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सितंबर में 73 प्रति डॉलर का लेवल छू सकता है रुपया, 4 स्टॉक दे सकते हैं 120% तक रिटर्न

आईटी, फॉर्मा और एक्सपोर्ट ओरिएंटेड कंपनियों को होगा फायदा

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नई दिल्ली.  क्रूड प्राइस में बढ़ोतरी, ट्रेड वार, ग्लोबल टेंशन और डॉलर इंडेक्स में मजबूती से गुरुवार को रुपया पहली बार 72 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि रुपए में अभी और कमजोरी देखने को मिल सकती है। रुपया इस महीने प्रति डॉलर 73 रुपए के स्तर तक जा सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक, रुपए के मुकाबले डॉलर के मजबूत होने का फायदा आईटी, फॉर्मा सेक्टर समेत एक्सपोर्ट ओरिएंटेड कंपनियों को होगा। ऐसे में कुछ शेयरों में 120 फीसदी तक रिटर्न मिल सकता है।


रुपए में क्यों आई कमजोरी

इस साल रुपए में कमजोरी की कई बड़ी वजह रही है। क्रूड की कीमतें लगातार हाई बनी रहने की वजह से डॉलर की डिमांड इंटरनेशनल लेवल पर बढ़ी है। वहीं, यूएस और चीन के बीच ट्रेड वार का भी असर फॉरेक्स मार्केट पर दिखा है। तुर्की में आर्थिक संकट ने भी रुपए पर दबाव डाला है। वहीं, दुनियाभर में कई प्रमुख करंसी में कमजोरी देखी गई है। इन सभी वजहों से रुपए पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा यूएस फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के संकेत ने भी रुपए को कमजोर किया है।

 

6 ट्रेडिंग सेशन में रुपया 165 पैसे टूटा

पिछले 6 ट्रेडिंग सेशन में रुपया 165 पैसे टूटा है। वहीं छह महीने में रुपया 9.5 फीसदी तक फिसल गया है। इस साल अब तक रुपए में करीब 12 फीसदी तक की कमजोरी देखने को मिली है। पिछले साल रुपए में करीब 6 फीसदी की तेजी आई थी, लेकिन इस बार कई फैक्टर रहे हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा है।

 

73 डॉलर का दिख सकता है स्तर

एंजेल ब्रोकिंग कमोडिटी के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च अनुज गुप्ता का कहना है कि तुर्की और अर्जेंटीना जैसी इमर्जिंग मार्केट की करंसी में कमजोरी, क्रूड की कीमतें हाई बनी रहने और डॉलर की डिमांड बढ़ने से रुपए पर दबाव है। यूएस फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने से यह 73 डॉलर के लेवल पर जा सकता है। 

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के चीन पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की चिंता से रुपया पर दबाव बना है। मई 2016 के बाद रुपए में यह लगातार सातवें दिन गिरावट है।

 

इन सेक्टर को होगा फायदा

फॉर्च्यून फिस्कल के डायरेक्ट जगदीश ठक्कर के मुताबिक, रुपए के मुकाबले डॉलर के मजबूत होने का सबसे ज्यादा फायदा आईटी, फॉर्मा सेक्टर को होगा। इन सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की ज्यादा कमाई पूरी तरह से एक्सपोर्ट बेस होना है। ऐसे में डॉलर की मजबूती से आईटी कंपनियों के साथ यूएस मार्केट में कारोबार करने वाली फार्मा कंपनियों को होगा।


किन शेयरों में करें निवेश

 

 

ग्रैनुएल्स इंडिया
रिटर्न:
122%

 

ग्रैनुएल्स इंडिया एक फार्मा कंपनी है। फाइनेंशियल ईयर 2019 की पहली तिमाही में कंपनी को 51.79 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ। पिछले साल समान अवधि में मुनाफा 36.80 करोड़ रुपए रहा था। कंपनी का रेवेन्यू 453.23 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल की तुलना में कंपनी का कुल रेवेन्यू 21 फीसदी रहा। रॉ मैटेरियल प्राइसिंग प्रेशर के बावजूद कंपनी का मार्जिन बढ़ा है। कंपनी ने अमेरिका में 1.5 करोड़ डॉलर निवेश की घोषणा की है। मार्केट एक्सपर्ट सचिन सर्वदे ने स्टॉक में 250 रुपए का टारगेट दिया है। बुधवार की क्लोजिंग प्राइस 112.65 रुपए के लिहाज से स्टॉक में 122 फीसदी का रिटर्न मिल सकता है।

