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बनाएं खुद का म्‍युचुअल फंड, मिलेगा ज्‍यादा फायदा

लोग चाहें तो अपना खुद का म्‍युचुअल फंड बना कर और भी अच्‍छा रिटर्न पा सकते हैं।

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नई दिल्‍ली. म्‍युचुअल फंड कंपनियों में निवेश करने वालों को अच्‍छा रिटर्न मिलता है। लेकिन अगर लोग चाहें तो अपना खुद का म्‍युचुअल फंड बना कर और भी अच्‍छा रिटर्न पा सकते हैं। यह काम काफी अासान है और घर बैठे ही इसे किया जा सकता है। इसके अलावा अगर लगता है कि इस प्‍लान में बीच में कोई परिवर्तन करना है तो यह भी संभव है। ऐसे प्‍लान को चलाने का एक फायदा एजेंट को दिया जाने वाला कमीशन भी बचेगा। 

 

 

पहले समझें कैसे काम करता है म्‍युचुअल फंड 

 

म्‍युचुअल फंड का सादा सा फंड है कि म्‍युचुअली लोगों से पैसा एकत्र किया जाए और फिर उसका निवेश किया जाए। बाद में फायदा बांट लिया जाए। सारी म्‍युचुअल फंड कंपनियां इसी आधार पर काम करती हैं। इन योजनाओं में कई बार तो लाखों लोग जुड़ जाते हैं। 

 

 

कैसे बनाएं खुद का म्‍युचुअल फंड

 

च्‍वॉइस ब्रोकिंग के प्रेसीडेंट अजय केजरीवाल के अनुसार शेयर की खरीद-बिक्री कराने वाली कंपनियां (ब्रोकरेज हाउस) स्‍टॉक में सिप का मौका देती हैं। इसके तहत निवेशक खुद तय कर सकता है कि वह हर माह कितने शेयर खरीदेगा। निवेशक इस सुविधा का लाभ लेते हुए अपने खुद के म्‍युचुअल फंड की शुरुआत कर सकते हैं। 

 

 

 

क्‍या रखें सावधानियां 

 

-4 या 5 शेयर से ज्‍यादा न रखे पोर्टफोलियो में

-सभी शेयर अलग-अलग सेक्‍टर्स के चुनें

-हर माह अपनी क्षमता के अनुसार करें निश्चित संख्‍या में खरीद

 

 

कैसे चुनें अच्‍छे शेयर्स

 

-टॉप मार्केट कैप वाली कंपनियों में से 

-BSE 30 में कंपनियों में से 

-NSE 50 में की कंपनियों से 

 

 

 

लम्‍बे समय के लिए करें निवेश

 

केजरीवाल के अनुसार इस तरह का निवेश अगर लम्‍बे समय के लिए किया जाए तो काफी अच्‍छा साबित हो सकता है। हालांकि उनका मानना है कि अगर कम से कम तीन का नजरिया हो तभी इस तरह का पोर्टफोलियो बनाएं। उनके अनुसार इसका बीच बीच में रिव्‍यु भी जरूर किया जाना चाहिए, तभी अच्‍छा रिटर्न मिलेगा। 

 

 

यह भी पढ़ें : बड़े काम का है टैक्स सेविंग म्युचुअल फंड, जानें निवेश की A B C D

 
 

आगे पढ़े़ : और क्‍या है तरीका

 

 

 

एक्‍सपर्ट्स से भी ले सकते हैं सलाह

 

शेयरखान में वाइस प्रेसीडेंट मृदुल कुमार वर्मा के अनुसार अगर इस तरह का म्‍युचुअल फंड बनाने में दिक्‍कत आ रही हो तो निवेशक किसी फाइनेंशियल एक्‍सपर्ट्स से भी सलाह ले सकते हैं। इस तरह के पोर्टफोलियों में आमतौर पर रोज रोज सलाह की जरूरत नहीं पड़ती है। साल में एक या दो बार अगर एक्‍सपर्ट्स की सलाह ले ली जाए तो रिटर्न और भी बेहतर किए जा सकते हैं। 

 

 

 

कई खर्च बचाता है ऐसा फंड

 

जब कोई म्‍युचुअल फंड में निवेश करता है तो उसको पहले ब्रोकर को कमीशन देना होता है। बाद में हर साल म्‍युचुअल फंड कंपनियां एक्‍सपेंस चार्ज वसूलती हैं। अगर कोई अपना खुद का म्‍युचुअल बनाता है तो उसके यह खर्च बचते हैं। यह थोड़ी थोड़ी बचत बाद में रिटर्न को और बेहतर करने में मदद करती है। 

 

 

 

 

 

 

 

(नोट-निवेश सलाह ब्रोकरेज हाउस और मार्केट एक्सपर्ट्स के द्वारा दी गई हैं। कृपया इनकी अपने स्तर पर या अपने एक्सपर्ट्स के जरिए जांच कर लें। मार्केट में निवेश के अपने जोखिम होते हैं।)

 

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