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नौकरी न मिली तो शुरू किया बिजनेस, अब कमा रही 1.60 लाख रु महीना

आइए जानते हैं कैसे सुनीला ने नौकरी न मिलने पर अपना बिजनेस शुरू किया।

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नई दिल्ली.  आमतौर पर महिलाएं अपने घर और परिवार का ख्‍याल रखने के चक्कर में करियर को नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन हरियाणा के जिंद की रहने वाली सुनीला जाखड़ इनसे अलग हैं। उन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी पाने की कोशिश की। नौकरी   न मिलने पर भी उसने हार नहीं मानी। कुछ करने की चाहत और अपनी एक पहचान बनाने की ख्वाहिश में उन्होंने बिजनेस की शुरुआत की और आज वो इसे सफलतापूर्वक चलाने के साथ अच्छी-खासी कमाई भी कर रही हैं। आइए जानते हैं कैसे सुनीला ने नौकरी न मिलने पर अपना बिजनेस शुरू किया।

 

 

नौकरी नहीं मिली तो किया 2 महीने का कोर्स

 

सुनीला जाखड़ ने मनी भास्कर से बातचीत में बताया कि एग्रीकल्चर में बीएससी करने के बाद नौकरी के लिए कई जगह अप्लाई की। लेकिन नौकरी नहीं मिली। नौकरी न मिलने के बावजूद वो निराश नहीं हुई। उन्होंने बिजनेस करने की ठानी। इसके लिए सुनीला ने करनाल स्थित इंडियन सोसायटी ऑफ एग्रीबिजनेस प्रोफेशनल्स (ISAP) के तहत एग्री-क्लिनिक एंड एग्री-बिजनेस सेंटर्स को ज्वाइन किया। कोर्स पूरा होने के बाद उसने अपना खुद का बिजनेस शुरू किया और आज सुनीला के बिजनेस का सालाना टर्नओवर 60 लाख रुपए हो गया है।

 

आगे पढ़ें- क्या बिजनेस करती हैं सुनीला

मधुमक्खी पालन का है बिजनेस

 

2 महीने की ट्रेनिंग के दौरान सुनीला ने एपीएरी (मधमक्खियों पालन का स्थान) का दौरा किया था। यहां आने के बाद उन्होंने मधुमक्खी पालन का बिजनेस शुरू करने का मन बनाया। वो कहती हैं कि यह बिजनेस पारिवारिक था और इसमें काफी जानकारी होने की वजह से इस बिजनेस को शुरू करना अच्छा लगा। उनका मानना है कि अन्य कई छोटे-मोटे बिजनेस की तुलना में मधुमक्खी पालन का बिजनेस किफायती है।

 

2 लाख के निवेश से शुरू हुआ बिजनेस

 

सुनीला ने कहा कि मधुमक्खी पालन का बिजनेस शुरू करने में 2 लाख रुपए इन्वेस्टमेंट के रूप में लगे। उन्होंने हरियाणा हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट से 50 पेटी सब्सिडी पर खरीदी। इसके के बाद मधुमक्खी खरीदी और फिर तेजस एपीएरी की शुरुआत हुई। आज उनका तेजस एपीएरी मधुमक्खी पालन का बॉक्स बनाने, शहद प्रोसेसिंग और ट्रेनिंग सेंटर की सुविधा देता है।

 

आगे पढ़ें, कैसे होती है कमाई

ऐसे होती है इनकम

 

सुनीला के मुताबिक, शहद, बीकीपिंग बॉक्स, हनी प्रोसेसिंग एंड ट्रेनिंग से उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 60 लाख रुपए हो गया है। उन्होंने 400 से ज्यादा किसानों को प्रशिक्षित किया है और 20 किसानों के ग्रुप को मिलाकर बीकीपर को पंजीकृत कराया है। इसके अलावा वो ग्रामीण किसानों से मिलकर उनको बी बॉक्स उपलब्ध कराने के साथ फ्री में ट्रेनिंग देती हैं। शहद बनने के बाद वो उनसे खरीदती हैं औऱ उसे बाजार में अपने ब्रांड से बेचती हैं। 

 

मंथली लाखों में करती हैं कमाई

 

उनका कहना है कि वो इस बिजनेस से सालाना 20 लाख रुपए की कमाई कर लेती हैं। वो अपने ब्रांड को अब विदेश में भी बेचने का प्लान बना रही हैं। इसके लिए वो कुछ कंपनियों से करार करने वाली हैं।

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