 

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(नोट- निवेश की सलाह एक्सपर्ट्स व ब्रोकरेज हाउस के द्वारा दी गई हैं। कृपया अपने स्तर पर या अपने एक्सपर्ट्स के जरिए किसी भी तरह की सलाह की जांच कर लें। मार्केट में निवेश के अपने जोखिम हैं, इसलिए सतर्कता जरूरी है।)

अरविंदो फार्मा
रिटर्न:
80%

 

अरविंदो फार्मा भारत की दूसरी बड़ी फॉर्मास्युटिकल्स कंपनी है। कंपनी ने अमेरिका में नोवार्टिस जेनरिक डिवीजन की सैंडोज कंपनी के कमर्शियल ऑपरेशंस और तीन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का अधिग्रहण करने का करार किया है। इस डील से अरविंदो फार्मा अमेरिका में दूसरी बड़ी डर्मेटोलॉजी और दूसरी सबसे बड़ी जेनरिक कंपनी बन जाएगी। फाइनेंशयल ईयर 2019 की पहली तिमाही में कंपनी का मुनाफा 12 फीसदी कम रहा है लेकिन कुल इनकम बढ़ी है। कंपनी पर कर्ज कम हुआ है और कंपनी अपनी कैपेसिटी बढ़ा रही है। सचिन सर्वदे ने स्टॉक के लिए 1250 रुपए का लक्ष्य दिया है। बुधवार की क्लोजिंग प्राइस 696.10 रुपए के लिहाज से स्टॉक में 80 फीसदी रिटर्न मिल सकता है।

 

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टेक महिंद्रा
रिटर्न:
46.50%

 

रुपए में कमजोरी का फायदा आईटी कंपनी टेक महिंद्रा को भी मिल सकता है। टेक महिंद्रा ने अमेरिका की चि‍पमेकर कंपनी इंटेल के साथ मिलकर बेंगलुरु में एक प्रयोगशाला की स्थापना की है।  इस लैब में 2019 तक 5जी सेवाओं की तैयारी की जाएगी। फाइनेंशियल ईयर 2019 की पहली तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट 12.4 फीसदी बढ़कर 897.9 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल समान अवधि में प्रॉफिट 798.6 करोड़ रुपए रहा था। पहली तिमाही में कंपनी का डॉलर में प्रॉफिट 6.5 फीसदी बढ़कर 13.18 करोड़ डॉलर रहा, जबकि रेवेन्यू 7.5 फीसदी बढ़कर 1220 करोड़ डॉलर रही है। जून क्वार्टर में कंपनी के क्लाइंट की संख्या बढ़कर 926 हो गई। सचिन ने स्टॉक में 1120 रुपए का टारगेट दिया है। बुधवार की क्लोजिंग प्राइस 764.25 रुपए के लिहाज से स्टॉक में 46.50 फीसदी का रिटर्न मिल सकता है।

 

ल्यूपिन
रिटर्न:
18%

 

ल्यूपिन मार्केट कैप के लिहाज से इंडिया की लीडिंग कंपनियों में शामिल है और दुनिया की 8वीं सबसे बड़ी जेनेरिक दवा बनाने वाली कंपनी है। कंपनी के तिमाही नतीजे अच्छे नहीं रहे हैं, लेकिन घरेलू कारोबार बेहतर रहा है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कंपनी की ग्रोथ बेहतर होगी। कुछ नए प्रोडक्ट मार्केट में आने वाले हैं, जिसका फायदा कंपनी को होगा। ट्रेडस्विफ्ट ब्रोकिंग के डायरेक्टर संदीप जैन ने शेयर के लिए 1080 रुपए का टारगेट दिया है। बुधवार की क्लोजिंग प्राइस 903.15 रुपए के लिहाज से शेयर में 18 फीसदी रिटर्न मिल सकता है।

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