क्या है लीरा क्राइसिस, क्यों ग्लोबल मार्केट में मचा है कोहराम?

लीरा क्राइसिस पूरी दुनिया में कहर बरपा रहा है। लीरा क्राइसिस की वजह से ग्लोबल मार्केट के साथ करेंसी मार्केट में भूचाल आ गया है। इसका असर भारतीय बाजारों पर दिखा। भारतीय शेयर बाजार में जहां गिरावट हुई। वहीं भारतीय करंसी रुपया अबतक के सबसे निचले स्तर 70.39 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। अब सवाल उठता है कि लीरा क्राइसिस क्या है और इस क्राइसिस के पीछे वजह क्या है?

money bhaskar

Aug 17,2018 07:01:00 PM IST

नई दिल्ली. लीरा क्राइसिस पूरी दुनिया में कहर बरपा रही है। लीरा क्राइसिस की वजह से ग्लोबल मार्केट के साथ करंसी मार्केट में भूचाल आ गया है। इसका असर भारतीय बाजारों पर दिखा। भारतीय शेयर बाजार में जहां गिरावट हुई। वहीं भारतीय करंसी रुपया अबतक के सबसे निचले स्तर 70.39 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। अब सवाल उठता है कि लीरा क्राइसिस क्या है और इस क्राइसिस के पीछे वजह क्या है?

क्या है लीरा क्राइसिस?

लीरा, तुर्की की करंसी है। तुर्की के आर्थिक संकट से ग्लोबल इकोनॉमी प्रभावित होने की आशंका से दुनियाभर में करंसी की स्थिति डगमगा गई। भारतीय रुपया भी इससे अछूता नहीं रहा। तुर्की की करंसी लीरा में 20 फीसदी से ज्यादा की गिरावट तो एक हफ्ते में आ गई, जबकि पिछले एक साल में 40 फीसदी गिरावट आई है। लीरा में बड़ी गिरावट से तुर्की में इंफ्लेशन बढ़कर 15.6 फीसदी पहुंच गया है। लीरा की गिरावट अब ऐसी स्थिति में आ गयी है, जो तुर्की की इकोनॉमी को मंदी में धकेल देगी और यह बैंकिंग संकट उत्पन्न कर सकती है। अब ऐसे हालात हो गए हैं कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन को लोगों से अपील करनी पड़ी कि अगर उनके पास विदेशी मुद्रा और सोना है तो उसे तुरंत लीरा में बदलवाएं।

क्राइसिस के पीछे क्या है वजह?

लीरा क्राइसिस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा तुर्की से इम्पोर्टेड स्टील और एल्युमीनियम पर इम्पोर्ट ड्यूटी दोगुना करने की वजह से शुरू हुई। इसके अलावा ट्रम्प ने तुर्की और अधिक आर्थिक प्रतिबंध लगाने पर विचार करने की बात कही है। करंसी का यह संकट ऐसे समय आया है, जब तुर्की का अमेरिका के साथ संबंध 1974 के बाद के सबसे बुरे दौर में है।

ग्लोबल मार्केट पर असर

तुर्की की कंपनियां भारी मात्रा में अमेरिकी डॉलर में कर्ज लेकर निवेश कर रही है। यूरोपी बैंकों ने भी उन्हें कर्ज दिया है। ऐसे में वे कोशिश कर रहे हैं कि लीरा में गिरावट से जो नुकसान हुआ है, उसे कम करें। अगर गिरावट जारी रही तो वे कंपनियां खुद को दिवालिया घोषित करके डॉलर में लिया गया कर्ज वापस नहीं करेंगी। इससे यूरोप और अमेरिकी बैंकों को भी नुकसान होगा। इसका असर ग्लोबल मार्केट पर होगा।

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