जिसे खरीदने में अंबानी- बिड़ला हुए नाकाम, आज है 1.70 लाख करोड़ रुपए की कंपनी

एलएंडटी के नॉन एक्‍जीक्‍यूटिव चेयरमैन ए एम नाइक की बॉयोग्राफी हुई लॉन्‍च एलएंडटी के नॉन एक्‍जीक्‍यूटिव चेयरमैन ए एम नाइक की बॉयोग्राफी हुई लॉन्‍च
इसमें रिलायंस और बिड़ला के होस्‍टाइल टेकओवर की कोशिश की है पूरी जानकारी इसमें रिलायंस और बिड़ला के होस्‍टाइल टेकओवर की कोशिश की है पूरी जानकारी
कर्मचारी खुद बनें मालिक कर्मचारी खुद बनें मालिक

एलएंडटी के नॉन एक्‍जीक्‍यूटिव चैयरमेन ए एम नाइक ने अपनी बॉयोग्राफी में 2000 के शुरुआती दौर को याद करते बताया कि कैसे रिलायंस इंडस्‍ट्रीज और बिड़ला ने कंपनी को होस्‍टाइल बिड के जरिए टेकओवर करने की कोशिश की थी। यह जानकारी उनकी बॉयोग्राफी ‘दि नेशनलिस्‍ट’ के माध्‍यम से सामने आई है। इसकी आज यहां लांचिंग हुई। इस लॉन्चिग समारोह में मुकेश अंबानी और कुमार मंगलम बिड़ला उपस्थित थे। उनकी इस बॉयोग्राफी को कालम्निस्ट मिनहाज मर्चेंट ने लिखी है।

moneybhaskar

Nov 20,2017 11:01:00 PM IST

मुम्‍बई. अचानक एक फोन अाता है और हजारों करोड़ की कंपनी के टॉप बॉस को बताया जाता है कि हमारा मालिक बदल गया है। ऐसा देश की नामी कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के साथ हुआ था। यह किस्‍सा 1990 के दशक है जब तीन बार रिलायंस इंडस्‍ट्रीज और एक बार कुमार मंगलम बिड़ला ने इस कंपनी के होस्‍टाइल टेकओवर की ऐसी कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सके और एलएंडटी बाद में और बड़ी कंपनी बनी। आज इसकी मार्केट कैप करीब पौने दो लाख करोड़ रुपए के आसपास है। यह प्रसंग एलएंडटी के नॉन एग्‍जीक्‍यूटिव चेयरमैन ए एम नाइक की बॉयोग्राफी की लॉन्चिंग के दौरान फिर से ताजा हो गया। इस मौके की सबसे खास बात यह थी कि इस समारोह में मुकेश अंबानी और कुमार मंगलम बिड़ला दोनों शामिल थे। अंत में मुकेश अंबानी ने नाइक को ‘ट्रूली मैक इन इंडिया’ बताया।

बॉयोग्राफी ‘दि नेशनलिस्‍ट’ लॉन्‍च

जिस समारोह में यह बुक लॉन्‍च हुई वहां पर सभी के सामने नाइक ने इस किस्‍से को हल्‍के फुल्‍के अंदाज में बयां किया और मुकेश अंबानी और कुमार मंगलम बिड़ला धीरे-धीरे हंसते रहे। नाइक ने बताया कि नवंबर 2001 में वह शिकागो में किसी काम से गए थे। तभी उनके पास एलएंडटी सीमेंट बिजनेस के प्रमुख मोहन करनानी का फोन आया। उन्‍होंने कहा ‘अपना मालिक बदल गया है’। फिर उन्‍होंने जानकारी दी कि रिलायंस से बिड़ला ने सारी इक्विटी कैश डील में खरीद ली है।

इसके कुछ की मिनटों में उनके पास रिलायंस के तत्‍कालीन डायरेक्‍टर अनिल अंबानी का फोन आया और उन्‍होंने कहा कि नाइक आप हमें नहीं चाहते थे, तो हम जा रहे हैं। हमने सारी इक्विटी बिड़ला को बेच दी है।

