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अंबानी के चक्कर में होगा मोदी सरकार का टेस्ट, देखेगी दुनिया

रिलायंस कम्युनिकेशन (RCom) के मालिक अनिल अंबानी की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं।

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नई दिल्‍ली. रिलायंस कम्युनिकेशन (RCom) के मालिक अनिल अंबानी की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। लगभग 44 हजार करोड़ के कर्ज में डूबी आरकॉम के अस्तित्‍व पर संकट मंडराने लगा है। वहीं कंपनी डिफॉल्‍टर की कैटेगरी में भी आ गई है। ऐसे में अब दुनिया की नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस खास कानून पर आ चुकी हैं, जो पिछले साल संसद से पास हुआ था। तो आइए, आज हम आपको बताते हैं कि अनिल अंबानी के चक्‍कर में आखिर कैसे पीएम मोदी के कानून का टेस्‍ट होगा।   आगे पढ़ें - डिफॉल्‍टर की कैटेगरी में आई आरकॉम

 

 

 

 

अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्‍युनिकेशन डिफॉल्‍टर की कैटेगरी में आ गई है। दरअसल, कंपनी ने डॉलर में कर्ज लिया था जिसे 2020 में चुकाना था। इसके ब्‍याज की किस्‍त नवंबर में देनी थी जो कंपनी नहीं चुका सकी है। रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को भुगतान करने की अंतिम तिथि थी। आगे पढ़ें - आखिर क्‍यों पीएम मोदी पर दुनिया की निगाहें

 क्‍यों पीएम मोदी पर दुनिया की निगाहें

 

दरअसल, मई 2016 में मोदी सरकार ने इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कानून को संसद से पास कराया था। इसका उद्देश्य दिवालिया होने की कगार पर खड़ी कंपनियों से बैंकों, इन्वेस्टर्स का पैसा निकालना था। ऐसे में जब अनिल अंबानी की कंपनी डिफॉल्‍टर की कैटेगरी में आ गई है, तो यह देखना अहम होगा कि मोदी सरकार क्‍या कार्रवाई करती है। अहम बात यह भी है कि इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कानून बनने के बाद यह पहला हाई प्रोफाइल मामला है।  आगे पढ़ें - हो चुका है इन्सॉल्वेंसी का केस दर्ज

हो चुका है इन्सॉल्वेंसी का केस दर्ज

 

पिछले दिनों एरिक्सन इंडिया ने कर्ज की बकाया रकम न चुकाने पर अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस पर इन्सॉल्वेंसी का केस दर्ज कराया था। एरिक्सन इंडिया ने 125 करोड़ रुपए बकाया रकम की अदायगी करने में नाकाम रहने पर आर कॉम पर केस दर्ज किया था। यह रकम 31 जुलाई के पहले बकाया थी। 

 

1100 करोड़ का लिया था कर्ज

 

रिलायंस कम्युनिकेशंस ने एरिक्सन इंडिया से 1100 करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज लिया था। वहीं इरिक्सन इंडिया ने बकाया रकम की अदायगी नहीं करने की वजह से रिलायंस कम्युनिकेशंस और एयरसेल लिमिटेड में मजर्र का विरोध किया था, जिसके चलते यह मर्जर नहीं हो सका था।  

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