सीडी 100' बाजार में आई
1987- 1 लाख वीं मोटर साइकिल के निर्माण की उपलब्धि हासिल की
1991- 'सीडी 100 एसएस' पेश की, 5 लाख वीं मोटर साइकिल का निर्माण
1994- स्प्लेंडर पेश की, 10 लाख वीं मोटर साइकिल का निर्माण किया
1997- स्ट्रीट पेश की, दूसरे निर्माण संयंत्र का उद्घाटन
1999- सीबीजेड पेश की
2000- स्प्लेंडर दुनिया की सर्वाधिक बिकने वाली दुपहिया वाहन बनी
2001- पैशन पेश की, 10 लाख मोटरसाइकिलों का निर्माण, 50 लाख वीं मोटरसाइकिल का भी निर्माण किया
2003- 70 लाख वाहनों की बिक्री करने वाली भारत की पहली कंपनी बनी, सीडी डॉन और करिज्मा पेश की
2004- संयुक्त तकनीक करार का नवीनीकरण और इसे 2014 तक के लिए बढ़ाया
2005- प्लेजर के साथ स्वचालित स्कूटर संस्करण में प्रवेश, ग्लैमर और एचीवर की पेशकश की
2006- 1.50 करोड़ वें दुपहिया वाहन के निर्माण की उपलब्धि 
2007- हंक मोटर साइकिल पेश की, 2 करोड़वीं मोटर साइकिल का निर्माण
2008- हरिद्वार संयंत्र का उद्घाटन, सीबीजेड एक्सट्रीम पेश की, 2.50 करोड़वीं मोटर साइकिल का निर्माण
2009- स्प्लेंडर ने 1.1 करोड़वीं वाहन के उत्पादन की उपलब्धि हासिल की
 
 
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