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बिटक्वॉइन से भी महंगा है ये मेटल, खुद को गिरवी रखकर भी नहीं खरीद पाएंगे 193 देश

आइए जानते हैं क्यों है ये दुनिया का सबसे महंगा मेटल।

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नई दिल्ली. क्रिप्‍टोकरंसी बिटक्‍वॉइन दुनिया की सबसे महंगी करंसी मानी जाती है। पिछले हफ्ते बिटक्‍वॉइन का एक यूनिट 13 लाख रुपए (20 हजार डॉलर) पर पहुंच गया है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में एक ऐसा मेटल है जिसकी एक ग्राम की कीमत बिटक्वॉइन से कई गुना ज्यादा है। यही नहीं, दुनिया के 193 देश खुद को गिरवी रखकर भी इस मेटल को खरीद नहीं पाएंगे। इस मेटल की एक ग्राम की कीमत तकरीबन 6.25 लाख करोड़ डॉलर है। आइए जानते हैं क्यों है ये दुनिया का सबसे महंगा मेटल।

 

 

एक ग्राम की कीमत 6.25 लाख करोड़ डॉलर

 

दुनिया का सबसे महंगा मेटल है एंटीमैटर। द रिचेस्‍ट के मुताबिक इसकी एक ग्राम की कीमत 406 लाख करोड़ रुपए है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, एंटीमैटर दरअसल एक पदार्थ के ही समान है, लेकिन उसके एटम के भीतर की हर चीज उलटी है। एटम में सामान्य तौर पर पॉजिटिव चार्ज वाले न्यूक्लियस और नेगेटिव चार्ज वाले इलैक्ट्रोंस होते हैं, लेकिन एंटीमैटर एटम में नेगेटिव चार्ज वाले न्यूक्लियस और पॉजिटिव चार्ज वाले इलैक्ट्रोंस होते हैं। ये एक तरह का ईधन है, जिसे अंतरिक्ष में दूसरे ग्रहों पर जाने वाले स्पेसशिप में इस्तेमाल किया जाता है। एंटीमैटर को इसलिए सबसे महंगा माना जाता है, क्योंकि इसे बनाने वाली टेक्नोलॉजी सबसे ज्यादा खर्चीली है। 1 मिलीग्राम एंटीमैटर बनाने में 25 करोड़ रुपए से ज्यादा लग जाते हैं।

 

 

आगे पढ़ें- सिर्फ दो देश के पास है खरीदने की ताकत

अमेरिका-चीन के पास है खरीदने की ताकत

 

दुनिया के सबसे महंगे मेटल को खरीदने की ताकत की सिर्फ दो देशों के पास है। वो देश हैं अमेरिका और चीन। स्टैटिक्स टाइम्स के मुताबिक, अमेरिकी की जीडीपी 19 लाख करोड़ डॉलर है, जबकि चीन की जीडीपी करीब 11 लाख करोड़ डॉलर है। इन दोनों देश के पास इस मेटल को खरीदने के लिए खुद को गिरवी रखने की जरूरत नहीं है।

 

भारत-जापान भी नहीं खरीद पाएंगे एंटीमैटर

 

भारत सहित दुनिया के 193 देश भी अपने को गिरवी रखकर इस मेटल के एक ग्राम को नहीं खरीद पाएंगे। स्टैटिक्स टाइम्स के मुताबिक, जापान की जीडीपी 4.841 लाख करोड़ डॉलर, जर्मनी की 3.423 लाख करोड़ डॉलर, यूके की 2.496 लाख करोड़ डॉलर और भारत की जीडीपी 2.454 लाख करोड़ डॉलर है। वहीं एक ग्राम एंटीमैटर की कीमत 6.25 लाख करोड़ डॉलर है, जो इन देशों की जीडीपी से ज्यादा है। इसका मतलब ये देश अपने को गिरवरी रखकर भी इस मेटल खरीदने में सक्षम नहीं हैं।

 

आगे पढ़ें- कहां से आता है एंटीमैटर

एंटीमैटर एक काल्पनिक तत्व नहीं, बल्कि असली तत्व होता है। इसकी खोज बीसवीं शताब्दी में हुई थी। ये अंतरिक्ष में ही छोटे-छोटे टुकड़ों में मौजूद है। जिस तरह सभी भौतिक वस्तुएं मैटर यानी पदार्थ से बनती हैं और मैटर में प्रोटोन, इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रॉन होते हैं, उसी तरह एंटीमैटर में एंटीप्रोटोन, पोसिट्रॉन्स और एंटीन्यूट्रॉन होते हैं। एंटीमैटर को बनाने के लिए लैब में वैज्ञानिक इसे दूसरे पदार्थों के साथ मिलाकर थोड़ा रिफाइन करते हैं। ताकि इसका इस्तेमाल ईधन के रूप में हो सके। अंतरिक्षयान और परमाणु हथियारों के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है। रॉकेट लॉन्चर में भी है इसकी उपयोगिता है।

 

 

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