स्कैम शब्द से चर्चा में आए परिवार को सरकार की क्लीन चिट, नहीं देना होगा इनकम टैक्स

Harshad Mehta scam : 27 साल बाद इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल ( Income Tax tribunal) ने दिवंगत हर्षद मेहता ( Harshad Mehta) , उनकी पत्नी ज्योति मेहता और भाई अश्विन से की गई टैक्स डिमांड (Tax Demand) को खारिज कर दिया है। इनकम टैक्स ने 1992 में मेहता परिवार पर 2000 करोड़ रुपए की टैक्सेबल इनकम की पहचान की थी, जिस पर टैक्स डिमांड की गई थी, लेकिन क्लेम, काउंटर क्लेम और क्रॉस अपील की लंबी जद्दोजेहद के बाद ट्रिब्यूनल ने इस टैक्स डिमांड को खारिज कर दिया था। 

Money Bhaskar

Feb 18,2019 02:23:00 PM IST

नई दिल्ली. 27 साल बाद इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल ( Income Tax tribunal) ने दिवंगत हर्षद मेहता ( Harshad Mehta) , उनकी पत्नी ज्योति मेहता और भाई अश्विन से की गई टैक्स डिमांड (Tax Demand) को खारिज कर दिया है। इनकम टैक्स ने 1992 में मेहता परिवार पर 2000 करोड़ रुपए की टैक्सेबल इनकम की पहचान की थी, जिस पर टैक्स डिमांड की गई थी, लेकिन क्लेम, काउंटर क्लेम और क्रॉस अपील की लंबी जद्दोजेहद के बाद ट्रिब्यूनल ने इस टैक्स डिमांड को खारिज कर दिया था।

कौन था हर्षद मेहता
देश में पहली बार स्कैम का इस्तेमाल 1992 में किया गया था। इसे शेयर ब्रोकर हर्षद मेहता ने अंजाम दिया था हर्षद मेहता बैंक से 15 दिन का लोन लेता था और उसे स्टॉक मार्केट में लगा देता था । साथ ही 15 दिन के भीतर वो बैंक को मुनाफे के साथ पैसा लौटा देता था। हर्षद मेहता एक बैंक से फेक बीआर बनावाता जिसके बाद उसे दूसरे बैंक से भी आराम से पैसा मिल जाता था। इसका खुलासा होने के बाद सभी बैंक ने उससे अपने पैसे वापस मागने शुरू कर दिए। खुलासा होने के बाद मेहता के ऊपर 72 क्रिमनल चार्ज लगाए गए और लगभग सिविल केस फाइल हुए। सुप्रीम कोर्ट ने उसे दोषी पाते हुए 5 साल की सजा और 25000 रुपये का जुर्माना ठोका था। मेहता थाणे जेल में बंद था। 31 दिसंबर 2001 को देर रात उसे छाटी में दर्द की शिकायत हुई जिसके बाद उसे ठाणे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसकी मौत हो गई।

अब क्या है नया मामला
इकोनॉमिक टाइम्स में 18 फरवरी को छपी रिपोर्ट के मुताबिक, टैक्स विभाग ने 28 फरवरी 1992 को मेहता परिवार पर एक छापे के साथ एक्शन शुरू किया था। तब कई दस्तावेज और शेयर सर्टिफिकेट जब्त किए गए थे। 4 जून 1992 को सीबीआई ने मेहता परिवार के खिलाफ एक सर्च ऑपरेशन चलाया और उसके बाद असेसमेंट इयर 1992-93 के लिए हर्षद मेहता ने जो टैक्स रिटर्न फाइल किया था, उसे विभाग ने खारिज कर दिया था।

1995 में इनकम टैक्स विभाग ने पाया कि मेहता परिवार ने लगभग 2014 करोड़ रुपए की इनकम पर कोई टैक्स नहीं दिया, जिस पर टैक्स डिमांड रेज की गई थी। यह मामला इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल के पास पहुंचा और लगभग 23 साल के बाद ट्रिब्यूनल ने इनकम टैक्स विभाग की इस डिमांड को खारिज कर दिया।

हर रकम टैक्सेबल इनकम नहीं
इकोनॉमिक टाइम्स में सीनियर चार्टर्ड एकाउंटेंट दिलीप लखानी के हवाले से कहा गया है कि ट्रिब्यूनल ने टैक्सेशन का मूल सिद्धांत दोहराया है कि जेपीसी, आरबीआई और सीबीआई की ओर से जांच और टिप्पणियों, काफी दस्तावेज जब्त किए जाने के बावजूद टैक्स विभाग को ट्रांजैक्शंस से जुड़ी सही टैक्सेबल इनकम की गणना करनी होगी। असेसी को मिलने वाली हर रकम को टैक्सेबल इनकम नहीं करार दिया जा सकता है। ट्रिब्यूनल ने हर ट्रांजैक्शन का विश्लेषण किया और टैक्सेबल इनकम की गणना की। यह सराहनीय काम है।'

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