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Moody's ने 13 साल बाद बढ़ाई भारत की रेटिंग, आउटलुक पॉजिटिव से स्टेबल किया

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत की सॉवरेन रेटिंग Baa3 से Baa2 किया है और आउटलुक को पॉजिटिव से बदलकर स्टेबल कर दिया है।

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नई दिल्ली. GST समेत मोदी सरकार की ओर से इकोनॉमिक रिफॉर्म के लिए उठाए गए कदमों ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। वर्ल्‍ड बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में रैकिंग बढ़ने के बाद अब ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी इंडियन इकोनॉमी पर अपना भरोसा जताया है। मूडीज ने करीब 13 साल बाद भारत की रेटिंग Baa3 से बढ़ाकर Baa2 कर दी है। इससे पहले मूडीज ने 2004 में भारत की रेटिंग अपग्रेड की थी। हालांकि  कुुछ अनिश्चितताओं के चलते  आउटलुक को पॉजिटिव से बदलकर स्टेबल कर दिया है।  2015 में मूडीज ने भारत के इकोनॉमिक आउटलुक को पॉजि‍टिव से स्‍टेबल किया था। 

 
 
 

Moody's ने अपने स्टेटमेंट में कहा कि भारत की रेटिंग अपग्रेड होने की वजह वहां देश में हो रहे इकोनॉमिक रिफॉर्म्स हैं। जैसे-जैसे वक्त बीतता जाएगा, भारत की ग्रोथ में इजाफा होगा। इस बात की भी संभावना है कि मीडियम टर्म में सरकार पर कर्ज का भार भी कम होता जाए। हमारा मानना है कि रिफॉर्म्स को सही तरीके से लागू करने पर कर्ज के तेजी से बढ़ने और ग्रोथ कम होने का खतरा कम होगा। हालांकि Moody's ने ये भी सलाह दी है कि भारत को ये भी ध्यान रखना चाहिए कि भारत का ज्यादा कर्ज कहीं उसका क्रेडिट प्रोफाइल खराब न कर दे। बता दें कि Moody's की इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत सरकार की लोकल और फॉरेन करंसी इशूअर रेटिंग को बढ़ाते हुए Baa2 कर दिया है।

 

और क्या कहा क्रेडिट एजेंसी ने?

"भारत में हो रहे इंस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स ग्रोथ को गति देंगे। मोदी सरकार के पास अपने कार्यकाल का करीब आधा वक्त है। उम्मीद है कि सरकार रिफॉर्म्स को लेकर बड़े फैसले लेगी।भारत सरकार अभी कई रिफॉर्म्स का खाका तैयार कर रही है। अगर इन्हें सही वक्त पर लागू किया गया तो देश में बिजनेस और प्रोडक्टिविटी तो बढ़ेगी ही, साथ ही फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में भी बढ़ोत्तरी होगी। भारत के रिफॉर्म प्रोग्राम की खासियत ये है कि उनमें झटका सहने की ताकत है। ये बताती है कि देश में ग्रोथ की और दुनिया के सामने खड़े होने की ताकत कितनी मजबूत है।"

 

FY19  में 7.5 फीसदी की रफ्तार पकड़ लेगी इकोनॉमी

मूडीज के अनुमान के मुताबिक, मोदी सरकार की ओर उसे उठाए गए कदमों का पॉजिटव असर वक्‍त के साथ और गहरा होता जाएगा। रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, जीएसटी और नोटबंदी का असर इस वित्‍त वर्ष में रहेगा और इंडियन इकोनॉमी 6.7 फीसदी की दर से ग्रोथ करेगी। हालांकि 2018-19 में यह रफ्तार पकड़ेगी और ग्रोथ रेट बढ़कर 7.5 फीसदी हो जाएगी। मूडीज ने अगले FY में भी इसी रफ्तार का अनुमान लगाया है। 

 

