Share Bazar /जेट एयरवेज का शेयर 50% कमजोर, मामला NCLT में जाने से लगा झटका

लेंडर्स के रिवाइवल की कोशिशों में नाकाम रहने के बाद मंगलवार को जेट एयरवेज का शेयर 50 फीसदी तक टूट गया। दरअसल स्टेट बैंक (SBI) की अगुआई में लेंडर्स के कंसोर्टियम ने एक दिन पहले ही एयरलाइन को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में भेजने का फैसला लिया था।

Moneybhaskar.com

Jun 18,2019 01:37:51 PM IST


नई दिल्ली. लेंडर्स के रिवाइवल की कोशिशों में नाकाम रहने के बाद मंगलवार को जेट एयरवेज का शेयर 50 फीसदी तक टूट गया। दरअसल स्टेट बैंक (SBI) की अगुआई में लेंडर्स के कंसोर्टियम ने एक दिन पहले ही एयरलाइन को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में भेजने का फैसला लिया था।

50 फीसदी कमजोर हुआ शेयर

इसके चलते शेयर में लगातार 12वें दिन गिरावट देखने को मिल रही है। जेट एयरवेज का शेयर बीएसई पर लगभग 15 फीसदी कमजोर होकर 58.10 रुपए पर खुला और कुछ ही देर में गिरावट बढ़ गई। फिलहाल एयरलाइन का शेयर 50 फीसदी कमजोर होकर लगभग 34 रुपए पर कारोबार कर रहा है।

12 दिन में 76 फीसदी टूटा शेयर

ट्रेडिंग वॉल्यूम की बात करें को बीएसई पर जेट एयरवेज के 27 लाख शेयरों में कारोबार हुआ और एनएसई पर 1.54 करोड़ शेयरों का कारोबार हुआ। 30 मई से अभी तक 12 ट्रेडिंग सेशंस में शेयर 76 फीसदी कमजोर हो चुका है, जो इस दौरान 150.85 रुपए से घटकर लगभग 34 रुपए पर आ गया।

एनसीएलटी में पहुंचा मामला

इससे पहले सोमवार को रिवाइवल की आस टूटने के बाद बैंकर्स ने जेट एयरवेज के मामले को एनसीएलटी में भेजने का फैसला लिया। 25 साल पहले स्थापना के बाद देश की सबसे बड़ी एयरलाइन बन चुकी जेट एयरवेज ने अप्रैल के मध्य में ऑपरेशन बंद कर दिया था। उसे कैश की तंगी के चलते यह फैसला लेने को मजबूर होना पड़ा था।
26 लेंडर्स की मीटिंग के बाद एसबीआई ने एक बयान में कहा, ‘खासे विचार-विमर्श के बाद लेंडर्स ने जेट एयरवेज को बैंकरप्सी कोड के अंतर्गत रिजॉल्यूशन के िलए भेजने का फैसला किया।’

28 जून से ट्रेडिंग पर लगनी है रोक

गौरतलब है कि स्टॉक एक्सचेंजेस ने बीते सप्ताह एक सर्कुलर जारी करके जेट एयरवेज पर कई बंदिशें लगाई थीं। इसके तहत शेयर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के वास्ते सर्विलांस मीजर्स उठाते हुए ट्रेडिंग पर रोक लगा दी थी। ये बंदिशें 28 जून से लागू होंगी।
बुधवार को जारी एक सर्कुलर में एनएसई ने कहा कि कंपनी के शेयर ‘रोलिंग सेगमेंट से ट्रेड टू ट्रेड सेगमेंट में शिफ्ट हो जाएंगे, जहां शेयर का सेटलमेंट 100 फीसदी मार्जिन और 5 फीसदी प्राइस बैंड के साथ ग्रॉस बेसिस पर होगा।’ शेयरों की ट्रेडिंग में बंदिशें ट्रेड फॉर ट्रेड सेगमेंट के लिए हैं।

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