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टैक्‍स सेविंग के लिए ये हैं टॉप 5 म्‍युचुअल फंड, 40 फीसदी तक दिया है रिटर्न

इनकम टैक्‍स बचाने के लिए किए निवेश की जानकारी मांगने का वक्‍त आ गया है। कंपनियां दिसंबर से इसकी जानकारी मांगती हैं।

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नई दिल्‍ली. इनकम टैक्‍स बचाने के लिए किए गए निवेश की जानकारी देने का समय आ गया है। कंपनियां दिसंबर से अपने कर्मचारियों से किए निवेश की जानकारी मांगने लगती हैं। अगर कर्मचारी यह डिटेल नहीं दे पाते हैं, तो उनकी सैलरी से TDS काट लिया जाता है। यह TDS बाद में रिटर्न फाइल करके वापस पाया जा सकता है, लेकिन आप पर दोहरा बोझ पड़ता है। एक तो TDS कट जाता है, इसके बाद आपको उतना निवेश करना ही पड़ता है, जिससे यह कटा हुआ TDS वापस लिया जा सके। इसलिए जरूरी है कि इनकम टैक्‍स बचाने के लिए अभी से निवेश कर लिया जाए। जानकारों की राय में म्‍युचुअल फंड की टैक्‍स बचाने वाली स्‍कीम्‍स इसके लिए बेहतर रास्‍ता हैं। ऐसे में टैक्‍स बचाने वाली टॉप स्‍कीम में इन्‍वेस्‍टमेंट करके अच्‍छा रिटर्न भी पाया जा सकता है।

 

ELSS हैं बेहतर विकल्‍प

वैल्‍यू रिसर्च के सीईओ धीरेन्‍द्र कुमार के अनुसार इनकम टैक्‍स बचाने के लिए इक्विटी लिंक सेविंग स्‍कीम (ELSS) बेहतर विकल्‍प हैं। यहां पर निवेश का लॉकइन पीरियड सबसे कम  होता है। निवेशक अपना पैसा तीन साल के बाद वापस निकाल सकता है। निवेशक चाहे तो तीन साल के बाद पैसा निकाल कर फिर से इसका निवेश कर इनकम टैक्‍स बचा सकता है। उनके अनुसार वित्‍त वर्ष में अभी 4 माह का समय बचा है। ऐसे में निवेश राशि को 4 टुकड़ों में बांट कर निवेश की रणनीति बनाई जा सकती है, लेकिन निवेशक चाहे तो पैसा एक बार में भी लगा सकता है। उनके अनुसार ELSS में पैसा तीन साल के लिए लगाया जाता है, इसलिए एक बार में निवेश करने में भी कोई दिक्‍कत नहीं हैं।

 

डिविडेंड का ऑप्‍शन लेने पर बीच में मिल सकता है पैसा

फाइनेंशियल एडवाइजर फर्म बीपीएन फिनकैप के डायरेक्‍टर ए.के.निगम का कहना है कि ELSS में एक विकल्‍प डिविडेंड पेआउट का होता है। अगर निवेशक इस ऑप्‍शन को चुनता है, तो उसे बीच में लाभांश के रूप में पैसा मिल सकता है। कुछ ELSS स्‍कीम्‍स वर्ष में एक बार तो कुछ एक से ज्‍यादा बार लाभांश देती हैं। यह पैसा पूरी तरह से टैक्‍स फ्री होता है।

 

लॉकइन के बाद भी बने रह सकते हैं निवेशित

अंश फायनेंशियल एंड इन्‍वेस्‍टमेंट के डायरेक्‍टर दिलीप कुमार गुप्‍ता के अनुसार ELSS अकेला ऐसा इन्‍वेस्‍टमेंट हैं, जहां लॉकइन पीरियड खत्म होने के बाद भी लोग निवेशित बने रह सकते हैं। यह निवेश कितने भी समय के लिए किया बनाए रखा जा सकता है। निवेशक जितना ज्‍यादा समय तक निवेशित रहता है उसके अच्‍छा रिटर्न पाने की उम्‍मीद उतनी ही ज्‍यादा होती है।

 

 

आगे पढ़ें : टॉप 5 स्‍कीम्‍स और इन्‍वेस्‍टमेंट के नियम

 

 

इनकम टैक्‍स बचाने वाली टॉप 5 स्‍कीम्‍स

 

म्‍युचुअल फंड की ELSS स्‍कीम्‍स

1 साल का रिटर्न

2 साल का रिटर्न

3 साल का रिटर्न

टाटा टैक्‍स सेविंग फंड ग्रोथ

39.4 %

21.2 %

18.3 %

आदित्‍य बिड़ला टैक्‍स प्‍लान (डायरेक्‍ट) गोथ

40.3 %

21.6 %

17.0 %

आईडीएफसी टैक्‍स एंडवांटेज ग्रोथ

46.9 %

22.6 %

16.6 %

एलएंडटी टैक्‍स एडवांटेज (डायरेक्‍ट) ग्रोथ

39.2 %

23.3 %

16.3 %

डीएसपी टैक्‍स सेवर फंड (डायरेक्‍ट) ग्रोथ

32.9 %

22.5 %

16.2 %

 

 नोट : डाटा 24 नबंवर 2017 का। एक साल का रिटर्न वार्षिक और 2 एवं 3 साल के रिटर्न कंपाउंडिड एनुअल ग्रोथ (CAGR)।

 

 

आगे पढ़ें : टैक्‍स सेविंग स्‍कीम्‍स में इन्‍वेस्‍टमेंट के नियम

 

 

ELSS में इन्‍वेस्‍टमेंट के नियम

-निवेश तीन साल के रहता है लॉकइन।

-एक बार निवेश के लिए न्‍यूनतम की सीमा 5 हजार रुपए।

-अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं।

-हर माह निवेश की सुविधा यानी सिप भी संभव।

-ज्‍यादातर स्‍कीम्‍स में 1000 रुपए से सिप की शुरुआत।

-सिप को बीच में बंद करना या निवेश बढ़ाने की भी सुविधा।

-डिविडेंट पे आउट के ऑप्‍शन में बीच में मिल सकता है लाभांश।

-यह लाभांश्‍ा होता है पूरी तरह से इनकम टैक्‍स फ्री।

-स्‍कीम से जब पैसा निकाला जाता है तो होता है टैक्‍स फ्री।

 
 
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