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Vodafone को 64 हजार करोड़ का नुकसान, इंडियन आर्म ने दिया झटका

भारतीय इकाई के डिस्पोजल से Vodafone को सितंबर में समाप्त छमाही में 27880 करोड़ रु का नुकसान हुआ है।

Vodafone posts EUR 7.8 bn loss for H1 2018 due to loss in disposal of Indian arm

 

नई दिल्ली. ब्रिटेन की टेलिकॉम कंपनी वोडाफोन (Vodafone) को भारतीय कारोबार के कारण तगड़ा झटका लगा है। वोडाफोन को अपनी भारतीय इकाई के डिस्पोजल में हुआ 3.4 अरब यूरो (27880 करोड़ रुपए) के नुकसान और स्पेन व रोमानिया में इन्वेस्टमेंट पर इम्पेयरमेंट चार्जेस के कारण 2018 की पहली छमाही में 7.8 अरब अरब यूरो (64 हजार करोड़ रुपए) का लॉस हुआ है। वहीं 2017 में समान अवधि के दौरान कंपनी को 1.2 अरब यूरो का प्रॉफिट हुआ था।

 

 

इन वजहों से हुआ नुकसान

वोडाफोन ने एक बयान में कहा, ‘30 सितंबर, 2018 में समाप्त छमाही के दौरान ग्रुप के स्पेन, रोमानिया और वोडाफोन आइडिया में किए गए निवेश पर 3.5 अरब यूरो का इम्पेयरमेंट चार्जेस दिया। वहीं वोडाफोन इंडिया डिस्पोजल पर कंपनी को 3.4 अरब यूरो का लॉस उठाना पड़ा।’

 

 

भारतीय आर्म का आइडिया के साथ हो गया है मर्जर

वोडाफोन आइडिया अब आदित्य बिड़ला ग्रुप की टेलिकॉम आर्म आइडिया सेल्युलर के साथ मर्ज्ड एंटिटी के तौर पर ऑपरेट होती है। यह मर्जर इस साल अगस्त में पूरा हो गया। ब्रिटेन की टेलिकॉम कंपनी ने कहा, ‘वोडाफोन इंडिया 31 अगस्त 2018 से ग्रुप के सभी आंकड़ों से अलग हो गई और अब ग्रुप में वोडाफोन आइडिया के रिजल्ट को शामिल कर लिया गया है।’

 

 

भारतीय आर्म से मिला कितना रेवेन्यू

वोडाफोन ग्रुप के फाइनेंशियल नंबर्स में वोडाफोन इंडिया के जुलाई-अगस्त के प्रदर्शन को शामिल किया गया है। ग्रुप की भारतीय आर्म को दो महीनों में अपनी सर्विसेस से 95.50 करोड़ यूरो का रेवेन्यू हासिल हुआ। वोडाफोन आइडिया में वोडाफोन की हिस्सेदारी 45.20 फीसदी और आदित्य बिड़ला ग्रुप की 26 फीसदी है।

 

 

दुनिया भर में 5.5 फीसदी घटा रेवेन्यू

सितंबर, 2018 में समाप्त छमाही के दौरान वोडाफोन ग्रुप के रेवेन्यू को भी झटका लगा, जो 5.5 फीसदी घटकर 2.17 अरब यूरो रह गया। वहीं बीते साल समान अवधि के दौरान रेवेन्यू 2.30 अरब यूरो रहा था। वोडाफोन ने कहा कि प्राइसिंग प्रेशर के कारण भारतीय बाजार में हालात अभी भी बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं, जिसके चलते इंडस्ट्री को कंसॉलिडेशन की ओर रुख करना पड़ा और सेक्टर में प्रॉफिटेबिलिटी में कमी आई और फाइनेंसिंग पर प्रेशर खासा बढ़ गया।

 
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