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इंडस्ट्रियल डिमांड घटने से मेटल की कीमतों में गिरावट, 1 माह में 12% तक टूटे शेयर

इंटरनेशनल मार्केट में निकल, कॉपर समेत सभी बेस मेटल की कीमतें गिरी हैं।

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नई दिल्ली. इंटरनेशनल मार्केट में निकल, कॉपर समेत बेस मेटल की कीमतें गिर रहीहैं। पिछले 15 दिनों में बेस मेटल की कीमतों में 5 फीसदी तक गिरावट देखने को मिली है। इकोनॉमिक स्लोडाउन और इंस्ट्रियल प्रोडक्शन में कमी के चलते डिमांड में सुस्ती रही है। मेटल के भाव में करेक्शन से पिछले एक माह में मेटल स्टॉक्स में भी 12 फीसदी तक गिरावट रही। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले एक महीने में मेटर रेंज बाउंड में रहेगा। इन्वेंट्री बिल्ट होने पर मेटल की कीमतों में तेजी आने की संभावना है।

 

1 माह में 12 फीसदी तक सस्ते हुए शेयर
मेटल की कीमतों में सुस्ती के चलते मेटल शेयरों पर भी असर हुआ है। पिछले एक माह में निफ्टी पर मेटल इंडेक्स 5 फीसदी से ज्यादा कमजोर हुआ है। वहीं, मेटल शेयरों में 12 फीसदी तक गिरावट रही है। वेदांता के शेयर 12 फीसदी, कोल इंडिया के शेयरों में 6 फीसदी, हिंडाल्को में 6.5 फीसदी, हिंदुस्तान जिंक के शेयरों में 6 फीसदी से ज्यादा और टाटा स्टील में 5 फीसदी गिरावट रही। इंडेक्स पर 15 में से 10 शेयरों में गिरावट रही है। 

 

 

हाई लेवल से मेटल्स की कीमतों में गिरावट-

 

मेटल हाई लेवल (रुपए प्रति किग्रा) गिरावट (फीसदी में)
निकल 841.9 9.6%
एल्युमीनियम 142.7  5.25%
जिंक 216.55 5.01%
कॉपर 454.4 3.37%
लेड 167.35 4.57%

 

 

क्यों गिर रही हैं मेटल की कीमतें

 

चीन में इकोनॉमिक स्लोडाउन का असर

- केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, नवंबर महीने की शुरुआत से मेटल की कीमतें लगातार गिर रही हैं। इसकी मुख्य वजह चीन का स्लोडाउन कंसर्न है। चीन की इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार धीमी हो रही है। 2018 में चीन में जीडीपी ग्रोथ 6.5 फीसदी रही है, जिसके 2019 में घटकर 6.25 फीसदी होने की उम्मीद है।

 

ईयर एंड में नए ऑर्डर का बंद होना

- एंजेल ब्रोकिंग के कमेाडिटी एंड रिसर्च वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता का कहना है कि ईयर इंड के चलते नवंबर-दिसंबर में चीन में नए ऑर्डर में कमी आनी शुरू हो जाती है। नए ऑर्डर में कमी से मार्केट में डिमांड कम हो गई है। जिससे मेटल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। अगले एक महीने में मेटर रेंज बाउंड में रहेगा। इन्वेंट्री बिल्ट होने पर पर मेटल की कीमतों में तेजी आने की संभावना है।

 

इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन गिरा

- अजय केडिया का कहना है कि दुनिया का सबसे बड़ा मेटल कंज्यूमर देश चीन का इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन डाटा कमजोर रहा है। सितंबर महीने में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन बढ़कर 6.6 फीसदी था, जो घटकर अब 6.2 फीसदी हो गया है।

- इसके अलावा फिक्सड एसेट इन्वेस्टेमेंट और रिटेल सेल्स टारगेट एक्सपेक्टेशन तक पहुंचने में नाकाम रहा है। वहीं प्रदूषण को देखते हुए चीन की सरकार ने फैक्ट्रियों को बंद करा दिया है। जिसका असर डिमांड पर देखने को मिल सकता है।

- वहीं यूएस और यूरोपीय देशों में इकोनॉमिक स्लोडाउन से मेटल के डिमांड पर असर पड़ा है। 

 

 

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