किताब के अनुसार इसके बाद एक और कॉल आती है। इस बार कुमार मंगलम बिड़ला लाइन पर थे, और उन्‍होंने कहा कि आप हमारे पास नहीं आ रहे थे, नाइक जी, तो अब हम ही आपके पास आ रहे हैं।

आगे पढ़ें : कैसे चला पूरा खेल

एलएंडटी की ग्रोथ के सभी कायल थे

कंपनी की ग्रोथ देखकर धीरूभाई अंबानी का भी इस पर दिल आ गया था और उन्होंने इसके अधिग्रहण के लिए तीन बार कोशिशें कीं। धीरूभाई के लिए एलएंडटी इसलिए भी अहम थी, क्योंकि कंपनी आरआईएल के पेट्रोकेमिकल्स कॉम्पलेक्स का निर्माण भी कर रही थी। धीरूभाई की एलएंडटी के पास मौजूद भारी नकदी में भी दिलचस्पी थी।

 

मुकेश और अनिल भी आए कंपनी के बोर्ड में   

धीरूभाई एलएंडटी के अधिग्रहण की दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। उन्होंने अपने दोनों बेटों (मुकेश और अनिल) को भी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में जगह दिला दी।

 

हालांकि बोर्ड ने उनके इरादे भांप लिए

एलएंडटी बोर्ड इस बात को भांप रहा था कि अंबानी कंपनी पर पूरा होल्ड चाहते हैं। उस समय एलएंडटी में धीरूभाई की स्थिति इतनी मजबूत हो गई थी कि उन्होंने कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम पर बाजार से करोड़ों रुपए भी उठा लिए थे।

 

एलआईसी ने दिया एलएंडटी का साथ

तब तक कंपनी में अंबानी की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 19 फीसदी तक हो चुकी थी, लेकिन 1989 में राजनीतिक परिदृश्य इस तरह बदला कि धीरूभाई के हाथ से यह मौका भी निकल गया। इस बार एलआईसी (उस वक्त की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर) आगे आई और उसकी पहल पर अंबानी को एलएंडटी से बाहर जाना पड़ा।

 

जाते जाते बिड़ला को बेच गए इक्विटी

धीरूभाई को आखिरकार जाना पड़ा, लेकिन जाते-जाते वह अपनी हिस्सेदारी एक अन्य दिग्गज कारोबारी कुमार मंगलम बिड़ला को बेच गए। यह इसलिए भी अहम था, क्योंकि बिड़ला की कंपनी उस वक्त एलएंडटी की सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी कंपनियों में से एक थी। उस वक्त बिड़ला भी एलएंडटी में दिलचस्पी ले रहे थे। बिड़ला के लिए एलएंडटी बाजार का ऐसा ‘नगीना’ थी, जिसके अधिग्रहण पर उनका बाजार पर काफी हद तक एकाधिकार हो जाता। लेकिन बिड़ला का ख्वाब भी एक ऐसे शख्स ने तोड़ा, जिसे उन्होंने खुद एलएंडटी का सीईओ और एमडी बनवाया था।


 

आगे पढ़ें : कर्मचारियों को बनाया मालिक

 

 

 

नाइक ने किया आह्वान, कर्मचारी खुद बनें मालिक

बिड़ला ने 2010 के दशक की शुरुआत में खुद ही नाईक को कंपनी का सीईओ और एमडी नियुक्त किया था। संभवतः वह नाईक को पहचान नहीं सके और यही बात उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई। नाईक ने बिड़ला की कंपनी में एंट्री रोकने और कंपनी में कॉरपोरेट कल्चर बरकरार रखने की पूरी कोशिश की। इसके लिए नाईक ने अपने कर्मचारियों को भी समझाया कि यदि हम सब इसके मालिक रहेंगे तो कोई भी बाहर का व्यक्ति दोबारा कंपनी को खरीदने की कोशिश नहीं करेगा।

बाद में महीनों तक चली चर्चा के बाद एलएंडटी के कर्मचारियों के ट्रस्ट ने बिड़ला की पूरी हिस्सेदारी खरीद ली और बिड़ला को बाहर का रास्ता दिखाया। फिर नाइक की अगुआई में एलएंडटी के लिए नए युग का आगाज हुआ। जिसने इसे आज पौने दो लाख करोड़ रुपए की कंपनी बना दिया।

 
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