कारोबार /अजीम प्रेमजी ने विप्रो के 73 अरब रुपए के शेयर बेचकर कंपनी में बढ़ाई हिस्सेदारी

  • प्रेमजी अपने फाउंडेशन के जरिए कई परोपकार के कार्यों में दे रहे हैं मदद
  • दुनिया के पांचसें सबसे बड़े दानवीर हैं प्रेमजी और उनके ट्रस्ट

Moneybhaskar.com

Sep 12,2019 02:49:32 PM IST

नई दिल्ली. अजीम प्रेमजी और विप्रो लिमिटेड के विभिन्न प्रमोटर समूह ने देश की चौथी सबसे बड़ी आईटी कंपनी विप्रो के बायबैक कार्यक्रम में करीब 7,300 करोड़ रुपए के शेयर बेच दिए। इस बिक्री के बाद कंपनी में उनकी हिस्सेदारी में हालांकि बढ़ोतरी हो गई। सामान्य धारणा के मुताबिक शेयर बेचने से कंपनी में उनकी हिस्सेदारी कम हो जानी चाहिए। लेकिन इस सौदे के तहत विप्रो में प्रेमजी और उनके प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी बढ़ गई है।

विप्रो में 0.22 फीसदी अंक बढ़ी हिस्सेदारी

विप्रो के शेयर बेचने से कंपनी में अजीम प्रेमजी और अन्य प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी 0.22 फीसदी बढ़ गई। स्टॉक एक्सचेंज बीएसई में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक जून तिमाही में विप्रो में अजीम प्रेमजी और उनसे जुड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी73.83 फीसदी थी। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक अब कंपनी में प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी बढ़कर 74.05 फीसदी हो गई है। यह0.22 फीसदी अंक की बढ़ोतरी दर्शाता है। हिस्सेदारी बढ़ने का कारण यह है कि यह बिक्री बायबैक कार्यक्रम के तहत की गई है। बायबैक में कंपनी जो भी शेयर खरीदती है, उसे रद कर दिया जाता है। इससे बचे रह गए शेयरों को मूल्य बढ़ जाता है। शेयरों के मूल्य में इस बढ़ोतरी के कारण ही कंपनी में प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी बढ़ गई।

3.96 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर कंपनी में बढ़ाई हिस्सेदारी

विप्रो ने बुधवार को कहा कि कंपनी के संस्थापक और उनसे जुड़ी कंपनियों ने शेयर बायबैक कार्यक्रम के तहत 22.46 करोड़ शेयर बेचे। यह कंपनी की 3.96 फीसदी हिस्सेदारी है। लेकिन इतनी हिस्सेदारी बेचने से भी कंपनी में उनकी हिस्सेदारी बढ़ गई।

शेयर बेचने से क्यों बढ़ गई हिस्सेदारी

यह थोड़ा बेतुका लगता है कि शेयर बेचने से हिस्सेदारी भला कैसे बढ़ सकती है। पर इसके पीछे शुद्ध गणित है। मान लिया जाए कि किसी अमुक कंपनी के कुल शेयरों की संख्या 10 है और कंपनी का कुल बाजार मूल्य 100 रुपए है। ऐसे में कंपनी के हर शेयर का मूल्य 10 रुपए हुआ। अब मान लिया जाए कि प्रमोटर के पास कंपनी के आठ शेयर हैं, तो कंपनी में उसकी हिस्सेदारी 80 फीसदी हुई। अब यदि अमुक कंपनी ने दो शेयरों का बायबैक किया और बायबैक में प्रमोटर ने एक शेयर बेचे और दूसरा एक शेयर किसी छोटे हिस्सेदार ने बेचे, तो प्रमोटर के पास बच गए सात शेयर। दो शेयरों के बायबैक के बाद कंपनी के शेयरों की संख्या रह गई आठ। अब चूंकि आठ शेयर पर ही कंपनी का एमकैप 100 रुपए है, तो हर शेयर का मूल्य 12 रुपए से अधिक हो गया। चूंकि प्रमोटर के पास सात शेयर हैं, तो कंपनी में प्रमोटर कि हिस्सेदारी बढ़कर 84 फीसदी से अधिक हो गई। यानी प्रमोटर ने बायबैक में बेची कंपनी की एक फीसदी हिस्सेदारी, लेकिन कंपनी में उसकी हिस्सेदारी चार फीसदी से अधिक बढ़ गई।

67 फीसदी हिस्सेदारी जनहित के लिए कर दिया है दान

प्रेमजी और उनसे जुड़ी कंपनियों ने विप्रो में 67 फीसदी हिस्सेदारी से होने वाली कमाई को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के जरिये जनहित में उपयोग करने के लिए दान कर दिया है। मार्च में जब उन्होंने अपनी 67 फीसदी हिस्सेदारी जनहित के लिए दान करने की घोषणा की थी, तब उनके शेयरों की कीमत 21 अरब डॉलर थी।

एशिया के सबसे बड़े दानवीर हैं प्रेमजी और उनके ट्रस्ट

एशिया में परोपकार के लिए दान करने वालों में अजीम प्रेमजी और उनके ट्रस्ट सबसे आगे हैं। वह दुनिया में पांचवें सबसे बड़े दानवीर हैं। वे पोषण, घरेलू हिंसा रोकने, मीडिया की आजादी और शिक्षा जेसे क्षेत्रों में जनहित के काम करते हैं।

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