उम्‍मीद है अब दूसरी रेटिंग एजेंसियां भी बढ़ाएंगी साख: अरविंद सुब्रमण्‍यम

चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) अरविंद सुब्रमण्‍यम ने कहा है कि मूडीज की ओर से भारत की सॉवरेन रेटिंग बढ़ाए जाने के बाद अब उम्‍मीद है कि एसएंडपी और फिच जैसी दूसरी रेटिंग एजेंसियां भी ऐसा कदम उठाएंगी। उन्‍होंने कहा कि मूडीज की ओर से रेटिंग बढ़ाना अच्‍छा कदम है लेकिन हमें ऐसा लगता है, कि यह लंबे समय से अटका था। मूडीज के इस कदम से साफ है कि सरकार के एक्‍शन सही दिशा में है। जीएसटी और बैंकरप्‍सी जैसे सुधारों को रेटिंग एजेंस‍ी ने लॉन्‍ग टर्म के नजरिए से सही बताया है।  

 

क्‍या है Baa3 से Baa2 होने का मतलब?

Baa3 रेटिंग मूडीज की लोवेस्‍ट रेटिंग में एक है। बुनियादी तौर पर यह जंक स्‍टेट की ग्रेड से थोड़ा ऊपर होती है। ऐसी ग्रेडिंग वाले इकोनॉमी में इन्‍वेस्‍टमेंट प्रोस्‍पेक्टिव कम होता है। वहीं Baa2 की रेटिंग बेहतर इकोनॉमिक और इन्‍वेस्‍टमेंट के माहौल को दर्शाती है। माना जा रहा है कि रेटिंग बढ़ने का मार्केट और इकोनॉमी दोनों पर पॉजिटव असर होगा। देश में इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लो और तेज होगा।  

 

बैंक और एनबीएफसी सेक्टर पर भी पॉजिटिव होगा असर

 

रेटिंग अपग्रेड का फायदा बैंकों के साथ-साथ एनबीएफसी सेक्टर पर भी होगा। फाइनेंस इंडस्ट्री डेवलपमेंट काउंसिल के चेयरमैन रमन अग्रवाल के अनुसार एनबीएफसी सेक्टर अपने बेहतर परफॉर्मेंस की वजह से घरेलू और विदेशी निवेशकों दोनों को अट्रैक्ट कर सका है। सेक्टर की ग्रोथ रेट जहां 15 फीसदी की दर से बढ़ी है,वहीं एनपीए लेवल भी कम रहा है। ऐसे में उम्मीद है कि सेक्टर के लिए आने वाले दिनों में कर्ज मिलना सस्ता हो सकेगा।

 

 

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में भी भारत ने लगाई लंबी छलांग

वर्ल्‍ड बैंक की 31 अक्‍टूबर को आई रिपोर्ट में भारत ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मोर्चे पर भी बड़ी तरक्‍की की है। भारत पिछले साल के मुकाबले एक साथ 30 पायदान की छलांग लगाते हुए 130वें नंबर से 100वें पायदान पर पहुंच गया। वर्ल्‍ड बैंक ने भी मोदी सरकार की ओर से किए गए इकोनॉमिक रिफॉर्म को ही भारत की रैकिंग में सुधार का बड़ा कारण बताया था। यह तब हुआ था जब जीएसटी को इन रिफॉर्म्‍स में शामिल नहीं किया गया था। माना जा रहा है कि जीएसटी को शामिल करने के बाद भारत की रैंकिंग एक बार फिर से लंबी छलांग लगाएगी। 

 

जानिए मूडीज के बारे में

बता दें कि मूडीज अमेरिका की एक स्‍वतंत्र रेटिंग एजेंसी है। जो दुनिया भर के अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर नजर रखती है और उनकी परफार्मेंस तथा नीतियों के आधार पर रेटिंग देती है।  

 

आगे पढ़ें- PMO ने किया ट्वीट 

 

 

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