बाजार भविष्य /मार्च 2020 तक 13,000 पर पहुंच सकता है निफ्टी, हाउसिंग फाइनेंस-कंस्ट्रक्शन कंपनियां देंगी बेहतर रिटर्न

Money Bhaskar

May 28,2019 06:12:33 PM IST

नई दिल्ली। शेयर बाजार ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के लगातार दूसरी बार सत्ता में आने पर पहले ही उत्साहजनक प्रतिक्रिया दे दी है। बाजार के दिशासूचक निफ्टी-50 सूचकांक ने 12,000 का आंकड़ा पार कर लिया। बाजार खंडित जनादेश के बजाय स्थिरता, निरंतरता और मजबूत नेतृत्व की उम्मीद कर रहा था। केंद्र में मजबूत सरकार आने से निवेशकों की ये उम्मीदें बढ़ गई हैं कि सुधारों को अधिक सार्थक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

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मार्च 2020 तक 12,500 से 13 हजार के दायरे में रहेगा निफ्टी

कोटक सिक्योरिटीज के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ कमलेश राव का कहना है कि निफ्टी-50 वित्त वर्ष 2019-20 की अनुमानित आय के 19.2 गुना (24% आय वृद्धि पर आधारित) और वित्त वर्ष 2020-21 की अनुमानित आय के 16.3 गुना (17% आय वृद्धि पर आधारित) है। पिछले स्तरों को देखते हुए अभी निफ्टी महंगा लग रहा है, जिससे वृद्धि की ज्यादा गुंजाइश नहीं दिख रही है। यदि हम बीएफएसआई क्षेत्र की अनुमानित आय को हटा दें तो निफ्टी-50 की वित्त वर्ष 2019-20 की आय वृद्धि घट कर लगभग 12-13% रह जाएगी। इसलिए लंबे समय तक निफ्टी 19-20 PE के स्तर पर चलता रहेगा, ऐसी उम्मीद करना उचित नहीं होगा। राव ने आगे कहा कि कंजंप्शन शेयरों का मूल्यांकन बहुत ही महंगा है, जबकि कमोडिटी और पीएसयू शेयर बहुत सस्ते हैं। हम आशा करते हैं कि मार्च 2020 तक निफ्टी 12,500 और 13,000 (औसत करीब 12,750) के दायरे में रहेगा। बाजार में तेजी की चाल रहने पर निफ्टी मार्च 2020 तक 13,000-13,500 (औसत करीब 13,250) के दायरे में पहुंच सकता है।

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मिडकैप शेयरों की चाल

बाजार पूंजी (मार्केट कैप) के आधार पर देखें तो इस स्तर पर लार्जकैप शेयरों की तुलना में छोटे-मझोले (मिडकैप और स्मॉलकैप) शेयरों में अधिक मजबूती आने की संभावना है। जनवरी 2018 में अपने-अपने शिखरों से निफ्टी की तुलना में मिडकैप सूचकांक ने 25% और बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक ने 33% कमजोर प्रदर्शन किया है। ब्लूमबर्ग के आकलन के आधार पर इस समय निफ्टी के 18.3 गुना अग्रिम (फॉरवर्ड) PE के मुकाबले मिडकैप सूचकांक 15.3 गुना अग्रिम PE के मूल्यांकन पर है। मिडकैप अग्रिम PE इस समय निफ्टी अग्रिम PE के मुकाबले 16% छूट (डिस्काउंट) पर है। अवधि के हिसाब से देखें तो स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट 18 महीनों से चल रही है। एनडीए की सत्ता में वापसी पर हम उम्मीद कर सकते हैं कि घरेलू निवेशक 2-3 साल की अवधि के नजरिए से मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश करने में सहजता महसूस करेंगे। इससे मिडकैप और स्मॉलकैप में फिर से निवेश आना शुरू हो सकता है।

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मोदी 2.0 सरकार से उम्मीद

हालांकि, वृहत-आर्थिक (मैक्रो-इकोनॉमिक) स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है, मगर फिर भी हम उम्मीद करते हैं कि सरकार का ध्यान आर्थिक विकास और निवेश को पुनर्जीवित करने पर होगा। इसके लिए मजबूत राजकोषीय प्रोत्साहन की आवश्यकता है, लेकिन उच्च वित्तीय घाटे को देखते हुए ऐसा करने की गुंजाइश सीमित है। हालांकि दरों में कटौती, सरकारी बॉन्ड के लिए उच्च एफपीआई सीमा और बैंकिंग प्रणाली में नकदी डालने के रूप में मौद्रिक प्रोत्साहन की गुंजाइश है।

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एफडीआई को आकर्षित करने के लिए आर्थिक सुधारों की जरुरत

सरकार को अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करने के लिए और अधिक सुधारों को लागू करने की आवश्यकता होगी। वांछित जीडीपी वृद्धि और रोजगार सृजन के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) चक्र की स्थिति में सुधार और निजी क्षेत्र का निवेश महत्वपूर्ण होगा। सक्रिय एफआईआई और स्थानीय निवेशक दोनों ही केवल खरीदारी वाली पूंजी (लॉन्ग ओनली मनी) लेकर बाजार में उतरने के मौके का इंतजार कर रहे हैं (क्योंकि एक बार फिर पांच साल के लिए सरकार की स्थिरता और साहसिक सुधारों की संभावना दिख रही है)। एक बार चुनावी उत्साह थमने के बाद बाजार की नजर अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध जैसे वैश्विक मुद्दों, अर्थव्यवस्था के समक्ष मौजूद बड़े मुद्दों के समाधान और विशेष रूप से नकदी (लिक्विडिटी) और ऋण वृद्धि जैसी बातों की तरफ होगी। निकट भविष्य में आरबीआई की नीति और केंद्रीय बजट ऐसी मुख्य घटनाएं होंगी, जिन पर बाजार का ध्यान रहेगा। कुल मिला कर हमारा मानना है कि अगली दो तिमाहियां पूंजी बाजारों में स्थिरता वाली होंगी और इस दौरान होने वाले नीतिगत निर्णयों से भविष्य के लिए बाजार को दिशा मिलेगी।

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इन क्षेत्रों पर रहेगी नजर

राव का कहना है कि पूंजीगत सामान (कैपिटल गुड्स), निर्माण (कंस्ट्रक्शन), निर्माण सामग्री (बिल्डिंग मैटेरियल), कॉर्पोरेट बैंक, विद्युत उपकरण, हाउसिंग फाइनेंस और ग्रामीण केंद्रित कंपनियों के शेयर शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं। मांग में कमी और महंगे मूल्यांकन के कारण कंजंप्शन शेयर ठंडे रह सकते हैं।

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