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मनी भास्कर खास /घरेलू निवेशकों का आधार छोटा, इसलिए बाजार पर नहीं दिख रहा सुस्ती का असर

  • निवेशक मान रहे कि सुस्ती का जो असर होना था हो चुका, अब बाजार ऊपर जाएगा

संजय कुमार साह

Jan 16,2020 08:19:29 PM IST

नई दिल्ली. देश की अर्थव्यवस्था में भारी सुस्ती के बावजूद देश के शेयर बाजार में रिकॉर्ड उछाल देखा जा रहा है, क्योंकि भारतीय शेयर बाजार को विदेशी निवेशकों से ताकत मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों का आधार बहुत छोटा है, इसलिए आर्थिक मोर्चे पर सुस्ती के बावजूद बाजार में तेजी देखी जा रही है। अभी खुदरा महंगाई दर, थोक महंगाई दर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। निर्यात में भी गिरावट का दौर जारी है। औद्योगिक उत्पादन में भी चार महीनों की गिरावट के बाद मामूली तेजी दिखाई दी है। जीडीपी विकास दर का सरकारी अनुमान घटकर 5 फीसदी पर आ गया है। जबकि गुरुवार सेंसेक्स ने पहली बार 42,000 का स्तर पार कर लिया।

शेयर बाजार और भारतीय अर्थव्यवस्था को आपस में कोई संबंध नहीं

अर्थशास्त्री और उद्योग संगठन फिक्की के पूर्व महासचिव संजय बारू ने मनी भास्कर से कहा कि शेयर बाजार और भारतीय अर्थव्यवस्था को आपस में कोई संबंध नहीं है। क्योंकि देश में बाजार का आधार काफी छोटा है। देश के काफी कम लोग शेयर बाजार में निवेश करते हैं। इसलिए भारतीय अर्थव्यवस्था की सुस्ती का बाजार पर अधिक असर नहीं दिख रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार ज्यादातर विदेशी संस्थागत निवेशको से प्रभावित होता है। अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों से बाजार ऊपर या नीचे जाता है। अभी अमेरिका और चीन में हुए समझौते के कारण बाजार में तेजी का माहौल है।

विकसित देशों में कम ब्याज दर के कारण विदेशी निवेशक उभरते बाजार में लगा रहे पैसा

एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट अभीक बरुआ ने मनी भास्कर से बातचीत में बताया कि बाजार और अर्थव्यवस्था का संबंध तो है, लेकिन अभी रुपए की विनिमय दर और शेयर बाजार पर ग्लोबल फैक्टर काम कर रहे हैं। अभी विदेशी बाजार से पैसा आ रहा है। विकसित देशों में ब्याज दर काफी कम है और नकदी काफी ज्यादा है। इसलिए इसे वे उभरते बाजारों की तरफ बढ़ा रहे हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था का हाल तो अच्छा नहीं है, लेकिन विदेशी निवेशक मान रहे हैं कि आर्थिक सुस्ती का बाजार पर जो असर होना था वह हो चुका है। अब यहां से बाजार अब ऊपर जाएगा।

एक साल में 15 फीसदी से अधिक उछला सेंसेक्स लेकिन मिडकैप व स्मॉलकैप रहे सपाट

शेयर बाजार में समग्र तौर पर तेजी हो ऐसा नहीं है। बीएसई का सेंसेक्स पिछले एक साल में 15 फीसदी से अधिक उछला है। 16 जनवरी 2019 को सेंसेक्स 36,321.29 पर बंद हुआ था। गुरुवार 16 जनवरी 2020 को यह 41,932.56 पर बंद हुआ है। इस दौरान अपेक्षाकृत अधिक शेयरों को प्रतिनिधित्व करने वाला बीएसई का मिडकैप, स्मॉलकैप और मिडकैप स्मॉलकैप इंडेक्स हालांकि लगभग समान स्तर पर बने रहे।

मजबूत शेयरों के कारण भी सेंसेक्स में तेजी

सेंसेक्स में तेजी का एक अन्य कारण उसमें मजबूत शेयरों का होना भी है। जिन कंपनियों की हालत खराब होती और जिनके शेयरों में लगातार अस्थिरता होती है, उन्हें सेंसेक्स में नहीं रखा जाता। पिछले दिनों यस बैंक को सेंसेक्स से बाहर कर दिया गया। उनकी जगह दूसरे शेयर इसमें शामिल किए गए। 16 जनवरी 2016 को यस बैंक के शेयर 208.35 रुपए पर बंद हुए थे। गुरुवार को यह 39.95 रुपए पर बंद हुआ। गत एक साल में इस शेयर ने 29.05 रुपए का निचला स्तर भी छुआ।

आर्थिक अनिश्चितता के समय मजबूत शेयरों पर अधिक भरोसा

आर्थिक अनिश्चितता के समय में लोग सोना जैसे सुरक्षित निवेश की तरफ भागते हैं। पिछले कुछ महीने में सोना 33,000 रुपए प्रति 10 ग्राम से 42,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक उछला है। इसी प्रकार खराब आर्थिक हालात के समय निवेशक मजबूत शेयरों पर दांव लगाना भी उचित समझते हैं, क्योंकि इनमें बहुत अधिक गिरावट की उम्मीद नहीं की जाती है। सेंसेक्स में तेजी का यह भी एक कारण हो सकता है।

चालू कारोबारी साल में भारत की विकास दर महज 5 फीसदी रहने का है अनुमान

यह अब छुपी हुई बात नहीं रह गई है कि भारतीय अर्थव्यवसथा बेहद सुस्त चल रही है। जीडीपी के पहले अग्रिम अनुमान में सरकार ने भी कहा है कि देश की विकास दर चालू कारोबारी साल में महज पांच फीसदी रहेगी। यह चीन के 6-6.5 फीसदी विकास दर से कम है। यानी, सरकार यह मान चुकी है कि इस साल आर्थिक तेजी के मामले में हम चीन से पीछे छूट जाएंगे। चालू कारोबारी साल की पहली तिमाही में देश की विकास दर पांच फीसदी और दूसरी तिमाही में इससे भी कम 4.5 फीसदी रही है।

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